आसनसोल के बर्नपुर में बुलडोजर एक्शन, SAIL की जमीन से हटाया गया TMC ऑफिस – AajTak

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पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है. कोलकाता और हावड़ा के बाद अब आसनसोल के बर्नपुर इलाके में भी बुलडोजर कार्रवाई देखने को मिली. बर्नपुर के त्रिवेणी मोड़ स्थित तृणमूल युवा कांग्रेस के अवैध कार्यालय को मंगलवार को केंद्र सरकार के अधीन आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के इस्को (IISCO) मैनेजमेंट ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया.
इस्को सेल की इंटीग्रेटेड स्टील प्रोडक्शन यूनिट है. इस्को का फुल फॉर्म इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी (IISCO) है. इस्को मैनेजमेंट का आरोप है कि यह पार्टी कार्यालय उनकी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था. अधिकारियों के मुताबिक जमीन खाली करने के लिए पहले नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया. इसके बाद भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई.
कार्यालय तोड़े जाने के बाद स्थानीय तृणमूल नेता अभिक गोस्वामी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया. उन्होंने कहा कि चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस विपक्ष की भूमिका निभा रही है और यह कार्यालय आम लोगों की समस्याओं के समाधान और जनसंपर्क का केंद्र था. उनका आरोप है कि बिना किसी अंतिम बातचीत के जबरन बुलडोजर चलाकर कार्यालय को तोड़ दिया गया.
अभिक गोस्वामी ने इस्को मैनेजमेंट पर निशाना साधते हुए कहा कि बर्नपुर में सेल की कई जमीनों पर अन्य लोगों द्वारा भी कब्जा कर व्यवसाय चलाया जा रहा है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ विपक्षी दल के कार्यालय पर की गई. उन्होंने मांग की कि प्रशासन सभी अवैध कब्जों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई करे. वहीं, इस्को मैनेजमेंट ने साफ कहा है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आने वाले दिनों में भी अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी रहेगा. 
बराकर में अवैध क्वार्टर और घर ध्वस्त
आसनसोल रेल मंडल के अंतर्गत बराकर रेलवे क्वार्टर इलाके में मंगलवार को रेलवे प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया. बराकर आरपीएफ ओल्ड बैरक और बलतोड़िया गणेश मैदान के पास रेलवे लाइन से सटे करीब एक दर्जन अवैध क्वार्टरों और घरों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया. अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई परिवार बेघर हो गए.
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह अभियान रेल कॉरिडोर के तहत प्रस्तावित फोर-लेन परियोजना के लिए जमीन खाली कराने के उद्देश्य से चलाया गया. प्रशासन का कहना है कि रेलवे की जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जे होने के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे. कार्रवाई के दौरान बराकर आरपीएफ के इंस्पेक्टर इंचार्ज हवा सिंह जाखड़, सीतारामपुर जीआरपी, इंजीनियरिंग विभाग की टीम और भारी संख्या में सुरक्षा बल मौके पर मौजूद रहे. प्रशासन की निगरानी में बुलडोजर से अवैध निर्माणों को हटाया गया.
रेल अधिकारियों ने बताया कि बराकर रेलवे पुल से कुल्टी रेलवे स्टेशन तक रेलवे की जमीन पर कई लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है. इसके अलावा बलतोड़िया इलाके में रेलवे और सेल के पानी के कथित दुरुपयोग से विभाग को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है. अधिकारियों का कहना है कि कब्जाधारियों को पहले ही नोटिस देकर जमीन खाली करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तय समय सीमा के भीतर कब्जा नहीं हटाया गया.
पिछले साल भी रेलवे प्रशासन ने इसी इलाके में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया था, लेकिन स्थानीय विरोध और आंदोलन के कारण कार्रवाई रोकनी पड़ी थी. इस बार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए दोबारा अभियान शुरू किया और कब्जे हटाए. वहीं, कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों में भारी नाराजगी देखने को मिली। बेघर हुए लोगों का आरोप है कि चुनाव से पहले नेताओं ने उन्हें भरोसा दिया था कि बिना पुनर्वास के किसी को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन कार्रवाई के समय कोई उनकी मदद के लिए सामने नहीं आया.
मौके पर पहुंचे कांग्रेस नेता रवि यादव ने राज्य सरकार पर गरीबों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में परिवारों को बेघर कर दिया गया है और छोटे बच्चों के साथ लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं. रेलवे प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि बाकी कब्जाधारी स्वेच्छा से जमीन खाली नहीं करते हैं, तो आने वाले दिनों में और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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