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लखनऊ में जीएसटी चोरी की ऐसी कहानी सामने आई है, जो हैरान कर देने वाली है. यहां क्राइम ब्रांच और रहीमाबाद पुलिस ने मिलकर एक गैंग को पकड़ा है. यह पूरा रैकेट फर्जी कंपनियां बनाता था और करोड़ों रुपये का लेनदेन दिखाकर टैक्सी चोरी करता था. फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े के जरिए अब तक कितने बड़े स्तर पर टैक्स चोरी की गई है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं.
पुलिस के मुताबिक, यह गैंग बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था. आरोपी पहले गरीब और जरूरतमंद लोगों को अपने जाल में फंसाते थे. उन्हें पैसों का लालच देकर उनके जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता डिटेल, मोबाइल नंबर आदि हासिल कर लिए जाते थे.
इसके बाद इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी किरायानामा और बिजली बिल तैयार किए जाते थे. इन नकली कागजातों के जरिए जीएसटी फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया जाता था. यानी कागजों में कंपनियां पूरी तरह वैध दिखाई देती थीं, लेकिन असल में उनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं होता था.
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इन फर्जी फर्मों के माध्यम से आरोपी करोड़ों रुपये का बोगस कारोबार दिखाते थे. खास तौर पर यह गिरोह फर्जी इनवॉइस बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) बेचता था. यानी बिना किसी असली लेनदेन के टैक्स का फायदा दूसरे लोगों को अवैध तरीके से पहुंचाया जा रहा था. इसके बदले आरोपी मोटा कमीशन लेते थे.
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि लेनदेन को असली दिखाने के लिए फर्जी ई-वे बिल भी बनाए जाते थे. इससे कागजों में सब कुछ सही नजर आता था और लंबे समय तक यह गड़बड़ी पकड़ी नहीं जा सकी.
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इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी रविंदर गिरि को गिरफ्तार कर लिया है. उससे पूछताछ की जा रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके. पुलिस को शक है कि इस गिरोह में कई और लोग शामिल हो सकते हैं और इसका नेटवर्क अन्य शहरों तक भी फैला हो सकता है.
तकनीकी जांच और निगरानी के जरिए पुलिस ने इस पूरे फर्जीवाड़े की कड़ियों को जोड़ा और आखिरकार गिरोह का भंडाफोड़ किया. अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरन यादव ने बताया कि इस पूरे मामले में आरोपी की गिरफ्तारी कर ली गई है. उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
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