बिलासपुर। कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों द्वारा दी गई कुर्बानी कयामत तक याद रखी जाएगी। उन्होंने इंसानियत, हक और इंसाफ की खातिर अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया, लेकिन जुल्म और जालिम शासक यजीद के आगे अपना सिर नहीं झुकाया। बीते बुधवार की रात मुहल्ला टांडा हुरमतनगर में मुहर्रम के ख़ास पर शहीदे कर्बला कान्फ्रेंस कमेटी की जानिब से एक विशाल जलसे का आयोजन किया गया। इस जलसे में गोंडा बहराइच से उलेमा सैय्यद शफात मियां और उन्नाव से उलेमा गुलाम नूर मुज्जसिम शामिल रहे। इन्होंने खिताब करते हुए कहा कि जुल्मी शासक यजीद ने इस्लाम के सिद्धांतों और मानवीय मूल्यों को ताक पर रख दिया था।
वह तलवार के दम पर इमाम हुसैन से अपनी हुकूमत की मान्यता चाहता था। लेकिन पैगंबर के नवासे इमाम हुसैन ने सच्चाई और इंसानियत की रक्षा के लिए युद्ध और शहादत का रास्ता चुना, पर अधर्म से समझौता नहीं किया।कहा कि कर्बला की जंग केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए सब्र, हौसले और स्वाभिमान का जीवंत संदेश है। भीषण गर्मी में तीन दिनों तक पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसाए जाने के बाद भी इमाम हुसैन और उनके परिजनों ने जिस धैर्य का परिचय दिया, उसकी मिसाल पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलती। उलेमाओं ने आज की युवा पीढ़ी को इमाम हुसैन के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को समाज से बुराइयों को खत्म करने और हमेशा सच्चाई की राह पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। इस दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष मुहम्मद हसन खां ने उलेमाओं पर फूलों की बारिश की और सभी का स्वागत किया। इस अवसर पर अमीर अहमद मेंबर, हुसैन बक्श, मुन्ने अली, जमील अहमद, जैद हसन खां, मुराद हसन खां, राशिद खां, सभासद कामिल खां, जाकिर अली और मुख्तियार सैफी समेत आदि लोग रहे।
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