कैफे से कूकर ब्लास्ट तक… टेरर-23 का वो आतंकी जो भारत से भागा, पाकिस्तान में बना दहशत का मास्टरमाइंड – AajTak

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भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को आगे बढ़ाते हुए UAPA की चौथी अनुसूची में 23 नए आतंकियों को शामिल किया है. इनमें कई ऐसे नाम हैं जो लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों, घुसपैठ, हथियारों की तस्करी, फंडिंग और आतंकी भर्ती में शामिल रहे हैं. लेकिन इन 23 नामों में सबसे ज्यादा ध्यान जिस चेहरे ने खींचा है, वह है मोहम्मद शाहिद फैसल, जिसे उस्ताद, मुहंदिस और ज़ाकिर जैसे नामों से भी जाना जाता है.
शाहिद फैसल की कहानी इसलिए अलग है क्योंकि वह मूल रूप से भारत का रहने वाला था. उसने बेंगलुरु के एक नामी कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. लेकिन बाद में वह पाकिस्तान पहुंच गया और वहां से भारत विरोधी आतंकी नेटवर्क का अहम हिस्सा बन गया. जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह अब सिर्फ एक आतंकी नहीं बल्कि कई आतंकी मॉड्यूल का हैंडलर बन चुका है.
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों की जांच में उसका नाम 2024 के रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट के ऑनलाइन हैंडलर के तौर पर सामने आया. इसके अलावा मंगलुरु कुकर ब्लास्ट, अल-हिंद ISIS मॉड्यूल और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई नेटवर्क में उसकी भूमिका की जांच हो चुकी है. एजेंसियों का दावा है कि वह पाकिस्तान में बैठकर सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन चैनलों के जरिए भारतीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और आतंकी संगठनों में भर्ती करने का काम करता रहा है.
भारत में टेरर मॉड्यूल तैयार करने की साजिश
शाहिद फैसल पर यह भी आरोप है कि वह फरहतुल्लाह गोरी के साथ मिलकर भारत में नए आतंकी मॉड्यूल तैयार करता रहा. फरहतुल्लाह गोरी वही आतंकी है जिसे 2002 के अक्षरधाम मंदिर हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, शाहिद फैसल ने भारत से भागने के बाद पाकिस्तान में अपना पूरा नेटवर्क तैयार किया और अब वह कई आतंकी संगठनों के लिए तकनीकी, वैचारिक और ऑपरेशनल मदद उपलब्ध कराता है.
आतंकियों की नई लिस्ट में कई नाम
सरकार की नई सूची सिर्फ शाहिद फैसल तक सीमित नहीं है. इसमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, जमात-उद-दावा और द रेजिस्टेंस फ्रंट से जुड़े कई बड़े चेहरे भी शामिल किए गए हैं. इनमें मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसद्दिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान, हाफिज अब्दुल शकूर, अब्दुल्ला जेहादी, फिरदौस अहमद भट, गुलाम फरीद, हारून राशिद गनई, बिलाल अहमद मीर, आबिद कय्यूम लोन, नज़ीर अहमद गुज्जर उर्फ मुनाज़िल, अब्दुल रऊफ, ओवैस फारूक, हाफिज खालिद वलीद, मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की, मौलाना सैफुल्लाह खालिद, मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा, मोहम्मद आसिफ, मुहम्मद सईद, क़ारी याकूब शेख, राणा इफ्तिखार और मोहम्मद यूसुफ अजहर जैसे नाम शामिल हैं.
इनमें कई आतंकी वर्षों से सीमा पार से घुसपैठ कराने, हथियारों की सप्लाई, ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स सप्लाई, आतंकी कैंप चलाने, फंडिंग जुटाने और भारत में बड़े हमलों की साजिश रचने के आरोपों का सामना कर रहे हैं. लश्कर के वरिष्ठ नेता अब्दुल रऊफ और सैफुल्लाह खालिद जैसे चेहरे संगठन के फंडिंग और प्रचार तंत्र के बड़े स्तंभ माने जाते हैं, जबकि मोहम्मद यूसुफ अजहर और मुफ्ती मोहम्मद असगर खान जैसे नाम जैश-ए-मोहम्मद के ऑपरेशनल नेटवर्क से जुड़े रहे हैं.
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टेरर लिस्ट में 17 पाकिस्तानी और 6 भारतीय नागरिक
गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन 23 घोषित आतंकियों में 17 पाकिस्तानी और 6 भारतीय नागरिक हैं, जो फिलहाल पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं. इन सभी को UAPA के तहत घोषित आतंकवादी बनाए जाने के बाद अब उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा और मजबूत हो गया है. उनकी संपत्तियों पर कार्रवाई, वित्तीय नेटवर्क पर रोक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी गतिविधियों को सीमित करने की दिशा में भी यह कदम अहम माना जा रहा है.
 
आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई पहले भी जारी रही है, लेकिन इस बार की सूची इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि इसमें सिर्फ पुराने आतंकी कमांडर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नई पीढ़ी को कट्टरपंथ की ओर धकेलने वाले चेहरे भी शामिल हैं. मोहम्मद शाहिद फैसल इसका सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है.
एक समय भारत में पढ़ाई करने वाला यह शख्स आज पाकिस्तान में बैठकर भारत विरोधी आतंकी नेटवर्क का अहम हिस्सा बन चुका है. अब सरकार ने उसे आधिकारिक तौर पर घोषित आतंकवादी की लिस्ट में शामिल कर साफ संदेश दिया है कि चाहे आतंक का चेहरा सीमा पार बैठा हो या डिजिटल दुनिया में सक्रिय, भारत उसकी पहचान कर उसे कानून के दायरे में लाने की कार्रवाई लगातार जारी रखेगा.
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