बागपत। असली रॉयल्टी दस्तावेज में हेरफेर कर फर्जी रॉयलटी तैयार करने और फर्जी आईएसटीपी बनाकर करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले गैंग के फरार सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने दबिश डाली, लेकिन वे हत्थे नहीं चढ़े। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गैंग में कई सफेदपोश भी शामिल हो सकते हैं जिसकी जांच की जा रही है। दो दिन पहले एसटीएफ की मेरठ यूनिट ने बागपत में दबिश डालकर खनन की रॉयल्टी में हेरफेर कर फर्जी दस्तावेज और आईएसटीपी का इस्तेमाल कर सरकार को राजस्व की क्षति पहुंचाने वाले गैंग के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इनमें निवाड़ा गांव निवासी नईम, तालिब, फिरोज, मेरठ के जानी क्षेत्र के सिवालखास का रहने वाला आरिफ और लोक निर्माण विभाग का बाबू मनदीप शामिल था।
टीम ने आरोपियों से एक लैपटॉप, वैन्यू कार और 8 मोबाइल बरामद किए गए थे। इस मामले में एसटीएफ ने 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।मुकदमे की विवेचना बागपत कोतवाली पर तैनात दरोगा महेंद्र सिंह को सौंपी गई थी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस धोखाधड़ी में कई सफेदपोश नेताओं की भूमिका भी हो सकती है। जो लोग गिरफ्तार हुए है, उनके मोबाइल नंबरों की सीडीआर में कई सफेदपोशों की कॉल डिटेल और मैसेज मिले हैं। बताया कि यदि उनकी भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पुलिस ने नामजद आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए कई स्थानों पर दबिश डाली, लेकिन वे हत्थे नहीं चढ़ सके। कोतवाली प्रभारी बृजेश कुमार का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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