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उत्तर प्रदेश के बांदा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. यहां चार शातिर युवक खुद को SDM, RTO और माइनिंग अधिकारी बताकर सड़क पर वाहन चालकों से खुलेआम अवैध वसूली कर रहे थे. कार्रवाई और गाड़ी सीज करने का डर दिखाकर ये लोग 500 से 1000 रुपये तक ऐंठ लेते थे. आखिरकार पुलिस ने चारों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया.
हैरानी की बात यह रही कि जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो आरोपियों का रुतबा, पहनावा और आत्मविश्वास देखकर कुछ देर तक पुलिसकर्मी भी उन्हें “सर-सर” कहकर संबोधित करते रहे. लेकिन जब उन्हें थाने लाकर सख्ती से पूछताछ की गई तो पूरा खेल सामने आ गया.
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पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकदी, मोबाइल फोन, वाहन और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं. चारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है. पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड खंगालने के भी निर्देश दिए हैं.
500-1000 रुपये लेकर छोड़ देते थे गाड़ियां
पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार 17 जुलाई को शहर कोतवाली क्षेत्र की कृषि विश्वविद्यालय चौकी के बाईपास इलाके में एक कार खड़ा कर यह गैंग गुजरने वाले कमर्शियल वाहनों को रोक रहा था. आरोपी खुद को SDM, RTO और माइनिंग विभाग का अधिकारी बताकर चालकों से पूछताछ करते और फिर कार्रवाई का डर दिखाते थे.
गाड़ी चालकों को धमकी दी जाती थी कि हम नए SDM हैं, नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन सीज कर दिया जाएगा या भारी चालान काटा जाएगा. डर के कारण कई चालक मौके पर ही 500 से 1000 रुपये देकर निकल जाते थे.
हालांकि, कुछ चालकों को शक हुआ कि अगर वास्तव में अधिकारी होते तो इतनी कम रकम लेकर नहीं छोड़ते. इसके बाद उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय चौकी प्रभारी दीपक सैनी को पूरे मामले की सूचना दी.
पहले पुलिस भी खा गई धोखा, पूछताछ में खुल गई पोल
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची. आरोपियों का हावभाव और बातचीत इतनी प्रभावशाली थी कि शुरुआती तौर पर पुलिसकर्मी भी उन्हें अधिकारी समझ बैठे. लेकिन थाने लाकर जब पहचान और दस्तावेजों की जांच की गई तो सच्चाई सामने आ गई.
पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उन्होंने बताया कि वे सरकारी अधिकारी बनकर लोगों में कार्रवाई का भय पैदा करते थे और गाड़ी सीज करने की धमकी देकर अवैध वसूली करते थे. जो भी रकम मिलती थी, उसे चारों आपस में बराबर बांट लेते थे.
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रीवा (मध्य प्रदेश) निवासी सौरभ और चित्रकूट निवासी कमल, राजकुमार तथा संतोष के रूप में हुई है. पुलिस सभी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है.
ASP ने बताया कैसे खुला पूरा खेल
एएसपी मेविस टॉक ने बताया कि कोतवाली नगर पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग ई-रिक्शा और अन्य वाहनों से अवैध वसूली कर रहे हैं. सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और चारों आरोपियों को पकड़ लिया.
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे गैंग बनाकर फर्जी SDM, RTO और माइनिंग अधिकारी बनते थे. फिर सड़क पर वाहन चालकों को रोककर कार्रवाई का डर दिखाते और उनसे पैसे वसूलते थे. वसूली की रकम को बाद में आपस में बांट लिया जाता था.
फिलहाल, पुलिस ने चारों आरोपियों को जेल भेज दिया है और उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गैंग ने अब तक कितने लोगों से वसूली की और कहीं दूसरे जिलों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम तो नहीं दिया.
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