एक ही घर में रह रहे डीन पति-पत्नी, फिर भी 2 बंगले अलॉट; अधीक्षक के पास भी दो घर – Dainik Bhaskar

भास्कर संवाददाता| विदिशा
शासकीय अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा महाविद्यालय में सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और मिस-मैनेजमेंट का एक बड़ा मामला सामने आया है।
कॉलेज में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पीजी इंटर्न्स के लिए आवास (क्वार्टर) का भारी संकट है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि जहां जूनियर स्टाफ एक-एक कमरे के लिए तरस रहा है, वहीं कॉलेज के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों को दो-दो सरकारी बंगले अलॉट हैं। यदि ये अतिरिक्त अलॉटमेंट रद्द कर दिए जाएं, तो बाहर किराए के मकानों में रह रहे दर्जनों डॉक्टरों को तुरंत राहत मिल सकती है।
प्रथम वर्ष के छात्रों की प्राथमिकता : जानकारी के मुताबिक प्रथम वर्ष से लेकर एम बीबीएस के छात्रों की सुरक्षा ज्यादा जरूरी है, इसलिए इन छात्रों को प्राथमिकता से क्वार्टर उपलब्ध करवाया जाता है। पीजी कर चुके छात्र पूरी तरह मेच्योर हो जाते हैं, इसलिए उन्हें अभी बाहर रहने के लिए कहा जाता है। सरकारी नियमों के अनुसार यदि पति-पत्नी दोनों एक ही मुख्यालय/संस्थान में कार्यरत हैं, तो वे केवल एक ही सरकारी आवास के हकदार होते हैं। इसके बावजूद डीन दंपती के नाम पर दो बंगले अलॉट होना सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी है। वहीं डेप्यूटेशन पर जाने वाले अधिकारी को एक निश्चित समय सीमा में अपना अलॉटमेंट सरेंडर करना होता है, जो यहां नहीं किया गया।
डीन डॉ. मनीष निगम का डबल अलॉटमेंट: डीन डॉ. मनीष निगम के पास इस समय दो क्वार्टर अलॉट हैं। पहला क्वार्टर उनकी पत्नी प्रोफेसर डॉ. ऋचा निगम के नाम पर अलॉट है और दूसरा खुद डीन के नाम पर। चूंकि दोनों पति-पत्नी हैं और एक ही क्वार्टर में साथ रह रहे हैं, इसलिए डीन के नाम वाला वीआईपी बंगला खाली पड़ा हुआ है। अधीक्षक डॉ. अविनाश लाघवे की भी दोहरी सुविधा: चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अविनाश लाघवे भी दोहरे अलॉटमेंट का लाभ ले रहे हैं। वह अपने प्रोफेसर वाले क्वार्टर में रह रहे हैं, जबकि अधीक्षक के नाते उन्हें मिला हुआ दूसरा क्वार्टर खाली पड़ा है। डेप्यूटेशन पर गए डॉक्टरों के नाम भी अलॉटमेंट: नियमों को ताक पर रखकर डॉ. प्रनयलाल और एक अन्य डॉक्टर के नाम पर भी क्वार्टर अलॉट रखे गए हैं, जबकि ये दोनों डॉक्टर इस समय कॉलेज में सेवाएं नहीं दे रहे हैं और डेप्यूटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर बाहर जा चुके हैं।
^डॉक्टरों के लिए कोई समस्या नहीं है। यदि आपके संज्ञान में ऐसा कुछ आया है तो बताएं। नर्सिंग स्टाफ और छात्रों के लिए जरूर समस्या है, जो हमारे लिए चिंता का विषय है। जगह के लिए हमने आवेदन कर दिया है, जो भी जमीन पसंद आएगी उसे चिन्हित कर अलॉटमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। – डॉ. मनीष निगम, डीन, मेडिकल कॉलेज
कॉलेज के आधे से ज्यादा डॉक्टरों ने विदिशा में सिर्फ रिकॉर्ड के लिए क्वार्टर अलॉट करवा रखे हैं। हकीकत यह है कि ये डॉक्टर विदिशा में रहने के बजाय रोजाना भोपाल से अप-डाउन करते हैं। इस वीआईपी अलॉटमेंट के कारण जरूरतमंद स्टाफ को जगह नहीं मिल पा रही है।
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