बॉर्डर पर विरोध मार्च और ह्यूमन शील्ड; जमात-ए-इस्लामी के ऐलान के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ेगा तनाव? – Hindustan Hindi News

India-Bangladesh Relation: बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी इस्लामी दलों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। यह मार्च कथित भारतीय ‘पुश-इन’ (जबरन घुसपैठ) और सीमा क्षेत्र में बांग्लादेशी नागरिकों की हत्याओं के विरोध में आयोजित किया जाएगा। हसीना-विरोधी छात्र संगठन नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) ने सीमा पर रहने वाले बांग्लादेशियों से ‘ह्यूमन शील्ड’ बनाने का खुला आह्वान किया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारत और बांग्लादेश के बीच नई दिल्ली में उच्च स्तरीय सीमा वार्ता चल रही है और दोनों देशों के बीच 4096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तनाव बढ़ता जा रहा है।

बुधवार को ढाका स्थित जमात-ए-इस्लामी के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गठबंधन ने विस्तृत कार्यक्रम घोषित किया। गठबंधन के समन्वयक और जमात-ए-इस्लामी के सहायक महासचिव एएचएम हामिदुर रहमान आजाद ने कहा कि 12 जून को सभी सीमावर्ती जिलों और महत्वपूर्ण सीमा चौकियों पर विरोध रैलियां निकाली जाएंगी। इसके बाद 15 जून को राजधानी ढाका में विशाल विरोध सभा और जुलूस आयोजित किया जाएगा। गठबंधन में शामिल प्रमुख दलों में नेशनल सिटीजन पार्टी, बांग्लादेश खिलाफत मजलिस, खिलाफत मजलिस, अमर बांग्लादेश पार्टी, जातीय गणतांत्रिक पार्टी सहित अन्य विपक्षी संगठन शामिल हैं। यह गठबंधन 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से पहले गठित किया गया था और वर्तमान में देश की प्रमुख विपक्षी ताकत के रूप में उभरा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनसीपी के मुख्य समन्वयक नासिरुद्दीन पटवारी ने भावुक अपील करते हुए कहा कि जीरो लाइन के पास रहने वाले हमारे भाई-बहन मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। हम बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को और अधिक मजबूत करने की मांग करते हैं। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों से अपील करते हैं कि वे ‘ह्यूमन शील्ड’ बनकर खड़े हों ताकि कोई आतंकवादी, तस्कर या अपराधी बांग्लादेश में घुस न सके।

जमात नेता एएचएम हामिदुर रहमान आजाद ने विस्तृत आंकड़े देते हुए आरोप लगाया कि पिछले तीन महीनों (मार्च, अप्रैल और मई) में सीमा पर 50 से अधिक घुसपैठ की घटनाएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान 2479 लोगों को बांग्लादेश भेजने का प्रयास किया गया, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। आजाद ने आगे कहा कि बीएनपी सरकार के पहले 100 दिनों में भारत के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की गोलीबारी में 19 बांग्लादेशी नागरिक मारे गए और 24 घायल हुए। इसके अलावा बीएसएफ और म्यांमार की अराकान आर्मी द्वारा 83 लोगों को हिरासत में लिया गया या जबरन ले जाया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बीएनपी सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार भारत के सामने नरम रुख अपनाए हुए है और सीमा सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है।

भारत ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत जबरन किसी को घुसपैठ नहीं करा रहा है। केवल उचित सत्यापन और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद अवैध विदेशी नागरिकों को द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार वापस भेजा जा रहा है। हम बांग्लादेश से अपील करते हैं कि राष्ट्रीयता सत्यापन की प्रक्रिया तेज की जाए ताकि प्रत्यावर्तन सुचारू रूप से हो सके। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया चल रही है। पश्चिम बंगाल सरकार के अनुसार, अब तक लगभग 4800 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश भेजा जा चुका है, जबकि 836 अन्य हिरासत में हैं।

यह विरोध कार्यक्रम 8 से 11 जून तक नई दिल्ली में बीएसएफ और बीजीबी के बीच हुई 57वीं महानिदेशक स्तरीय वार्ता के ठीक बाद आया है। ढाका ने इस वार्ता में ‘पुश-इन’ के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। राजनयिक स्तर पर चर्चा जारी रहते हुए भी जमात-ए-इस्लामी का गठबंधन मुद्दे को सड़कों पर ले जाने का फैसला कर चुका है। इस महीने की शुरुआत में आजाद ने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद की टिप्पणियों की तुलना भारतीय मंत्रियों से करते हुए सरकार पर ‘भारत के साथ मिलीभगत’ का आरोप लगाया था।

गौरतलब है कि भारत-बांग्लादेश सीमा विश्व की सबसे लंबी स्थलीय सीमाओं में से एक है। हाल के वर्षों में अवैध प्रवासन, तस्करी और सीमा सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार तनाव बढ़ा है। पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की हालिया चुनावी सफलता के बाद भारत सरकार ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों पर सख्त कार्रवाई तेज कर दी है। विपक्षी दलों का मानना है कि बीएनपी सरकार इस मुद्दे पर पर्याप्त मजबूती से खड़ी नहीं हो पा रही है। वहीं, सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि सीमा सुरक्षा को लेकर वे पूरी तरह सतर्क हैं और कूटनीतिक माध्यम से मुद्दे का समाधान निकाला जाएगा।

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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