क्या विभिन्न कंपनियां भारत में नियमों के साथ खिलवाड़ कर रही हैं? क्या भारत में बिकने वाले फूड प्रोडक्ट्स में विदेश से अलग स्तर पर चीनी या आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल हो रहा है? क्या भारत में फूड पैकेट्स पर जो चेतावनी लगाई जाती है, उसमें भी खेल किया जाता है? यह सारी बातें एक रिपोर्ट में सामने आई हैं। इसके मुताबिक फैंटा बनाने वाली कोका-कोला, भारत में नियमों का उल्लंघन करती है। विदेश में बिकने वाले बॉटल्स पर तो वॉर्निंग लेबल लगाए जाते हैं। लेकिन भारत में इसका ध्यान नहीं रखा जाता है।
जानकारी के मुताबिक पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत में बिकने वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों को ज्यादा चटपटा बनाया जाता है। भारत में अब सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर इस मामले की निगरानी कर रही है। स्वास्थ्य याचिकाकर्ता ने भारत में लोगों के बढ़ते मोटापे का हवाला दिया है। लैसेंट जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लोग, 2050 तक ओवरवेट हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रोडक्ट्स पर छपने वाली सूचना सही रहे तो फिर लोग यह जान सकेंगे कि जो वो खा रहे हैं, वह उन्हें कितना नुकसान पहुंचाने वाला है। इस आधार पर करीब 20 देशों ने सही ढंग से लेबल लगाने का रास्ता अपनाया है। इसके मुताबिक अगर शुगर ज्यादा है तो रेड और फैट कम होने पर ग्रीन लेबल लगा रहता है।
फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, उद्योग अधिकारियों के साथ मार्च की तनावपूर्ण बैठक के बाद झुक गया। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे वॉर्निंग लेबल भ्रमित करने वाले और अप्रभावी हैं। अधिकारियों ने यह भी अनुरोध किया कि नियम निर्माता हिस्से की मात्रा नियंत्रण को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दें। रॉयटर्स द्वारा पहली बार बैठक का विवरण रिपोर्ट किया गया है। वरिष्ठ कोका-कोला इंडिया अधिकारी मिली भट्टाचार्य ने 19 मार्च की बैठक में कहाकि यह बहुत ही सरल है। यह मान लेना कि जो ग्राहक पहले से ही सामग्री सूची नहीं पढ़ता, वह लेबल पर किसी प्रतीक या आइकॉन को देखकर इतना जागरूक हो जाएगा कि उनका आहार काफी सुधार जाएगा।
भारत के 100 अरब डॉलर से अधिक के पैकेज्ड फूड और बेवरेज मार्केट में बनाये जाने वाले लगभग 80% उत्पादों को उद्योग के अनुमान के अनुसार उच्च फैट, शुगर और नमक वाला माना जा सकता है। इसका मतलब है कि अगर उद्योग कलर-कोडेड चेतावनी लेबल अपनाता, तो पैकेजिंग लाल रंग से भर जाती। यह बात इंड फूड एंड बेवरेज एसोसिएशन के दीपक जोली ने मार्च की नियामक मीटिंग में कही। पेप्सिको जैसे कंपनियों की प्रतिनिधि आईएफबीए ने कहाकि वह नियामकों की तरफ से और अधिक क्लैरिटी चाहते हैं। बता दें कि वर्तमान प्रस्ताव में कोकोनट पानी के बॉटल पर हाई शुगर की चेतावनी लगाई जा सकती है।
गौरतलब है कि भारतीय नियामक साल 2017 से ही कलर कोडेड और स्टार रेटिंग्स चेतावनियों की बात कर रही हैं। इसमें प्रोडक्ट की न्यूट्रिशनल वैल्यू की जानकारी रहेगी। हालांकि निर्माताओं को इसके पीछे इंग्रेडिएंट्स और बेसिक न्यूट्रिशनल इंफॉर्मेंशन की जानकारी देनी होगी। वहीं, स्वास्थ्य कार्यकर्ता इस मामले में ज्यादा ट्रांसपैरेंसी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी मांग उठाई है। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में नियामकों को वॉर्निंग लेवल पर विचार रखने की बात कही थी। उसने यह सुझाव दिया था कि एजेंसियों को इजरायल के रेड और ग्रीन मैसेजिंग सिस्टम के बारे में देखना चाहिए।
मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।
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