ट्रंप की अजीबोगरीब रैलियां और बयानबाजी रिपब्लिकन पार्टी की चिंता बढ़ा रहे हैं। सवाल यह है कि खुद अपनी रैलियों …और पढ़ें
मध्यावधि चुनाव और डोनल्ड ट्रंप की रैलियां।
ट्रंप की रैलियों में विवादित बयानबाजी, रिपब्लिकन पार्टी की चिंता बढ़ी।
समर्थकों को ‘कचरा’ कहने पर भी तालियां, अंधभक्ति पर सवाल।
ट्रंप का आंदोलन नीति नहीं, पहचान और गुस्से पर आधारित।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका की राजनीति इन दिनों एक अजीब दौर से गुजर रही है। देश के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप आजकल अपनी रैलियों में नीतियों और विकास की बात करने के बजाय लोगों के शरीर, शारीरिक बनावट और अजीबोगरीब जोक्स पर ज्यादा बात कर रहे हैं।
लेकिन ट्रंप के इन बयानों के बीच रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं की नींद उड़ी हुई है। उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या ट्रंप का यह तरीका आगामी मध्यावधि चुनावों में पार्टी की नैया पार लगा पाएगा या फिर पार्टी को डुबाएगा?
इस बात को ऐसे समझिए कि चुनावी थकान और ताबड़तोड़ दौरों से ट्रंप अब परेशान नजर आ रहे हैं। फ्लोरिडा की एक रैली में उन्होंने अपनी ही रैलियों को कचरा कह डाला। उन्होंने शिकायत की कि उन्हें लगातार 28 दिनों तक यह सब करना पड़ रहा है और उनकी आवाज भी अब केवल 49% क्षमता पर काम कर रही है। एक राजनेता का अपनी ही रैलियों और समर्थकों की भीड़ को इस तरह कोसना अपने आप में हैरान करने वाला है।-1793503162935.webp)
अच्छा, बात यही नहीं खत्म हुई। इससे पहले ट्रंप ने पिछले महीने एक रैली में अपने समर्थकों के साथ अपने रिश्ते पर बेहद हैरान करने वाला बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि मैं चाहे कितनी भी मूर्खतापूर्ण बात कह दूं, आप सब फिर भी हंसेंगे और तालियां बजाएंगे।
देखिए, अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं। अब इससे पहले ट्रंप की इस प्रकार की रैलियों में ऐसी बयानबाजी रिपब्लिकन के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि इस बात का दूसरा पहलू यह भी है कि रिपब्लिकन को ट्रंप से ही आस है कि वे कैसे उनकी नैया को पार लगाएंगे?
लगातार ट्रंप की ऐसी बयानबाजी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन ‘MAGA’ समर्थक कब जागेंगे? क्या वे कभी यह समझ पाएंगे कि जिस भीड़ में वे शामिल हो रहे हैं, उसे खुद उनका नेता ही ‘कचरा’ मान रहा है?-1793503190757.webp)
अच्छा, अब इन रैलियों के पीछे की सच्चाई को एक कहानी के माध्यम से जानते हैं। बीते कुछ समय पहले दक्षिण कैरोलिना की एक रैली में फॉक्स न्यूज के रिपोर्टर ने जब एक समर्थक से पूछा कि वह वहां क्यों आया है, तो उस व्यक्ति ने जो जवाब दिया, उसने सबको चौंका दिया।
समर्थक ने 1978 के उस खौफनाक ‘गुयाना नरसंहार’ का जिक्र किया, जहां एक धर्मगुरु के चक्कर में 900 से ज्यादा लोगों ने सामूहिक आत्महत्या कर ली थी। उस शख्स ने कहा कि यह किसी कल्ट को करीब से देखने जैसा है।
देखने वाली और बड़ी अब यह है कि समर्थक के इस बयान ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि क्या ट्रंप का राजनीतिक आंदोलन अब कोई राजनीतिक गठबंधन रह गया है या यह एक ऐसा समूह बन चुका है, जिसके सदस्य हिंसा की बात पर भी तालियां बजाने से पीछे नहीं हटेंगे?-1793503217069.webp)
अब इस पूरे मामले का एक अलग पहलू यह भी है कि ट्रंप और उनके समर्थकों का रिश्ता किसी नीति, वैचारिक मेल या समझदारी पर आधारित नहीं है। यह रिश्ता पहचान, नाराजगी और बदले की भावना पर टिका है। समर्थकों का मानना है कि चाहे ट्रंप पर भ्रष्टाचार के कितने भी आरोप लगें, वही उनके लिए लड़ रहे हैं।
इसके साथ ही परिवारों में एक पीढ़ी का अंतर भी साफ दिखने लगा है। माता-पिता जहां ट्रंप के पक्के भक्त हैं, वहीं उनके युवा बच्चे ट्रंप की बयानबाजी का विरोध करते हैं। लेकिन ट्रंप इन पारिवारिक कलह को भी अपने भाषणों में चुटकुलों की तरह इस्तेमाल करते हैं। अब यही कारण है कि आज के समय में MAGA सिर्फ एक राजनीतिक पसंद नहीं, बल्कि कई लोगों के लिए एक पहचान बन चुका है, जो परिवार के झगड़ों और थैंक्सगिविंग डिनर की लड़ाइयों से भी ऊपर है।-1793503236654.webp)
कुल मिलाकर लिबरल पॉडकास्टर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए ऐसे ट्रंप समर्थकों का इंटरव्यू लेना एक बड़ा बिजनेस बन गया है। वे सीधे-साधे सवाल पूछकर वीडियो बनाते हैं और दिखाते हैं कि कैसे कई MAGA समर्थक बिना किसी तार्किक समझ के सिर्फ अंधीभक्ति कर रहे हैं।
अब इसका शिकार हाल ही में ओहियो के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी भी हुए, जब एक शख्स ने उनके विज्ञापन में एक पेडफाइल के होने पर सवाल उठाए और रामास्वामी को वहां से बिना जवाब दिए हटना पड़ा। यह साफ दिखाता है कि विरोधी दल अब इन वायरल पलों का इस्तेमाल रिपब्लिकन नेताओं को घेरने के लिए हथियार की तरह कर रहे हैं।
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