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‘महिला आरक्षण विधेयक’ और ‘परिसीमन विधेयक’ को लेकर सियासत चरम पर है. इसी बीच तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के सांसद जी एम हरीश बालयोगी ने NDA सरकार के एजेंडे को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आने वाला दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा.
इंडिया टुडे/आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में हरीश बालयोगी ने कहा कि NDA संसद में 33 फीसदी महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए विधेयक पेश करेगी. ये कदम नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा. यह देश की लोकतांत्रिक संरचना को समावेशी बनाने का प्रयास है.
परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव लेकर आ रही है. उनका कहना था कि इसका उद्देश्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है, ताकि बदलती जनसंख्या संरचना के अनुसार प्रतिनिधित्व संतुलित रह सके.
उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व संतुलन को लेकर चल रही बहस पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सीटों में प्रस्तावित 50 फीसदी वृद्धि इस तरह से डिजाइन की गई है कि दक्षिण की राजनीतिक आवाज कमजोर न हो, जबकि उत्तर में बढ़ती जनसंख्या को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके.
उन्होंने यह भी कहा कि साल 2026 में प्रस्तावित परिसीमन लंबे समय से चली आ रही रोक को खत्म करेगा. साल 2001 के बाद पहली बार संसद के आकार में विस्तार होगा, जो भारतीय लोकतंत्र के विकास में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. उनके मुताबिक, TDP के सभी सांसद इस विधेयक के पक्ष में मतदान करेंगे.
बालयोगी ने इसे आंध्र प्रदेश की महिला सशक्तिकरण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया. विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो दल 2023 में महिला आरक्षण के समर्थन में थे, वे अब अपने रुख से पीछे हटते नजर आ रहे हैं. उन्होंने पूछा, ”क्या उस समय का समर्थन सिर्फ नाम के लिए था?”
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