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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों के बीच अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.
हालांकि इस्तीफ़े की ख़बर शुक्रवार से ही मीडिया में चल रही थी लेकिन ट्रस्ट की ओर से शनिवार को एक पत्र जारी कर इस्तीफ़े की जानकारी दी गई.
ट्रस्ट की ओर से जारी बयान के अनुसार, "श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (न्यास) के महामंत्री श्रीचंपतरायजी और न्यासी अनिल श्राजी से त्यागपत्र प्राप्त हुआ है. न्यास अपनी आगामी बैठक में इसका विचार करेगा."
लखनऊ से बीबीसी संवाददाता प्रेरणा के मुताबिक़, "ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि ने इस विज्ञप्ति की पुष्टि की है. उनका कहना है कि दोनों ही लोगों ने इस्तीफ़ा दे दिया है. लेकिन चंपत राय के करीबी लोगों का कहना है कि हम इसे सही नहीं मानते."
इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक चंपत राय की ओर से कोई बयान नहीं आया है.
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब एसआईटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है.
इसके अलावा मंदिर में चढ़ाए गए नक़द और क़ीमती सामान की चोरी और गबन के मामले में आठ लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.
एफ़आईआर में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें टिन्नू यादव भी हैं, जो चंपत राय के ड्राइवर रह चुके हैं.
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इस बीच यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच की जाएगी, "एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है और क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई की जाएगी."
हालांकि इस्तीफ़े को लेकर शनिवार को भी काफ़ी संशय बना रहा क्योंकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "ट्रस्ट से किसी ने इस्तीफ़ा नहीं दिया है. हम हर तीन महीने में बैठकर वित्तीय मामलों की समीक्षा करते थे. इस्तीफ़े की ख़बरें ग़लत हैं."
इसके बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि की ओर से इस्तीफ़ा देने के बारे में जारी बयान की पुष्टि की गई.
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अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के आए फ़ैसले के बाद, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार केंद्र सरकार ने फ़रवरी 2020 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था.
ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय इसकी रोज़मर्रा की कार्यप्रणाली के सबसे प्रमुख पदाधिकारियों में गिने जाते रहे हैं.
मंदिर निर्माण परियोजना की निगरानी, दान और चढ़ावे से जुड़े प्रबंधन, ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक संवाद, बैठकों के समन्वय और विभिन्न एजेंसियों के साथ तालमेल की ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से उन्हीं के पास थी.
यही वजह है कि राम मंदिर से जुड़ी किसी भी बड़ी घोषणा, विवाद या प्रशासनिक फ़ैसले के दौरान ट्रस्ट का सबसे प्रमुख सार्वजनिक चेहरा अक्सर चंपत राय ही होते थे.
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अयोध्या से जुड़ी फ़ैज़ाबाद संसदीय क्षेत्र से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस बड़े घोटाले में एक हाई लेवल जांच कमेटी गठित करने की मांग की है.
उन्होंने कहा, "हमारे नेता अखिलेश यादव ने न्यायिक जांच की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट को खुद इस पर संज्ञान लेकर एक जांच कमेटी गठित करनी चाहिए."
कांग्रेस नेता और पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "हमने बहुत साफ़ तौर पर कहा है कि यह मंदिर और पूरा अयोध्या प्रोजेक्ट आरएसएस की निगरानी में शुरू हुआ था. मंदिर निर्माण को लेकर अदालत का फ़ैसला आने के बाद मंदिर और ट्रस्ट का गठन सीधे पीएमओ की देखरेख में हुआ. पीएमओ के पसंदीदा अधिकारी और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव रहे नृपेंद्र मिश्रा को इसका सदस्य बनाया गया. आरएसएस नेता चंपत राय ट्रस्ट के प्रमुख बने. अब और क्या बचता है?"
"यह लूट सबके सामने है. इसकी शुरुआत मंदिर के भीतर से ही हुई. महिपाल सिंह ने सबसे पहले चंपत राय को चोरी की जानकारी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई और महिपाल सिंह को ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. ज़रा सोचिए, पैसों का यह नेटवर्क कहां-कहां तक जुड़ा हुआ है और किन शहरों तक इसकी पहुंच है."
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने चंपत राय के इस्तीफ़े की ख़बरों पर कहा, "इस इस्तीफ़े से समस्या का समाधान नहीं होने वाला है. अगर सैकड़ों या हज़ारों करोड़ रुपये की लूट हुई है, अगर आस्था के साथ इतना बड़ा विश्वासघात हुआ है और इतना बड़ा आर्थिक घोटाला हुआ है, तो सिर्फ़ चंपत राय का इस्तीफ़ा लेकर पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश काम नहीं करेगी. क्या यह सब सिर्फ़ चंपत राय की वजह से हुआ?"
"वह ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि वह वहां प्रशासक थे, लेकिन अगर वर्षों से इतने बड़े स्तर पर गबन, घोटाले, चढ़ावे की चोरी और दान की हेराफेरी कथित तौर पर होती रही है, तो इसमें सिर्फ़ चंपत राय ही शामिल नहीं हो सकते. इतनी बड़ी रकम वह अकेले नहीं ले सकते थे."
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले से आने वाले चंपत राय के पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हुए थे.
पिता से प्रभावित होकर चंपत राय ने भी कम उम्र में संघ की शाखाओं में जाना शुरू किया.
बिजनौर के आरएसएम डिग्री कॉलेज में चंपत राय रसायन शास्त्र पढ़ाते थे. लेकिन 1980 के दशक में उन्होंने अध्यापन छोड़कर संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में काम करने का फ़ैसला किया.
विश्व हिंदू परिषद के सदस्य शरद शर्मा ने बताया, "प्रचारक जीवन में व्यक्ति सीधे संगठन के काम से जुड़ जाता है. चंपत राय जी ने भी आगरा, देहरादून और हरिद्वार समेत कई जगहों पर संगठन के विस्तार का काम किया. वे विभाग प्रचारक रहे और बाद में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में भेजा गया, जहां उन्होंने सह क्षेत्रीय संगठन मंत्री के तौर पर काम संभाला."
यहीं से उनकी भूमिका राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ने लगी.
चंपत राय चार भाइयों में से एक हैं. डेढ़ साल पहले उनके एक भाई की मृत्यु हो गई.
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अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला पिछले कुछ दिनों से चर्चा में है. बीती सात जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक्स पर राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े करोड़ों रुपये ग़ायब होने का आरोप लगाया था.
इस मामले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर में चंदा विवाद की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था.
एसआईटी में आईएएस विजय विश्वास पंत, आईपीएस किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल थे.
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाने के बाद गुरुवार देर शाम आठ लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई थी.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राम मंदिर के दानपात्रों से नक़दी और क़ीमती सामान की कथित चोरी के मामले में आठ लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है.
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1. रामाशंकर यादव (टिन्नू)
ज़िम्मेदारी: दानपात्रों की निगरानी और उन्हें बेसमेंट तक पहुँचाना.
आरोप: दानपात्रों से करोड़ों रुपये का गबन और अयोध्या के आसपास संपत्तियां ख़रीदना.
2. लवकुश मिश्रा
ज़िम्मेदारी: चढ़ावे और नक़दी की गिनती.
आरोप: चढ़ावे की चोरी कर करोड़ों की संपत्ति बनाना. घर से 12 लाख रुपये बरामद.
3. अनुकल्प मिश्रा
ज़िम्मेदारी: काउंटिंग रूम में नक़दी गिनना.
आरोप: काउंटिंग रूम से पैसे चुराकर बाथरूम में छिपाना और लाखों की संपत्ति बनाना.
4. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
ज़िम्मेदारी: कैश काउंटिंग स्टाफ़ के प्रभारी.
आरोप: निगरानी में लापरवाही और चोरी में संलिप्तता.
5. करुणेश पांडे
ज़िम्मेदारी: दान राशि को काउंटिंग रूम तक लाना और गिनना.
आरोप: चढ़ावे की रक़म चोरी कर अयोध्या के आसपास संपत्तियां ख़रीदना.
6. मनीष यादव
ज़िम्मेदारी: दानपात्रों से मिली नक़दी की गिनती.
आरोप: चढ़ावे की चोरी. घर से 36 लाख रुपये बरामद.
7. अविनाश शुक्ला
ज़िम्मेदारी: दान राशि को काउटिंग रूम तक लाना और गिनना.
आरोप: चढ़ावे की रक़म चोरी कर संपत्तियां ख़रीदना.
8. रमाशंकर मिश्रा
ज़िम्मेदारी: दानपात्रों को काउंटिंग रूम तक पहुँचाना और निगरानी करना.
आरोप: अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर चढ़ावे की रक़म का गबन.
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