अशोक गहलोत ने बताया- पेंग्विन क्यों नहीं छाप रहा सोनिया गांधी की आत्मकथा? PM मोदी और RSS पर साधा निशाना – India.com

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और सीनियर नेता सोनिया गांधी की ऑटोबायोग्राफी ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ प्रकाशन से पहले ही विवादों और चर्चाओं में आ गई है. इस किताब का प्रकाशक पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया था, जिसने किताब की लेखिका सोनिया गांधी को पुस्तक के कुछ हिस्सों में एडिट और कुछ खास हिस्से को डिलीट की सलाह दी थी. सोनिया गांधी ने जब इससे साफ इन्कार कर दिया तो उसने इस किताब के प्रकाशन से ही अपने हाथ खींच लिए हैं. इस मामले पर राजनीति तेज हो गई है. कांग्रेस नेता प्रकाशक पर सरकार का दवाब बता रहे हैं.

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और सीनियर कांग्रेसी नेता अशोक गहलोत ने कहा कि इस किताब में सोनिया गांधी ने पीएम मोदी, आरएसस और पीएम मोदी के कार्यकाल में चीन द्वारा भारत की जमीन पर कब्जे की बातों पर लिखा है. प्रकाशक पर किताब के उन्हीं हिस्सों को हटाने का दवाब बनाया गया. कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि क्या यह प्रकाशक तय करेगा कि श्रीमती गांधी जैसी वरिष्ठ हस्ती क्या लिखेंगी और क्या नहीं?
Penguin Random House India official statement. pic.twitter.com/2g8y3F1p7m
— Penguin India (@PenguinIndia) August 28, 2026

बता दें, जब से यह खबर आई है कि पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने सोनिया गांधी की यह आत्मकथा प्रकाशित करने से मना कर दिया है, तब से ही मीडिया में काफी चर्चाएं शुरू हो गई हैं. अब इस मामले पर उसने अपना पक्ष रखा है. पेंग्विन ने बताया कि वह सोनिया गांधी की आत्मकथा को प्रकाशित करने के लेकर बहुत उत्सुक था लेकिन लेखिका द्वारा लिखे गए तथ्यों की जांच करना उनकी जिम्मेदारी और अधिकार है.
पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने अपने X हैंडल पर यह सफाई दी है. पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया भारत में ‘बिलॉन्गिंग’ का प्रकाशक नहीं है. ऐसा कोई भी सुझाव कि पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने ‘बिलॉन्गिंग’ को प्रकाशित न करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि लेखक ने संपादकीय बदलावों को अस्वीकार कर दिया, यह परिस्थितियों को सही ढंग से नहीं दर्शाता है.

एक प्रकाशक के रूप में, तथ्यों की जांच करना (फैक्ट-चेक) और लेखकों को ऐसी सलाह देना जो उनकी किताबों के सर्वोत्तम हित में हों, यह हमारा विशेषाधिकार और जिम्मेदारी दोनों है. यह प्रकाशन प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा है. संबंधित चर्चाओं के दौरान, पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया का रुख यह था कि हम किताब को प्रकाशित करने के लिए इच्छुक और तत्पर रहें. हम लेखक के साथ हुई गोपनीय चर्चाओं पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.
इस बीच कांग्रेस के कई नेता इसे सरकारी दबाव और अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रहार बता रहे हैं. अशोक गहलोत ने कहा, ‘पेंग्विन पर पीएम मोदी, RSS और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कब्ज़े से संबंधित हिस्सों को हटाने का दबाव था.’ उन्होंने कहा कि जब सोनिया जी ने इससे मना कर दिया तो कंपनी ने भारत में इसके प्रकाशन से मना कर दिया. यह अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है.
हमारी नेता आदरणीय श्रीमती सोनिया गांधी जी की आत्मकथा के प्रकाशन से प्रकाशक का मना करना अत्यंत चिंता का विषय है।
क्या श्रीमती गांधी जैसा वरिष्ठ व्यक्ति क्या लिखेगा और क्या नहीं, यह प्रकाशक तय करेगा? सवाल यह भी है कि प्रकाशक स्वयं यह कह रहा है या उस पर किसी का दबाव है?
इससे पहले… pic.twitter.com/82VZlbB6OH
— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) August 28, 2026

मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने भी इस पर चिंता जताई है. उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘यह प्रकाशक यह तय करेगा कि श्रीमती गांधी जैसी हस्ति क्या लिखे और क्या नहीं? सवाल यह भी उठता है कि क्या यह प्रकाशक खुद कह रहा है या फिर उस पर किसी का दबाव है?’ इससे पहले भी कुछ महत्वपूर्ण किताबों के प्रकाशन को संदिग्ध परिस्थिति में रोका गया है. मैं इस तरह की प्रवृत्ति को अभिव्यक्ति की आजादी के लिए गंभीर खतरा समझता हूं. श्रीमती गांधी की आत्मकथा का प्रकाशन शीघ्र होना चाहिए.
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नमस्कार! मैं अरुण कुमार, फिलहाल India.com (Zee Media) में सीनियर सब एडिटर के रूप में स्पोर्ट्स डेस्क पर कार्यरत हूं. मैं पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं और … और पढ़ें
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