आ गया अल-नीनो, भारत को पहुंचाएगा कितना नुकसान? जानें कैसे हमारे देश में बिजली उत्पादन को घटा देगा ये खतरनाक म – India.Com

El Nino: उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में अब अल नीनो आधिकारिक रूप से आ चुका है. अमेरिकी संस्था ‘नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) ने ये घोषणा की है. साथ ही बताया कि हाल के महीनों में समुद्र की सतह का तापमान तेज से बढ़ा है.

अमेरिकी वैज्ञानिकों का कहना है कि ‘अल नीनो’ प्रशांत महासागर का वह प्राकृतिक मौसम पैटर्न है जो दुनिया भर में तापमान बढ़ाता है. यह सूखे का कारण बनता है. अल नीनो दुनिया में 2 से 7 साल में आता है और आमतौर पर 9 से 12 महीने तक इसका रहता है. अल नीनो की तीव्रता इस बात से मापी जाती है कि प्रशांत महासागर के एक अहम क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान औसत से कितना ऊपर जाता है.

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमडी का अनुमान है कि अल-नीनो इस साल मानसून को कमजोर कर देगा. 2026 में 50 साल के औसत की 90 फीसदी बारिश होने की उम्मीद है. इससे धान की फसल भी कमजोर होगी.
अल-नीनो के चलते इस साल जल विद्युत निर्माण यानी हाइड्रोपावर जेनेरेशन भी 10 फीसदी कम होने की आशंका है. आईआईटी रुड़की के प्रोफसर और एनटीपीसी के पूर्व जनरल मैनेजर एके सिंह के मुताबिक, मानसून कम होने से बारिश कम होगी और देश के जलाशयों में पानी कम होगा, जिससे टरबाइन को कम ताकत मिलेगी और जल विद्युत निर्माण घटेगा.

अल नीनो की वजह से एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों में ज्यादा तापमान बढ़ने और सूखे की आशंका है. इंडोनेशिया और फिलिपींस में सूखा, ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में ज्यादा तापमान और कम बारिश होगी. साथ ही जंगल की आग का खतरा है. पेरू और इक्वाडोर में बाढ़ आ सकती है. ब्राजील के अमेजन वर्षावन में भी पानी की कमी की आशंका है. पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों, जैसे केन्या, सोमालिया और तंजानिया में ज्यादा बारिश हो सकती है और दक्षिणी अफ्रीकी देशों में सूखे का डर.
कई अनुमान बताते हैं कि यह तथाकथित “सुपर” अल नीनो में बदल सकता है और अब तक दर्ज किए गए सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक हो सकता है. एक शक्तिशाली अलनीनो को औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के रूप में परिभाषित किया जाता है; और बहुत शक्तिशाली अलनीनो को 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के रूप में.
एनओएए के जून के पूर्वानुमान के अनुसार, एजेंसी ने कहा, नवंबर-जनवरी के दौरान बहुत शक्तिशाली अल नीनो की 63% संभावना है, जो 1950 से अब तक के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में सबसे बड़ी अल नीनो घटनाओं में से एक होगी.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, दशकों से हो रही ग्लोबल वार्मिंग के साथ मिलकर अल नीनो एक और रिकॉर्ड-तोड़ गर्म साल ला सकता है – जिसकी सबसे ज़्यादा संभावना 2027 में है.
मध्य और उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान अब औसत से 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो गया है. यह वह सीमा है जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वैज्ञानिक अल नीनो की घटना को परिभाषित करने के लिए करते हैं.
NOAA ने भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र के ऊपर हवाओं में भी बदलाव देखा है . यह इस बात का संकेत है कि वातावरण अब गर्म होते महासागर पर प्रतिक्रिया कर रहा है, न कि सिर्फ महासागर अपने आप गर्म हो रहा है.

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Vineet Sharan Srivastava एक भारतीय पत्रकार और डिजिटल न्यूज एक्सपर्ट हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 17 वर्षों का अनुभव है. वह असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं … और पढ़ें
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