पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से जाने के बाद भी बांग्लादेश में आए दिनों हिंस्सा होती रहती है। हिंस्सा रोकने में नाकाम पड़ोसी मुल्क भारत पर दोष मढ़ रहा है। हालांकि भारत ने बांग्लादेश को कड़ी लताड़ लगाते हुए इस तरह की बयानबाजी पर लगाम लगाने को कहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक वरिष्ठ बांग्लादेशी अधिकारी के उस दावे को “झूठा और निराधार” करार दिया कि बांग्लादेश में हुई हिंसक झड़पों में भारत संलिप्त है।
पिछले हफ्ते बांग्लादेश के चटगांव पहाड़ी क्षेत्र के खगराछारी ज़िले में हुई झड़पों के बाद, ‘गृह मंत्री’ जहांगीर आलम चौधरी ने आरोप लगाया कि भारत अशांति को बढ़ावा दे रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इन “झूठे और निराधार आरोपों” को सिरे से खारिज करता है।
उन्होंने कहा, “बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ अंतरिम सरकार नियमित रूप से अपना दोष किसी और पर मढ़ने की कोशिश करती रही है।” जायसवाल साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान चौधरी की टिप्पणी को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। पिछले हफ्ते एक लड़की के साथ कथित बलात्कार के बाद खगराछारी जिले में हिंसा भड़क उठी। पिछले रविवार को हुई झड़पों में तीन आदिवासी पुरुषों की हत्या कर दी गई।
बांग्लादेश में हिंदुओं सहित कई अल्पसंख्यक समुदाय पर हिंसा की घटनाएं पिछले साल शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से बढ़ी हैं। मानवाधिकार संगठन राइट्स एंड रिस्क्स एनालिसिस ग्रुप (RRAG) के अनुसार, अगस्त 2024 से फरवरी 2025 तक 1,254 हिंसक घटनाएं हुईं, जिनमें से कई में हिंदू समुदाय प्रभावित हुआ। संयुक्त राष्ट्र की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों का जिक्र है।
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