Shreeom Singh
Date: 26-10-26 17:06
Drug Addiction: नशे की लत इंसान की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है. इसके बावजूद दुनियाभर में नशीले पदार्थों का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में ड्रग्स लेने वालों की संख्या में 34 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में नशे का इस्तेमाल अब बड़ी स्वास्थ्य और सामाजिक समस्या बनता जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र की ड्रग्स और अपराध से जुड़ी संस्था UNODC की World Drug Report 2026 के अनुसार, साल 2024 में दुनियाभर में करीब 33.1 करोड़ लोगों ने नशीले पदार्थों का इस्तेमाल किया. यानी बीते 12 महीनों में हर 16 में से लगभग एक व्यक्ति ने ड्रग्स लिया. इनमें 15 से 64 साल की उम्र के लोग शामिल हैं.
प्रतिबंध के बावजूद आसानी से मिल रहे नशीले पदार्थ
रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता यह जताई गई है कि बाजार में नशीले पदार्थों की किस्में बढ़ रही हैं. इनमें कुछ ड्रग्स पहले से ज्यादा ताकतवर और खतरनाक हैं. इसका असर सिर्फ नशा करने वाले व्यक्ति पर नहीं पड़ता, बल्कि उसके परिवार, कामकाज, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ समाज पर भी पड़ता है.
नए सिंथेटिक ड्रग्स भी बढ़ा रहे चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, कैनाबिस दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला नशीला पदार्थ है. इसके अलावा ओपिओइड, एम्फेटामाइन, कोकीन और एक्स्टेसी जैसे ड्रग्स भी बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जाते हैं. वहीं, नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह नई तकनीकों की मदद से अपने कारोबार को बढ़ा रहे हैं.
रासायनिक तरीके से तैयार किए जाने वाले सिंथेटिक ड्रग्स भी चिंता का कारण हैं. इनमें से कुछ पदार्थ कितने ताकतवर हैं और शरीर को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल होता है.
रिपोर्ट की 5 बड़ी बातें
साल 2024 में दुनिया भर में करीब 33.1 करोड़ लोगों ने ड्रग्स का इस्तेमाल किया. पिछले एक दशक में यह संख्या 34 फीसदी बढ़ी है. कैनाबिस लेने वालों की संख्या सबसे ज्यादा, करीब 25.6 करोड़ रही. इसी दौरान दुनिया में कोकीन का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. नए सिंथेटिक ड्रग्स की बढ़ती संख्या भी स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताएं बढ़ा रही है.
कैनाबिस का इस्तेमाल सबसे ज्यादा
UNODC की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में करीब 25.6 करोड़ लोगों ने कैनाबिस का इस्तेमाल किया. इसके बाद ओपिओइड का नंबर रहा, जिसका इस्तेमाल करीब 6.3 करोड़ लोगों ने किया. वहीं, एम्फेटामाइन लेने वालों की संख्या 3.2 करोड़, कोकीन लेने वालों की 2.5 करोड़ और एक्स्टेसी का इस्तेमाल करने वालों की संख्या करीब 2.1 करोड़ रही.
25 साल में पांच गुना बढ़ीं ड्रग्स की किस्में
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 25 साल में जब्त किए जाने वाले नशीले पदार्थों की किस्मों की संख्या करीब पांच गुना बढ़ गई है. बाजार में नए ड्रग्स के साथ कई पदार्थों को मिलाकर बनाए गए नशीले उत्पाद भी सामने आ रहे हैं.
महिलाओं की बात करें तो एक्स्टेसी जैसे ड्रग्स का इस्तेमाल करने वालों में उनकी हिस्सेदारी 32 फीसदी रही. एम्फेटामाइन में यह 28 फीसदी, कोकीन में 25 फीसदी और कैनाबिस में 24 फीसदी थी. वहीं, अफीम से जुड़े नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 14 फीसदी रही.
ड्रग्स से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे करोड़ों लोग
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में ड्रग्स से जुड़ी वजहों से करीब पांच लाख लोगों की मौत हुई. यह आंकड़ा एक दशक पहले के मुकाबले 29 फीसदी ज्यादा है. वहीं, 2024 में करीब 6.3 करोड़ लोग नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे.
इलाज की स्थिति भी चिंताजनक है. नशे से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हर 12 में से केवल एक व्यक्ति को इलाज मिल रहा था. महिलाओं में यह स्थिति और खराब रही. ऐसी समस्या वाली हर 23 महिलाओं में से सिर्फ एक को इलाज मिला, जबकि पुरुषों में हर नौ में से एक को इलाज मिल पाया.
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में करीब 1.4 करोड़ लोग इंजेक्शन के जरिए ड्रग्स ले रहे थे. इनमें लगभग 69 लाख लोग हेपेटाइटिस सी और 17 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित थे. करीब 15 लाख लोग दोनों संक्रमणों से प्रभावित थे.
कोकीन का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
साल 2024 में कोकीन बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कोका के पौधों की खेती 3,85,100 हेक्टेयर जमीन पर हुई. यह 2023 के मुकाबले दो फीसदी ज्यादा थी. वहीं, 2025 में अफीम की खेती करीब 1,13,800 हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल से पांच फीसदी अधिक थी.
उत्पादन के मामले में भी कोकीन का आंकड़ा बढ़ा. साल 2024 में दुनियाभर में करीब 4,100 टन शुद्ध कोकीन तैयार की गई. यह एक दशक पहले के मुकाबले तीन गुने से भी ज्यादा है. वहीं, 2025 में अफीम का वैश्विक उत्पादन करीब 2,100 टन रहा. इससे अनुमानित 194 से 206 टन हेरोइन बनाई जा सकती थी.
755 नए साइकोएक्टिव पदार्थों की पहचान
रिपोर्ट में लैब में तैयार किए जाने वाले नए नशीले पदार्थों को लेकर भी चिंता जताई गई है. साल 2010 में ऐसे 162 पदार्थों की पहचान हुई थी, जबकि 2024 में दुनियाभर में 755 नए साइकोएक्टिव पदार्थों की जानकारी सामने आई. इनमें ज्यादातर सिंथेटिक थे. यह किसी एक साल में दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी संख्या है.
इनमें से 118 पदार्थ ऐसे थे, जो 2024 में पहली बार सामने आए. नए पदार्थों में स्टिमुलेंट्स की हिस्सेदारी 2015 के 40 फीसदी से घटकर 2024 में 31 फीसदी रह गई. दूसरी ओर, सिंथेटिक ओपिओइड की हिस्सेदारी तीन फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी हो गई.
पुलिस ने कितने नशीले पदार्थ जब्त किए?
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में दुनियाभर की पुलिस ने 9,033 टन गांजा और 2,439 टन कोकीन जब्त की. इसके अलावा 1,082 टन चरस, 487 टन मेथामफेटामाइन और 51 टन हेरोइन भी पकड़ी गई.
इसी साल ड्रग्स से जुड़े मामलों में करीब 59 लाख लोग पुलिस के संपर्क में आए. इनमें 63 फीसदी यानी 37 लाख लोग नशीले पदार्थ रखने या इस्तेमाल करने के मामलों से जुड़े थे, जबकि 28 फीसदी यानी करीब 16 लाख लोग तस्करी के मामलों में शामिल थे. कुल 37 लाख लोगों पर मुकदमा चला और 22 लाख लोगों को दोषी ठहराया गया.
नशे की लत के पीछे क्या कारण हैं?
नशे की लत और अपराध के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. कम उम्र में नशा शुरू करना, नशीले पदार्थों का आसानी से मिलना, मानसिक तनाव, डिप्रेशन, बचपन में किसी बुरे अनुभव से गुजरना, गरीबी और आसपास हिंसा का माहौल जोखिम बढ़ा सकते हैं.
वहीं, परिवार का सहयोग, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षित माहौल, खुद पर भरोसा और डॉक्टर की मदद नशे से जुड़ी समस्याओं से बचने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
नशे और अपराध के बीच क्या संबंध है?
नशे और अपराध के बीच संबंध को अलग-अलग तरीकों से समझा जा सकता है. नशीले पदार्थों के असर से व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव आ सकता है, जिससे झगड़े, हिंसा और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है. कुछ लोग नशे की लत पूरी करने के लिए पैसों की जरूरत के चलते चोरी जैसे अपराधों में शामिल हो सकते हैं. वहीं, ड्रग्स की तस्करी करने वाले गिरोहों के कारण भी हिंसा और डर का माहौल बन सकता है.
हालांकि, यह जरूरी नहीं कि नशा करने वाला हर व्यक्ति अपराध करे. परिवार का साथ, सही इलाज, शिक्षा और सुरक्षित वातावरण नशे की लत से उबरने और इससे जुड़े जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं.
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