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लाल सागर पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस समुद्र को ‘लाल सागर’ क्यों कहा जाता है, जबकि इसका पानी लाल दिखाई नहीं देता? सागर लगभग 355 किलोमीटर चौड़ा है और इसकी लंबाई करीब 2250 किलोमीटर तक फैली हुई है, जो इसे दुनिया के प्रमुख समुद्री मार्गों में से एक बनाती है।
लाल सागर का नाम इसके पानी के रंग से नहीं, बल्कि इसके किनारे पाए जाने वाले लाल रंग के पहाड़ों और चट्टानों से आया है। अरबी में इसे ‘अल-बहर अल-अहमर’ कहा जाता है, जिसका मतलब है ‘लाल सागर’। यह नाम संभवतः इसके किनारे पाए जाने वाले लाल रंग के पहाड़ों और चट्टानों के कारण दिया गया है।
लाल सागर में एक प्रकार का अल्गी (एक प्रकार का पौधा) पाया जाता है, जो लाल रंग का होता है। जब यह अल्गी अधिक मात्रा में होता है, तो यह समुद्र के पानी को लाल रंग का दिखाता है। लेकिन यह रंग बहुत कम समय के लिए होता है और आम तौर पर समुद्र का पानी नीला दिखाई देता है।
लाल सागर को दुनिया का सबसे नमकीन समुद्रों में से एक माना जाता है। सामान्य महासागरों में नमक की मात्रा करीब 35% तक होती है, लेकिन सागर में नमक की मात्रा करीब 40% तक है। इसके पीछे कम नदियों को गिरना है। यहां बारिश भी बहुत कम होती है। इस इलाके में बहुत गर्मी पड़ती है। इससे पानी तेजी से भाप बनकर उड़ता रहता है और नमक की मात्रा बढ़ती जाती है.
लाल सागर का पानी आमतौर पर नीला या हरा ही दिखाई देता है। एक खास तरह की काई ट्रिकोडेसमियम इरिथ्रेयूम की वजह से काई ज्यादा मात्रा में फैलती है। इससे समुद्र के पानी का रंग हल्का लाल या भूरा दिखाई देने लगता है।
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राघव तिवारी न्यूज24 में शिफ्ट हेड की भूमिका निभा रहे हैं। यहां टीम प्रबंधन के साथ नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि की खबरें भी कवर करते हैं। इससे पहले ये अमर उजाला, नईदुनिया, नवभारत टाइम्स (NBT) और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में रिपोर्टिंग कर चुके हैं। देवभूमि उत्तराखंड, इंदौर, नोएडा, कानपुर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में काम करने की वजह से राघव भिन्न-भिन्न कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत की समझ रखते हैं। राघव तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी की है। शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Mail ID: raghav.tiwari@bagconvergence.in Contact No. 8840671098
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