'उम्मीद है युद्ध फिर न शुरू हो, लेकिन लगता है होगा': अमेरिका से बातचीत नाकाम होने पर ईरानियों की चिंता – BBC

इमेज स्रोत, Getty Images
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के बिना किसी समझौते के ख़त्म होने के बाद नाज़ुक युद्धविराम पर काफ़ी दबाव बढ़ गया है.
अमेरिकी सेना ने कहा है कि वह ईरान के बंदरगाहों से निकलने वाले जहाज़ों की नाकाबंदी शुरू करेगी, जबकि तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र के अपने पड़ोसी देशों के बंदरगाहों पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है.
ईरान के लोग सतर्कता से हालात पर नज़र रखे हुए हैं, उन्हें डर है कि फिर से संघर्ष शुरू हो सकता है.
तेहरान के पास स्थित शहर करज में रहने वाले 20 साल के एक युवक ने कहा, "मुझे सच में लगा था कि वे कोई समझौता कर लेंगे."
उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि युद्ध फिर से कल, अगले हफ्ते या जल्द ही कभी भी शुरू हो सकता है."
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
ईरान के अंदर, अधिकारियों ने छह हफ़्ते से ज़्यादा समय से इंटरनेट बंद कर रखा है, जिससे देश में लोगों से संपर्क करना मुश्किल हो गया है.
ईरानी अधिकारी अक्सर इसके लिए "देश को साइबर हमलों से बचाने" जैसी वजह गिनाते हैं, ताकि इंटरनेट की पहुंच सीमित करने को सही ठहराया जा सके.
समाप्त
बीबीसी न्यूज़ फ़ारसी ने कई ईरानियों से बात की है, जो सभी मौजूदा शासन का विरोध करते हैं. उनकी राय पूरे ईरानी समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करती है.
मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.
एपिसोड
समाप्त
तेहरान में रहने वाले 20 साल के एक युवक ने कहा, "मैं उम्मीद करता हूं कि युद्ध फिर से शुरू नहीं होगा, लेकिन मुझे लगता है कि यह होगा."
उन्होंने कहा कि वह ख़ुद को व्यस्त रखने की कोशिश कर रहे हैं ताकि "अपना मानसिक संतुलन न खो दें."
लेकिन 20 साल की एक युवती अब भी सकारात्मक रहने की कोशिश कर रही हैं.
वो कहती हैं, "अब हालात थोड़े शांत हैं, तो मैं ठीक महसूस कर रही हूं, लेकिन मुझे उम्मीद है कि जंग जल्द ख़त्म हो जाएगा."
"मुझे उम्मीद है कि इंटरनेट वापस आ जाएगा. मुझे उम्मीद है कि वे बातचीत करेंगे और किसी समझौते पर पहुंचेंगे, क्योंकि अगर युद्ध जारी रहा तो यह ईरान के लोगों के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है."
हालिया संघर्ष के दौरान बीबीसी से संपर्क करने वाले कई ईरानी इंटरनेट न होने को लेकर निराश हैं.
उनका कहना है कि इससे न केवल भरोसेमंद जानकारी तक उनकी पहुंच सीमित हुई है, बल्कि कई व्यवसायों को भी बड़ा नुक़सान हुआ है.
तेहरान में कंटेंट क्रिएटर के रूप में काम करने वाले एक शख़्स ने कहा, "कोई भी नहीं जीत रहा है."
"मेरी बचत मेरा ख़र्चा ज़्यादा से ज़्यादा दो महीने तक चला सकती है, लेकिन उसके बाद मेरे पास पैसे ख़त्म हो जाएंगे."
समाप्त
20 साल के एक अन्य युवक ने कहा, "जब अमेरिका और इसराइल हम पर बमबारी कर रहे थे, उन दिनों के मुक़ाबले अब मैं बेहतर महसूस कर रहा हूं, लेकिन मैं बहुत चिंतित हूं."
"भले ही वे कोई समझौता कर लें, इस कमज़ोर अर्थव्यवस्था के साथ ज़िंदगी बहुत मुश्किल होने वाली है. मुझे उम्मीद थी कि वे समझौते पर पहुंचेंगे, लेकिन अब बेचैनी का एहसास हो रहा है."
करज में रहने वाले 30 साल के एक शख़्स ने कहा कि उनका मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नवंबर में होने वाले मिड टर्म चुनावों के कारण समझौता करने के लिए तैयार नहीं होंगे.
उन्होंने कहा, "यह मेरी व्यक्तिगत राय है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि अमेरिका पीछे हटेगा."
"किसी भी तरह से पीछे हटना उन्हें चुनाव हारने पर मजबूर कर देगा."
एक अन्य शख़्स, जो जनवरी में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की हत्या से नाराज़ थे. उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक के साथ बातचीत करना बेकार है. उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक को "इस देश के बच्चों का हत्यारा" बताया.
उन्होंने आगे कहा, "मैं उन रातों को कभी नहीं भूलूंगा जब वे मेरी आंखों के सामने सड़कों पर गोली चला रहे थे."
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (एचआरएएनए) के मुताबिक़, ईरानी सुरक्षा बलों ने जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई की, जिसमें कम से कम 6,508 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई और 53,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
ईरान के फॉरेंसिक मेडिसिन ऑर्गेनाइज़ेशन के प्रमुख ने कहा कि अधिकारियों ने हाल के युद्ध में मारे गए 3,375 लोगों के शवों की पहचान कर ली है.
ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के नए दौर के लिए अभी कोई तारीख़ तय नहीं हुई है, और ईरान के लोग एक बेहद अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं.
(बीबीसी पर्शियन, बीबीसी न्यूज़ की फ़ारसी भाषा की सेवा है, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में 2.4 करोड़ लोग करते हैं. इनमें से ज़्यादातर लोग ईरान में रहते हैं. ईरानी अधिकारी इसे ब्लॉक करते हैं और नियमित रूप से इसमें रुकावट डालते रहते हैं.)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
© 2026 BBC. बाहरी साइटों की सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है. बाहरी साइटों का लिंक देने की हमारी नीति के बारे में पढ़ें.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News