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कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोमवार को घने कोहरे के कारण कम विजिबिलिटी की वजह से कम से कम 22 उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ. अधिकारियों ने बताया कि छह उड़ानें जो कोलकाता हवाई अड्डे पर पहुंचने वाली थीं, उनमें देरी हुई, जबकि 16 उड़ानों के डिपार्चर में भी देरी हुई.
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के अनुसार, घने कोहरे की स्थिति को देखते हुए लो विजिबिलिटी प्रोसीजर (LVP) सोमवार तड़के 1:21 बजे से सुबह 8:45 बजे तक लागू की गई. जब दृश्यता 800 मीटर से कम हो जाती है, तो हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) LVP लागू करता है, जिसके बाद ‘फॉलो-मी’ वाहन विमानों को उनके स्टैंड तक सुरक्षित रूप से पहुंचाते हैं.
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक इसके अलावा, जब बादलों की ऊंचाई 200 फीट से नीचे आ जाती है, तब भी LVP सक्रिय कर दिया जाता है. इन प्रक्रियाओं में हवाई अड्डे के संचालक, ATC और पायलटों के बीच समन्वय शामिल होता है ताकि उड़ानों का सुरक्षित प्रबंधन किया जा सके और बाधाओं को कम किया जा सके.
ILS तकनीक की मदद से हुआ उड़ानों का संचालन
अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को अधिक उड़ानों में देरी होने से बचाने के लिए 33 आगमन और 44 प्रस्थान वाली उड़ानों का संचालन इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) के माध्यम से किया गया. 33 विमानों ने CAT-II या CAT-III ILS का उपयोग करके लैंडिंग की.
44 विमानों ने LVP के दौरान लो विजिबिलिटी टेक-ऑफ (LVTO) किया. CAT-II ILS प्रणाली तब उपयोग में लाई जाती है जब विजिबिलटी 300 मीटर या अधिक होती है, जबकि CAT-III ILS का इस्तेमाल 300 मीटर से कम दृश्यता की स्थिति में किया जाता है.
लगातार तीसरे दिन भी प्रभावित रही उड़ानें
कोलकाता हवाई अड्डे पर रविवार को भी कोहरे के कारण 13 उड़ानों में देरी हुई थी. इससे पहले, 23 जनवरी से 25 जनवरी तक तीन दिनों तक कोहरे के कारण विमान परिचालन प्रभावित रहा था.
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