भास्कर संवाददाता| जैसलमेर
जैसलमेर में अब बर्ड फ्लू पक्षियों में फैल गया है। रोजाना मृत पक्षियों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। अब तक जैसलमेर में 31 मृत पक्षी मिल चुके हैं। जिसमें सबसे ज्यादा 29 कुरजां व एक कोयल तथा एक यूरेशियन वल्चर है। गौरतलब है कि सर्दी के मौसम में यह प्रवासी पक्षी जैसलमेर अपना डेरा डालते हैं। लेकिन पिछले दिनों फलोदी में पहला बर्ड फ्लू का केस सामने आने के बाद गत 11 जनवरी से लगातार जैसलमेर में भी बर्ड फ्लू से पक्षियों की मौत हो रही है।
हालांकि वन विभाग व पशुपालन विभाग द्वारा मृत मिल रहे पक्षियों वाली जगह पर स्प्रे का छिड़काव किया जा रहा है। लेकिन पक्षियों की यह बीमारी अब फैल चुकी है। गौरतलब है कि देवीकोट क्षेत्र में अब तक 14 कुरजां व दो अन्य पक्षी इसकी चपेट में आ गए है। वहीं मोहनगढ़ के बांकलसर क्षेत्र में भी 15 कुरजां की मौत हो गई है। बर्ड फ्लू का इंसानों में भी फैलने का खतरा है। बर्ड फ्लू के मामले में जैसलमेर हॉट स्पॉट बन गया है।
पहला मामला फलोदी के खीचन में सामने आया था। इसके बाद जैसलमेर में पिछले एक सप्ताह में 30 से ज्यादा पक्षी इसका शिकार होकर काल के ग्रास बन गए है। तेज ठंड से बचने के लिए कई विदेशी पक्षी प्रवास के तौर पर जैसलमेर आते है। लेकिन इस साल पक्षियों में यह बीमारी फैलने से उनकी मौत हो रही है। बर्ड फ्लू के फैलने पर गोडावण के बचाव के लिए सबसे ज्यादा प्रयास किए जा रहे हैं। ब्रीडिंग सेंटर के माध्यम से इसका संरक्षण किया जा रहा है। इन ब्रीडिंग सेंटर में गोडावण की फौज बढ़ाने को लेकर नित नए प्रयोग भी किए जा रहे हैं। हालांकि गोडावण स्वभाव से शर्मिला पक्षी है। जिससे गोडावण में बर्ड फ्लू के फैलने का खतरा कम है । ऐसे में डीएनपी क्षेत्र में जहां गोडावण विचरण करते हैं वहां आमजन के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहीं ब्रीडिंग सेंटर पर भी पहले की तुलना में अब प्रोटोकॉल का ज्यादा ध्यान रखा जा रहा है। सर्दी के कारण फैल रही है बीमारी : पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सर्दी के मौसम के कारण ही बर्ड फ्लू की यह बीमारी पक्षियों में फैल रही है। ऐसे में आगामी समय में सर्दी का असर कम होने से असर घटेगा । इसमें भी अब पक्षी अपने देश लौटने की तैयारी में है। बीमार पक्षी इ अपने देश जाएंगे तो वहां इस बीमारी के फैलने की संभावना है। ^पक्षियों में फैल रहे बर्ड फ्लू को लेकर डीएनपी के क्लोजरों में आमजन के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही ब्रीडिंग सेंटर पर पहले की तुलना में अब सख्ती से प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। हालांकि अभी तक जहां गोडावण का मूवमेंट है, वहां इस बीमारी से ग्रसित कोई पक्षी मिलने की सूचना नहीं है। कुरजां का मूवमेंट भी कम है, जो सुखद है।
इसके साथ ही गोडावण शर्मीले स्वभाव का पक्षी है। इस बीमारी के लिहाज से पॉजिटिव पोइंट है। – आशीष व्यास, उपवन संरक्षक, डीएनपी ^बांकलसर में शनिवार को दो कुरजां के मृत मिलने की सूचना है। जिससे अब तक 31 पक्षियों की मौत हो चुकी है। मोहनगढ़ के बांकलसर क्षेत्र में 15 तथा देवीकोट में 14 मृत कुरजां मिली है। निर्देशों के अनुरूप शव मिलने के बाद स्प्रे कर पक्षियों के शवों को दफनाया जा रहा है। – उमेश वरंगटीवार, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग
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