भारतीय खाने और कृषि उत्पादों की खुशबू अब इटली के मिलान शहर में महकने वाली है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) 11 मई से 14 मई तक इटली में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘टूटोफूड’ में भारतीय निर्यातकों की भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। 27 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद यह पहला बड़ा अवसर है, जब भारतीय व्यापारियों को इटली समेत पूरे यूरोप में ड्यूटी-फ्री एंट्री का सीधा लाभ मिलेगा।
चार दिन तक चलने वाला यह व्यापार मेला दुनिया के प्रतिष्ठित आयोजनों में गिना जाता है। इसमें करीब 95,000 से अधिक पेशेवर खरीदार शामिल होंगे, जबकि 3,000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगी। उत्तर भारत से 60 से अधिक निर्यातक इस बार इसमें हिस्सा ले रहे हैं, जो विदेशी खरीदारों के साथ सीधे बैठकर व्यापारिक सौदे तय करेंगे। FIEO का उद्देश्य है कि निर्यातकों को सीधे खरीदारों से जोड़ा जाए, ताकि ऑर्डर मिलने की प्रक्रिया तेज और आसान हो सके।
रेडी-टू-ईट से लेकर चाय-कॉफी तक की धूम फियो के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक, इस प्रदर्शनी में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर खास फोकस रहेगा। भारत की ओर से रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक फूड, डेयरी प्रोडक्ट्स और कन्फेक्शनरी की अच्छी मांग रहने की उम्मीद है। इसके अलावा चावल, चाय, कॉफी, सिरका और होटल-रेस्तरां सेक्टर के लिए जरूरी अन्य उत्पाद भी प्रदर्शित किए जाएंगे। बदलती जीवनशैली के बीच तैयार भारतीय भोजन और पारंपरिक स्वाद विदेशी बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने को तैयार हैं।
25 से 40 करोड़ के ऑर्डर मिलने की उम्मीद इस मेले का मुख्य उद्देश्य नए स्टार्टअप्स और छोटे निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है। व्यापार के अनुमान पर विशेषज्ञों का कहना है कि यह खरीदारों की पसंद और उत्पादों की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा। अगर एक छोटा निर्यातक भी 1 से 2 करोड़ रुपये का ऑर्डर हासिल करता है, तो कुल मिलाकर 25 से 40 करोड़ रुपये तक के निर्यात सौदे होने की संभावना है। इससे देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विदेशी मुद्रा भंडार में भी इजाफा होगा।
FTA के बाद यूरोप के बाजार खुले हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने भारतीय उत्पादों के लिए यूरोप के दरवाजे खोल दिए हैं। इटली एक मजबूत और विकसित अर्थव्यवस्था है, जहां भारतीय कृषि उत्पादों की अच्छी मांग है। इस समझौते के बाद भारतीय सामान बिना अतिरिक्त आयात शुल्क के यूरोप के बाजारों तक पहुंच सकेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए मील का पत्थर साबित होगा और भविष्य में यूरोप के अन्य बड़े बाजारों तक पहुंच भी आसान बनाएगा।
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