एचएमपीवी: चीन में फैले वायरस से भारत के लोगों को कितना डरने की ज़रूरत है, इससे कैसे बचें? – BBC News हिंदी

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कोविड महामारी का भयावह दौर शुरू होने के पांच साल बाद चीन में एक और नए वायरस के संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं. ये नया वायरस ख़ासकर 14 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित कर रहा है.
उत्तरी चीन में ह्यूमन मेटान्यूमो वायरस (एचएमपीवी) नाम के इस वायरस के संक्रमण के अधिक मामले सामने आ रहे हैं.
बीबीसी मॉनिटरिंग ने एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से जानकारी दी है कि इस वायरस के कारण व्यक्ति में सर्दी ज़ुक़ाम और कोविड-19 जैसे लक्षण नज़र आते हैं और ये तेज़ी से फैल रहा है.
चीन के पड़ोसी देश स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं. वहीं भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक का कहना है कि अभी चिंता की बात नहीं है.ट
वहीं, भारत के परिवार कल्याण मंत्रालय ने डीजीएचएस की अध्यक्षता में शनिवार को संयुक्त निगरानी समूह की बैठक भी बुलाई. इस दौरान विस्तृत चर्चा के बाद कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी.
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मसलन चीन में फ्लू के मौसम को देखते हुए स्थिति असामान्य नहीं है. एचएमपीवी इस मौसम में होने वाला सामान्य रोगजनक है. सरकार स्थिति पर कड़ी नज़र रख रही है. साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी चीन की स्थिति के बारे में समय पर जानकारी साझा करने का अनुरोध किया गया है.
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बीते दिनों सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो शेयर किए गए जिनमें चीन के अस्पताल बड़ी संख्या में मरीज़ों से जूझते देखे गए. इन मरीज़ों में फ्लू जैसे लक्षण देखने को मिले थे.
इसके बाद चिंता जताई जाने लगी कि चीन में एक बार फिर नया वायरस लोगों के लिए चुनौती पेश कर रहा है.
पांच साल पहले दुनिया के सौ से अधिक मुल्कों में तबाही मचाने वाले कोविड वायरस की उत्पत्ति, चीन के वुहान के एक बाज़ार से मानी जाती है.
चीन की सरकारी न्यूज़ वेबसाइट ग्लोबल टाइम्स के अनुसार उत्तरी चीन के इलाक़ों के अलावा बीजिंग, दक्षिण पश्चिमी शहर चोंगकिंग, दक्षिणी चीन के गुआंगदोंग प्रांत में एचएमपीवी के मामले सामने आए हैं.
27 दिसंबर 2024 को समाचार एजेंसी रॉयटर्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ चीन की स्वास्थ्य एजेंसियों ने कहा कि सर्दियों में सांस की बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए वो पायलट सर्विलांस सिस्टम शुरू कर रहे हैं.
इस सर्विलांस सिस्टम के बारे में चीन के नेशनल डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन के प्रमुख ली जेंगलॉन्ग ने कहा था कि इसके ज़रिए अज्ञात कारणों से होने वाले निमोनिया के मामलों की निगरानी की जाएगी.
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में चीनी सरकार के हवाले से जारी एक बयान के आधार पर कहा कि चीन में दिसंबर महीने के तीसरे सप्ताह में सांस की बीमारी से परेशान लोगों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
इस रिपोर्ट के अनुसार दर्ज किए मामलों में राइनोवायरस और ह्यूमन मेटान्यूमो वाइरस (एचएमपीवी) के संक्रमण के मामले अधिक हैं. संक्रमण के अधिक मामले उत्तर के प्रांतों में दर्ज किए गए हैं और संक्रमितों में 14 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या अधिक है.
रिपोर्ट के अनुसार ह्यूमन मेटान्यूमो वायरस के स्रोत के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.
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इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीते दिनों एक बयान जारी कर चीन में इनफ्लूएंज़ा ए और सांस की बीमारी करने वाले अन्य वायरस को लेकर चिंता जताई थी.
इंडोनेशिया की न्यूज़ एजेंसी अंतारा ने ख़बर दी कि सोशल मीडिया पर चीन के वीडियो के सामने आने के बाद इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रवक्ता विद्यावती ने लोगों से इसे लेकर सजग रहने, सतर्कता बरतने और मास्क पहनने, साबुन से हाथ धोने जैसे एहतियाती कदम उठाने को कहा है.
उन्होंने कहा, "इंडोनेशिया, चीन में एचएमपीवी के संक्रमण को लेकर नज़र रख रहा है और देश के भीतर आने वाले एंट्री प्वॉइंट्स पर निगरानी कर रहा है. इसमें विदेश से आने वाले जिन यात्रियों में फ्लू जैसे लक्षण दिखें उन्हें क्वारंटीन करने जैसे कदम शामिल हैं."
हांग कांग फ्री प्रेस ने बीते दिनों एक रिपोर्ट में कहा कि हांग कांग में एचएमपीवी संक्रमण के मामले सामने आए हैं, लेकिन कम हैं.
एक एपिडेमियोलॉजिस्ट के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की तरह यहां इस वायरस के संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी नहीं दर्ज की गई है.
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शुक्रवार को चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्य सवालों के बीच ये सवाल भी उठाया गया था.
इसके जवाब में माओ निंग ने कहा कि उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों के मौसम में सांस की नली में संक्रमण के मामले अधिक सामने आते हैं.
उन्होंने कहा, "हाल ही में चीन के नेशनल डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सर्दियों के समय में चीन में सांस की बीमारी के रोकथाम और नियंत्रण के बारे में जानकारी दी थी."
"पिछले साल की तुलना में इस साल ये बीमारियां कम गंभीर और कम पैमाने पर फैली हुई दिखाई देती हैं. मैं आपको आश्वस्त कर सकती हूं चीन की यात्रा सुरक्षित है."
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चीन में एचएमपीवी संक्रमण के मामलों में तेज़ी के बाद भारत में इसे लेकर चिंता जताई जा रही है. हालांकि भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉक्टर अतुल गोयल का कहना है कि चिंता की कोई बात नहीं है.
अतुल गोयल ने शुक्रवार को जानकारी दी कि इस वायरस के संक्रमण के अधिक मामले अब तक भारत में दर्ज नहीं किए गए हैं.
उन्होंने कहा, "ये एक आम वायरस है जो सांस की नली में संक्रमण करता है. इस कारण सर्दी ज़ुक़ाम जैसी बीमारी हो सकती है. साल भर से कम उम्र के बच्चों और बुज़ुर्गों में इसे संक्रमण से फ्लू जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं."
"लेकिन ये गंभीर बीमारी नहीं करता इसलिए चिंता की बात नहीं है. सर्दियों के दिनों में वैसे भी सर्दी ज़ुक़ाम जैसे मामले ज़्यादा देखने को मिलते हैं. हमारे अस्पताल स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं."
"हम लगातार डेटा पर भी नज़र बनाए हुए हैं. बीते साल दिसंबर में संक्रमण के आंकड़ों में किसी तरह की बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है."
भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इससे पहले एक भारतीय अख़बार से कहा था कि वो चीन में एचएमपीवी वायरस के मामलों पर नज़र बनाए हुए हैं.
मंत्रालय ने कहा कि हाल के दिनों में चीन में लोगों में सांस लेने में दिक्कत से संबंधित कई मामले दर्ज किए हैं जिनका नाता एचएमपीवी वायरस से है. सर्दियों में भारत में भी सांस लेने में परेशानी जैसे मामले आते हैं, लेकिन अब तक इस तरह के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी नहीं देखी गई है.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सांस संबंधी परेशानी और मौसमी सर्दी-खांसी जैसे मामलों पर नेशनल सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल नज़र बनाए हुए है और वो इस मामले में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ भी संपर्क में है.
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वहीं दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के बाल चिकित्सा विभाग के डॉक्टर सुरेश गुप्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि ये कोई नया वायरस नहीं है.
उन्होंने कहा, "बीस सालों से इंसान को इसके बारे में जानकारी है. सर्दियों के वक्त में इसके संक्रमण के मामले आते हैं. ये फ्लू वायरस जैसा है."
डॉक्टर सुरेश गुप्ता कहते हैं कि इसके लिए आम तौर पर सर्दी ज़ुक़ाम के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं दी जाती हैं और बीमार व्यक्ति को आराम करने की सलाह दी जाती है.
वो कहते हैं, "अधिकतर मामलों में इसके संक्रमण से अस्पताल में भर्ती करने की सलाह नहीं दी जाती."
इसी अस्पताल के चेस्ट मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉक्टर बॉबी भालोत्रा बताते हैं, "अभी तक हमने इस वायरस के संक्रमण के जो भी मामले देखे हैं, उनमें मामूली लक्षण ही दिखे हैं."
"हालांकि दमे के कारण पहले से परेशान मरीज़ों और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मनरी डिज़ीज़ (सीओपीडी, जिसमें मरीज़ को सांस लेने में परेशानी होती है) के मरीज़ों को इसके संक्रमण से विशेष परेशानी हो सकती है. उनमें सांस लेने में अधिक परेशानी हो सकती है, थकान और बुखार हो सकता है."
"अभी भारत में इस वायरस का जो स्ट्रेन है वो गंभीर संक्रमण नहीं करता. जिस तरह कोविड वायरस गंभीर रूप ले लेता था और उसके कारण रेस्पिरेटरी फेल्योर हो जाता था, वैसा इसके मामलों में अब तक नहीं दिखा. हो सकता है चीन में इसका जो स्ट्रेन हो वो कितना घातक है वो भी आने वाले दिनों में पता चलेगा."
साइंस डाइरेक्ट के अनुसार इस वायरस की उत्पत्ति आज से 200 से 400 साल पहले चिड़ियों से हुई थी. लेकिन तब से लेकर अब तक ये वायरस खुद को बार-बार बदलता रहा है और अब ये वायरस चिड़ियों को संक्रमित नहीं कर सकता.
अमेरिकी सरकार की सेंटर फ़ॉर डीज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन (सीडीसी) के अनुसार इंसानों मे इसकी खोज साल 2001 में हुई, यानी इस साल पता चला कि ये वायरस इंसानों को संक्रमित कर सकता है.
ये वायरस सभी उम्र के लोगों को संक्रमित कर सकता है. इस कारण मरीज़ को बुख़ार, खांसी, नाक बंद होना और सांस लेने में परेशानी होने जैसे दिक्कतें आती हैं.
हालांकि संक्रमण बढ़ा तो ये वायरस ब्रोन्काइटिस या निमोनिया तक के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है.
इस वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड अमूमन तीन से छह दिन का होता है, लेकिन बीमारी का वक्त कम या अधिक हो सकता है. ये इस पर निर्भर करता है कि संक्रमण कितना गंभीर है.
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खांसी और छींक से के दौरान निकलने वाले थूक के कणों से ये वायरस फैलता है और लोगों को संक्रमित करता है.
हाथ मिलाने, गले मिलने या एक दूसरे को छूने से भी ये फैल सकता है.
अगर खांसी और छींक के कारण किसी सतह पर थूक के कण गिरे हैं और उस सतह पर हाथ लगाने के बाद आप उस हाथ से अपने चेहरे, नाक, आंख या मुंह को छूते हैं तो भी ये वायरस को आपको संक्रमित कर सकता है.
भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉक्टर अतुल गोयल के अनुसार एमएमपीवी वायरस संक्रमित व्यक्ति या अगर किसी को सर्दी ज़ुक़ाम है तो उससे दूरी बनाएं.
खांसते-छींकते वक्त मुंह पर रुमाल या कपड़ा रखें. खांसने और छींकने के लिए अलग रूमाल या तौलिए का इस्तेमाल करें, जिसे कुछ घंटों के बाद साबुन से धो दें.
अगर आपको सर्दी ज़ुक़ाम है तो मास्क पहन कर रखें. घर पर रहें और आराम करें.
अमेरिकी सरकार की सीडीसी के अनुसार साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड के लिए हाथ धोएं.
अपने बर्तन, (कप, थाली या चम्मच) एक दूसरे के साथ साझा न करें.
इस वायरस के लिए अब तक न तो कोई ख़ास एंटी वायरल दवा बनाई गई है और न ही कोई वैक्सीन ही है.
डॉक्टरों का कहना है कि इसके लिए आम तौर पर सर्दी बुखार की दवाएं दी जाती हैं.
लेकिन जिन्हें पहले से ही सांस की कोई बीमारी है उनमें ये वायरस परेशानी का कारण बन सकता है. ऐसे में डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें.
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