पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिका के नए चुने गए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई मौकों पर एक-दूसरे को अच्छा दोस्त बता चुके हैं। इसके बावजूद 20 जनवरी को ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह में मोदी नहीं दिखेंगे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भारत को रिप्रेजेंट करेंगे। इस पर
क्या डोनाल्ड ट्रम्प ने जिनपिंग समेत कई राष्ट्राध्यक्षों को इनवाइट किया, लेकिन पीएम मोदी को नहीं; इसके पीछे की वजहों और असर को जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: क्या ट्रम्प के शपथ ग्रहण में पीएम मोदी को इनवाइट नहीं किया गया? जवाबः 12 जनवरी को भारत के विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज जारी किया। उसमें दो पॉइंट्स लिखे गए…
इस बयान में कहीं भी PM मोदी को समारोह के लिए पर्सनल इनविटेशन मिलने का जिक्र नहीं है। जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कम से कम 6 देशों के मौजूदा राष्ट्राध्यक्षों को पर्सनल इनवाइट भेजा गया है। हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जिनपिंग निमंत्रण मिलने के बावजूद खुद नहीं जाएंगे, अपना प्रतिनिधि भेजेंगे।
डोनाल्ड ट्रम्प की प्रवक्ता कैरोली लेविट ने एक बयान में चीन की तरफ इशारा करते हुए कहा- ट्रम्प सभी देशों के नेताओं से खुलकर बातचीत करना चाहते हैं, फिर वो चाहे हमारे सहयोगी हों या हमारे विरोधी।
JNU के रिटायर्ड प्रोफेसर और विदेश मामलों के जानकार ए.के. पाशा के मुताबिक,
PM मोदी इस प्रोग्राम में शिरकत नहीं करेंगे, क्योंकि अमेरिका ने उनके नाम का न्योता नहीं भेजा है। ट्रम्प ने साफतौर पर बता दिया है कि PM मोदी उनके खास दोस्त नहीं हैं।
सवाल-2: क्या डोनाल्ड ट्रम्प पीएम मोदी से नाराज हैं, अगर हां तो क्यों? जवाबः चुनावी कैम्पेन में जुटे डोनाल्ड ट्रम्प ने 17 सितंबर 2024 को मिशिगन के फ्लिंट में एक कार्यक्रम में कहा,
मोदी अगले हफ्ते मुझसे मिलने आ रहे हैं और वह शानदार व्यक्ति हैं।
दरअसल, इस बयान के अगले ही हफ्ते पीएम मोदी 21 से 23 सितंबर तक होने वाली QUAD समिट में शामिल होने अमेरिका जाने वाले थे। ट्रम्प को उम्मीद थी कि मोदी उनसे मुलाकात करेंगे और इंडियन-अमेरिकन वोटर्स को रिपब्लिक पार्टी को सपोर्ट करने का मैसेज देंगे।
हालांकि पीएम मोदी ने ट्रम्प से मुलाकात नहीं की। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक मुलाकात न करने के पीछे पीएम मोदी के बिजी शेड्यूल का हवाला दिया गया।
सवाल-3: क्या पीएम मोदी के ट्रम्प से न मिलने के पीछे कोई और वजह भी थी? जवाबः हां। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर मोदी हैरिस से मिले बिना सिर्फ ट्रम्प से मिलते तो डेमोक्रेटिक पार्टी इस मुलाकात को पक्षपात मानती और ट्रम्प इसके जरिए भारतवंशी अमेरिकी वोटर्स को लामबंद करते। मोदी खुद को अमेरिका की घरेलू राजनीति में शामिल नहीं करना चाहते थे।
2019 में मोदी ने ट्रम्प के लिए एक रैली की थी, जिसमें उन्होंने नारा दिया- ‘अब की बार, ट्रम्प सरकार।’ इसके लिए मोदी की आलोचना भी हुई। उस वक्त ट्रम्प चुनाव हार गए और फिर भारत को बाइडेन और कमला हैरिस के साथ रिश्ते सुधारने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
2023 में उन्होंने बाइडेन की पत्नी जिल बाइडेन को 7.5 कैरेट का एक हीरा गिफ्ट किया। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने इसकी कीमत 20 हजार डॉलर यानी लगभग 17 लाख रुपए आंकी।
नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और विदेश मामलों के जानकार डॉ. प्रसेनजीत बिस्वास कहते हैं,
अमेरिका और भारत के रिश्तों में कई दरारें आ चुकी हैं। फिर वो QUAD समिट हो या BRICS की बैठक। डोनाल्ड ट्रम्प भारत को लेकर जो नाराजगी रखे हुए थे, वे अब बाहर आनी शुरू हो गई हैं।
सवाल-4: क्या भारत से बेरुखी के पीछे इलॉन मस्क भी हो सकते हैं? जवाबः प्रसेनजीत बिस्वास कहते हैं, ‘PM नरेंद्र मोदी को शपथ समारोह में न्योता न मिलने की एक वजह मस्क की नाराजगी भी मानी जा रही है क्योंकि मस्क भारत में टेस्ला लॉन्च नहीं कर पा रहे हैं। मस्क और ट्रम्प की दोस्ती किसी से छुपी नहीं है। यह भी कहा जा सकता है कि PM मोदी को इन्विटेशन न देने का सुझाव मस्क ने दिया हो।’
इलॉन मस्क की टेस्ला मोटर्स 2019 से ही भारतीय बाजार में एंट्री करने की जद्दोजहद कर रही है, लेकिन भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर लगने वाली हाई इम्पोर्ट ड्यूटी बड़ी मुश्किल बनी हुई है।
इंडियन टैक्स स्लैब के मुताबिक, 40 हजार डॉलर यानी लगभग 35 लाख रुपए तक की कीमत वाली गाड़ियों पर 60% इम्पोर्ट ड्यूटी या टैक्स लगता है। वहीं, गाड़ियों की कीमत 35 लाख रुपए से ज्यादा होने पर टैक्स 100% हो जाता है।
टेस्ला की सबसे सस्ती कार की कीमत 37 लाख रुपए है। ऐसे में टेस्ला का तर्क है कि 100% टैक्स लगने से उसकी कारें बहुत ज्यादा महंगी हो जाएंगी। इससे इंडियन मार्केट में कंपनी टिक नहीं पाएगी।
24 जुलाई 2021 को मस्क ने सोशल मीडिया ‘X’ पर लिखा था कि वह भारत में टेस्ला को लॉन्च करना चाहते हैं, लेकिन यहां इम्पोर्ट ड्यूटी दुनिया के किसी भी बड़े देश की तुलना में सबसे ज्यादा है।
अप्रैल 2024 में इलॉन मस्क का भारत दौरा तय था और उन्हें PM मोदी से मुलाकात भी करनी थी, लेकिन ऐन वक्त पर मस्क ने अपना दौरा रद्द कर दिया। इसके बाद वे अचानक चीन के बीजिंग पहुंच गए। टेस्ला ने भारतीय अधिकारियों के साथ जारी कम्युनिकेशन भी खत्म कर दिया और भारत में इन्वेस्टमेंट की योजनाओं को भी टाल दिया।
सवाल-5: क्या शपथ ग्रहण के जरिए अमेरिका कोई डिप्लोमैटिक मैसेज दे रहा है? जवाबः 23 अक्टूबर 2024 को रूस के कजान शहर में BRICS समिट का आयोजन हुआ। इसमें PM मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इसमें दोनों देशों ने सीमा संबंधी मामलों पर समझौता किया और सामान्य रिश्ते बहाल करने की बात कही।
ये पहली बार था जब PM मोदी ने एक ही साल में रूस के दो दौरे किए। इससे पहले वे जुलाई 2024 में रूस पहुंचे थे। इस पर अमेरिका ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि भारत को रूस और चीन से समझौते नहीं करना चाहिए।
ए के पाशा कहते हैं,
अमेरिका का भारत को न्योता न देकर चीन को न्योता देना एक डिप्लोमैटिक मैसेज भी हो सकता है। अमेरिका भारत से नाराजगी जताकर चीन के साथ रिश्ते मजबूत करना चाहता है। इससे भारत को यह मैसेज मिले कि अमेरिका अपने प्रतिद्वंद्वी देश से दोस्ती कर सकता है और स्ट्रैटजिक पार्टनर देश से बेरुखी भी।
सवाल-6: क्या ट्रम्प के सत्ता में आने से भारत को लेकर अमेरिका का स्टैंड बदलेगा? जवाबः डोनाल्ड ट्रम्प PM नरेंद्र मोदी को कई बार अपना दोस्त बता चुके हैं, लेकिन इसके साथ ही भारत की नीतियों पर हमला भी बोलते रहे हैं। इससे ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका का भारत के लिए स्टैंड बदल सकता है।
ट्रम्प की आर्थिक नीतियां ‘अमेरिका फर्स्ट’ पर फोकस्ड होंगी। ट्रम्प ने पहले कार्यकाल में चीन और भारत समेत कई देशों के इम्पोर्ट पर भारी टैरिफ हटाने को कहा था। दूसरे कार्यकाल में ट्रम्प अमेरिकी सामान पर ज्यादा टैक्स लगाने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। ट्रम्प अमेरिकी चीजों पर भारत का बहुत ज्यादा टैरिफ लगाना पसंद नहीं करते।
ट्रम्प चाहते हैं कि अमेरिका से इम्पोर्ट होने वाली चीजों पर 20% तक ही टैरिफ लगे। भारत और अमेरिका के बीच 200 अरब डॉलर का कारोबार होता है। अगर ट्रम्प ने टैरिफ की दरें ज्यादा बढ़ाईं तो भारत को काफी नुकसान हो सकता है।
BHU में यूनेस्को चेयर फॉर पीस के प्रोफेसर प्रियंकर उपाध्याय का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच रस्साकशी वाली स्थिति बनी हुई है। बीते चार सालों से भारत अमेरिका से कहता आ रहा है कि ‘डोंट टेक मी ग्रांटेड।’ यानी हम कोई फायदा उठाने वाली चीज नहीं है। अगर आपको हमसे फायदा चाहिए तो आपको हमें भी फायदा देना होगा। अब ट्रम्प ने भी यही पॉलिसी अपना ली है। दोनों देशों के बीच वेट एंड वॉच की स्थिति बनी हुई है।
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