कितनी खतरनाक होती है सेप्टिक टैंक से निकलने वाली हाइड्रोजन सल्फाइड गैस? 4 मजदूरों की दर्दनाक मौत, सुरक्षा नियमों पर फिर उठे सवाल – India.Com

Surat Septic Tank Death: गुजरात के सूरत शहर में रविवार (7 जून) को एक दर्दनाक हादसे ने श्रमिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. एक ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 4 लोगों की जान चली गई. शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि टैंक के भीतर जमा जहरीली गैसों के संपर्क में आने से मजदूर बेहोश हो गए और उनकी मौत हो गई. घटना के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है.

ये हादसा सूरत के अश्विनी कुमार क्षेत्र में स्थित एक ज्वेलरी यूनिट में हुआ. जानकारी के अनुसार, यहां मौजूद एक स्पेशल टैंक की नियमित सफाई की जा रही थी. बताया जा रहा है कि ये टैंक ज्वेलरी साफ करने की प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को एकत्र करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. सफाई के लिए एक सुपरवाइजर और तीन मजदूर टैंक के अंदर उतरे थे.
पुलिस के मुताबिक, टैंक में प्रवेश करने के कुछ ही समय बाद चारों लोग अचानक बेहोश होकर गिर पड़े. आशंका है कि टैंक के अंदर ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैसों की ज्यादा मात्रा मौजूद थी. ऐसे बंद जगहों में आमतौर पर हाइड्रोजन सल्फाइड (Hydrogen Sulfide), मीथेन (Methane), कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य विषैली गैसें जमा हो सकती हैं. इनमें हाइड्रोजन सल्फाइड सबसे खतरनाक मानी जाती है, जो ज्यादा मात्रा में सांस के जरिए शरीर में पहुंचने पर कुछ ही मिनटों में व्यक्ति को बेहोश कर सकती है.

सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग और बचाव दल मौके पर पहुंचे. काफी मशक्कत के बाद चारों को टैंक से बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया. हालांकि, डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है. शुरुआती जांच में ये भी सामने आया है कि सफाई कार्य के दौरान मजदूरों के पास आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं थे. आमतौर पर ऐसे कार्यों में गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क, सेफ्टी हार्नेस और अन्य सुरक्षात्मक साधनों का इस्तेमाल अनिवार्य माना जाता है. अगर इन उपकरणों का इस्तेमाल किया गया होता, तो संभव है कि हादसे को रोका जा सकता था.
सेप्टिक टैंक, सीवर और अन्य बंद स्थानों में प्रवेश करने से पहले गैस के लेवल की जांच करना बेहद जरूरी होता है. कई बार अंदर मौजूद जहरीली गैसें दिखाई नहीं देतीं, लेकिन वे कुछ ही सेकंड में इंसान की जान ले सकती हैं. यही कारण है कि ऐसे कार्यों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा जाता है. पुलिस ने फिलहाल आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है. अधिकारी सीसीटीवी फुटेज, कार्यस्थल की परिस्थितियों और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करेंगे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वास्तविक वजह और साफ हो सकेगी.

ये हादसा एक बार फिर देश में श्रमिक सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल खड़े करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन और नियमित निगरानी ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है. फिलहाल जांच एजेंसियां ये पता लगाने में जुटी हैं कि इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है.
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हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक… तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी … और पढ़ें
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