ईरान की जंग से बुरा हाल… अमेरिकी सैनिकों को भरपूर खाना तक नहीं मिल पा रहा? – AajTak

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ईरान-अमेरिका युद्ध ने पूरी दुनिया को परेशान कर दिया. इससे सिर्फ ईरान की कमर नहीं टूटी है, बल्कि अमेरिका भी पस्त है. इन दिनों सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हैं, जो अमेरिकी युद्धपोत पर तैनात सैनिकों की थाली की है. सैनिकों के खाने ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है और यह भी सोचने के लिए मजबूर किया है कि कुछ दिनों की लड़ाई से अमेरिका जैसे देश के सैनिकों का ये हाल हो गया. 
असल में इंटरनेट पर जो तस्वीरें वायरल हो रही हैं, वो अमेरिकी युद्धपोतों पर तैनात सैनिकों ने अपने परिवार वालों को भेजी थी. इनमें से किसी ने अपने रिश्तेदार के दर्द को सोशल मीडिया पर बयां किया और अमेरिका का यह स्याह पक्ष सबके सामने आ गया. इन भोजन की थालियों की तस्वीर से भी कहीं ज्यादा भयावह चीजें उन सैनिकों के साथ हो रही हैं, जैसा कि उनके परिवार वालों ने बताया.
सोशल मीडिया पर तैर रही ये तस्वीरें बस बानगी भर है. असल कहानी तो घर पर अपने बेटा-बेटी या पति और पत्नी का इंतजार करने वाले उन रिश्तेदारों ने बयां किया, जो टीवी पर जंग की खबरों को देख-सुनकर हताश हो रहे हैं. अमेरिका जिन सैनिकों के बल पर बड़े-बड़े सैन्य अभियानों को अंजाम दे रहा है, उनकी हालत अब पस्त हो चुकी है.   
यूएसए टुडे ने अमेरिकी युद्धपोतों पर तैनात सैनिकों के परिजन, अमेरिका के डाक-पार्सल विभाग से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से इस मुद्दे पर बातचीत की. इसके बाद पूरा मामला स्पष्ट हो गया. एक पूर्व अमेरिकी सैनिक डैन एफ. उस समय चिंतित हो गए जब उनकी बेटी ने उन्हें जहाज पर परोसे गए भोजन की एक तस्वीर भेजी. डैन की बेटी ईरान युद्ध में तैनात युद्धपोत USS त्रिपोली पर एक मरीन सैनिक है. लंच ट्रे में कटा हुआ मांस का एक छोटा सा टुकड़ा और एक मुड़ी हुई टॉर्टिला थी.
A scoop of meat and a tortilla.

This image was shared by a U.S. Marine deployed aboard the USS Tripoli and later posted by USA Today.

The second image shows a dinner served on the USS Abraham Lincoln, sent to family members by a service member on board.👇 pic.twitter.com/rE9pLXuRlj
इसी तरह USS अब्राहम लिंकन पर अप्रैल के मध्य में हुए रात्रिभोज की एक तस्वीर, जिसे एक सैन्यकर्मी ने अपने परिवार के साथ साझा किया था, वह भी वायरल हो रही है. इसमें भी इसी तरह के रुखे-सूखे भोजन थे. इस तस्वीर में मुट्ठी भर उबली हुई गाजर, एक सूखा मांस का टुकड़ा और प्रोसेस्ड मांस का एक टुकड़ा दिखाई दे रहा है.
डैन और अन्य सैन्य परिवार के सदस्य इस बात से चिंतित हैं कि मिडिल ईस्ट में तैनात उनके बच्चे भूखे मर रहे हैं. इस लिए परिवार वाले पार्सल बक्सों में ऐसी चीजें भर रहे हैं जिनसे उन्हें उम्मीद है कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक तैनाती के दौरान उन्हें मदद मिल सकेगी. 
महीने भर से रास्ते में अटके हुए हैं सैनिकों के पार्सल
अमेरिकी सैनिकों के परिवार वाले घर का बना फज, जॉली रैंचर्स, क्रॉसवर्ड पजल की किताबें, ताश के पत्ते, टूथपेस्ट, गर्ल स्काउट कुकीज और नए मोजे, स्नैक्स, खाने-पीने की और भी ढेर सारी सूखी चीजें पार्सल बॉक्स में भर-भर कर भेजी. करीब महीनें भर पहले अमेरिका से डाक के जरिए परिजन ने इन पार्सल बॉक्सेज को भेजा था, लेकिन ये अबतक युद्धपोतों पर तैनात उनके प्रियजनों को नहीं मिला है. क्योंकि, अप्रैल से मिडिल- ईस्ट के सैन्य क्षेत्रों में डाक वितरण अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया गया है. इस वजह से एक महीने पहले भेजे गए पैकेज रास्ते में अधर में लटके हुए हैं.
डैन एफ. की बेटी ने बताया कि यूएसएस त्रिपोली  बताया कि यहां ताजी सब्जियां और फल कहीं भी नहीं मिल रहे हैं. जब डैन एफ. की बेटी ने कहा कि जहाज पर स्वच्छता उत्पादों की कमी हो रही है, तो परिवार ने शैम्पू और कंडीशनर, डिओडोरेंट, टूथपेस्ट और टैम्पोन से भरा एक पैकेज भेजा, और हर खाली जगह को कैंडी और स्नैक्स से भर दिया. डैन की बेटी ने जब बताया कि उसे गले में खराश महसूस हो रही., तो उन्होंने दूसरे बॉक्स क विटामिन सी के पैकेटों से भर दिया.
अब अमेरिकी सैनिकों को भी नहीं मिल रहा खाना
ये बक्से लगभग एक महीने पहले भेजे गए थे, लेकिन अभी तक दोनों में से कोई भी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचा है.  63 साल के डैन ने कहा कि हमारे पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है. हमारे सैनिकों को भोजन की कमी नहीं होनी चाहिए और जहाज पर डाक न मिलने जैसी समस्या नहीं होनी चाहिए. क्योंकि एक चीज जो हमारे दुश्मनों से हमें बेहतर बनाती थी, वह यह थी कि हम अपने लोगों को भोजन उपलब्ध कराते थे.
Dinner on the USS Abraham Lincoln — USA TODAY

Families of service members in Middle East trying to send care packages

But deliveries ‘indefinitely suspended as of April’ pic.twitter.com/G6384oQDlo
टेक्सास की एक मां, जिसका बेटा नौसेना में है और वह भी त्रिपोली जहाज पर सवार है. उन्होंने बताया कि जहाज पर उसके बेटे के भूखे रहने की खबर सुनकर वह घबरा गई. उसके परिवार ने अब तक कम से कम 2,000 डॉलर राशन पैकेजों पर खर्च कर दिए हैं, लेकिन उनमें से कोई भी उसके बेटे तक नहीं पहुंचा है. मां ने अपने बेटे पर बदले की कार्रवाई के डर से अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया है.
जहाज पर तैनात सैनिकों तक नहीं पहुंच पा रहा खाना 
वेस्ट वर्जीनिया के शेफर्डस्टाउन में एक चर्च की पादरी करेन एर्स्किन-वैलेंटाइन ने बताया कि उन्हें अपने समुदाय के एक सदस्य से जहाज पर भोजन की खराब गुणवत्ता के बारे में सुनकर चिंता हुई, जिसका बेटा मध्य पूर्व में यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात है. अब्राहम लिंकन, यूएसएस गेराल्ड फोर्ड के साथ, इस क्षेत्र में भेजे गए दो विमानवाहक पोतों में से एक है. तीसरा, यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश, रास्ते में है .
 एर्स्किन-वेलेंटाइन ने कहा इन जहाजों पर खाना बेस्वाद है और पर्याप्त मात्रा में नहीं है और वे हर समय भूखे रहते हैं. यह देखकर दिल टूट जाता है. हमलोगों ने  मिलकर 18 बक्से पैक किए और सेलर को भेजे ताकि वह उन्हें अपने साथियों के साथ बांट सके. उसने 15 अप्रैल को चार और बक्से भेजे. उन्होंने बताया कि बक्से भेजना सस्ता नहीं था – केवल शिपिंग के लिए ही कम से कम 540 डॉलर का खर्च आया. एर्स्किन-वेलेंटाइन ने कहा  कि डाक सेवा की ट्रैकिंग के अनुसार, छह पैकेज 14 अप्रैल को टोक्यो पहुंच गए थे, लेकिन वे अभी तक अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचे हैं.
अमेरिकी सेना के प्रवक्ता मेजर ट्रैविस शॉ ने यूएसए टुडे को बताया कि चल रहे संघर्ष के कारण हवाई क्षेत्र बंद होने और अन्य रसद संबंधी समस्याओं की वजह से डाक सेवा और सैन्य डाक सेवा एजेंसी ने अप्रैल की शुरुआत से ही डाक वितरण निलंबित कर दिया है. उन्होंने कहा कि निलंबन लागू होने के समय तक जो डाक पहले से ही रास्ते में थी, उसे डाक सेवा या सैन्य सुविधाओं में सुरक्षित रखा गया है ताकि सेवा फिर से शुरू होने पर उसे वितरित किया जा सके.
इन युद्धपोतों के एक सेलर के हवाले से ये बताया गया कि उन्होंने 11 मार्च को एक संदेश में लिखा कि आपूर्ति वास्तव में बहुत कम होने वाली है और चालक दल को जहाज के अपने मिशन से लौटने तक किसी भी बंदरगाह पर जाने की उम्मीद नहीं है. उन्होंने लिखा कि मनोबल अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने वाला है.
महीनों से समुद्र में हैं अमेरिकी युद्धपोत
त्रिपोली जहाज जापान में अपने बंदरगाह से ईरान युद्ध में शामिल होने के लिए रवाना होने के बाद से एक महीने से अधिक समय से समुद्र में है. अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार, त्रिपोली और इसके साथ के दो युद्धपोतों पर सवार 3,500 नाविकों और मरीन सैनिकों को अब ईरानी बंदरगाहों से निकलने वाले जहाजों पर अमेरिकी नाकाबंदी को लागू करने का काम सौंपा गया है.
अन्य युद्धपोत इससे कहीं अधिक समय तक समुद्र में रहे हैं. 15 अप्रैल को, यूएसएस गेराल्ड फोर्ड ने शीत युद्ध के बाद से किसी भी विमानवाहक पोत की सबसे लंबी तैनाती का रिकॉर्ड तोड़ दिया. यह  295 दिन समुद्र में रहा.  रखरखाव कार्य के लिए यह विमानवाहक पोत 23 मार्च को क्रेते द्वीप पर स्थित नौसेना सहायता गतिविधि केंद्र सूडा बे में वापस आ गया. 
मिडिल ईस्ट तक डाक पहुंचने में लगते हैं 24 दिन
डाक सेवा के अनुसार, मिडिल ईस्ट तक पहुंचने में बिना किसी जल्दबाजी के भेजे जाने वाले पैकेजों को आमतौर पर 24 दिन तक का समय लगता है. सरकारी  कार्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2003 में इराक युद्ध में तैनात सैनिकों तक डाक पहुंचने में औसतन 11 से 14 दिन लगे थे.
स्मिथसोनियन नेशनल पोस्टल म्यूजियम की क्यूरेटर लिन हेडलबॉघ ने कहा कि युद्धों और अन्य अभियानों के दौरान तैनात सैन्य कर्मियों तक पैकेजों की डिलीवरी में देरी होना आम बात है. लेकिन, उन्होंने कहा कि सैन्य जिप कोड पर डाक डिलीवरी के पूरी तरह से निलंबन का ऐसा मामला पहले कभी नहीं देखा, जैसा कि अभी लागू है.
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