ईरान को क्यों नहीं मिलना चाहिए होर्मुज का कंट्रोल? एक्सपर्ट ने बताया सबसे बड़ा डर – AajTak

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अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी तनातनी दुनिया के लिए और भी मुश्किलें पैदा करती दिख रही है. इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अगर ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर प्रभावी नियंत्रण मिल गया, तो दुनिया को लंबे समय तक आर्थिक और रणनीतिक संकट का सामना करना पड़ सकता है.
जॉन बोल्टन ने कहा कि ईरान कई सालों से होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी देता रहा है, लेकिन दुनिया ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. अब जब ईरान ने वास्तव में इस जलमार्ग को बंद कर दिया है और ताकत इस्तेमाल करने की चेतावनी दी है, तब वैश्विक शक्तियों को इसकी गंभीरता समझ में आ रही है.
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अमेरिकी एक्सपर्ट बोल्टन ने कहा कि ईरान की मौजूदा रणनीति सिर्फ बातचीत के जरिए स्ट्रेट खोलने की नहीं है, बल्कि दुनिया को यह दिखाने की है कि इस रास्ते पर उसका नियंत्रण है और खाड़ी देशों के तेल को बाहर निकालने के लिए उससे सौदेबाजी करनी पड़ेगी.
ईरान अपनी शर्तों पर होर्मुज खोलेगा तो क्या होगा?
 
जॉन बोल्टन के मुताबिक अगर अमेरिका और पश्चिमी देश इस समय दबाव में आकर ईरान के साथ ऐसा समझौता कर लेते हैं जिसमें तेहरान अपनी शर्तों पर होर्मुज खोलता है, तो भविष्य में ईरान इस समुद्री रास्ते को “लाइट स्विच” की तरह इस्तेमाल करेगा. यानी जब चाहेगा रास्ता खोलेगा और जब चाहेगा बंद कर देगा.
जॉन बोल्टन ने कहा, “अगर आज दुनिया ताकत दिखाने के लिए तैयार नहीं है, तो भविष्य में कौन होगा? यह सिर्फ ईरान का मामला नहीं रह जाएगा, बल्कि इससे पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की व्यवस्था बदल सकती है.”
बोल्टन ने चेतावनी दी कि अगर यह मिसाल कायम हो गई, तो सिर्फ होर्मुज ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे अहम समुद्री रास्तों पर भी असर पड़ेगा. उन्होंने तुर्किये के डार्डानेल्स और बोस्फोरस स्ट्रेट और मलेशिया-इंडोनेशिया के बीच मौजूद मलक्का स्ट्रेट का उदाहरण दिया. 
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जलमार्गों से जहाजों को स्वतंत्र आवाजाही का अधिकार!
जॉन बोल्टन ने कहा कि सदियों से इन जलमार्गों को अंतरराष्ट्रीय रास्ता माना जाता रहा है, जहां सभी देशों के जहाजों को स्वतंत्र आवाजाही का अधिकार है. अगर यह सिद्धांत कमजोर पड़ता है, तो वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा की पूरी व्यवस्था खतरे में पड़ जाएगी.
बोल्टन ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका ने कुछ समय के लिए सैन्य सुरक्षा देकर जहाजों की आवाजाही बहाल करने की कोशिश की थी. इस दौरान दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनी Maersk का एक जहाज स्ट्रेट से बाहर निकला था. उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी युद्धपोतों पर ईरानी ड्रोन और तेज रफ्तार नौकाओं से हमला हुआ, लेकिन अमेरिकी नौसेना ने जवाबी कार्रवाई की.
हालांकि उन्होंने माना कि सैन्य समाधान आसान नहीं है, लेकिन ईरान को नियंत्रण सौंपना भविष्य में और बड़ा खतरा बन सकता है. बोल्टन ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं है. असली सवाल समुद्री रास्तों की आजादी का है. अगर 
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