गोबर के उपले गिरने से हुआ विवाद, बुजुर्ग को घेरकर किया मर्डर, एक परिवार के 6 सदस्यों को उम्रकैद – AajTak

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हरियाणा के सोनीपत में कोर्ट ने एक बुजुर्ग की हत्या के आरोप में एक परिवार के छह लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है.  कालूपुर में मामूली बात से शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि एक बुजुर्ग को अपनी जान गंवानी पड़ी. आंधी के दौरान पड़ोसी के प्लॉट में रखे उपले उड़कर जगदीश के घर में जा गिरे थे. परिवार ने पड़ोसी से उपले वापस ले जाने के लिए कहा. इसी बात को लेकर दोनों परिवारों के बीच कहासुनी हुई और विवाद बढ़ गया. अब करीब पांच साल पुराने इस मामले में अदालत ने एक ही परिवार के छह लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है.
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष चंदर सरोए की अदालत ने सुरेश, उसकी पत्नी सतरो, दोनों बेटे अमित और सुमित, सुरेश के बड़े भाई रमेश और रमेश के बेटे सिकंदर उर्फ शौकी को दोषी करार दिया. अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 1,03,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अभियोजन के अनुसार, 2 जून 2021 को कालूपुर में पड़ोसी सुरेश के प्लॉट में रखे उपले तेज आंधी के दौरान उड़कर जगदीश के घर में जा गिरे थे. इसके बाद जगदीश के परिवार ने सुरेश के परिवार से उपले वापस उठाकर ले जाने के लिए कहा. इसी बात को लेकर दोनों परिवारों में कहासुनी हो गई. मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों को पुलिस थाने बुलाया गया था.
आरोप है कि अगले दिन 3 जून 2021 को जब जगदीश और उनके परिवार के लोग थाने जाने के लिए घर से निकले तो रास्ते में सुरेश और उसके भाई रमेश के परिवार के लोगों ने उन्हें घेर लिया. अभियोजन के मुताबिक, आरोपी दो गाड़ियों में आए थे. उनके पास लाठी-डंडे और धारदार हथियार थे. इसके बाद जगदीश और उनके परिवार पर हमला कर दिया गया. हमले में जगदीश गंभीर रूप से घायल हो गए थे. बाद में उनकी मौत हो गई. घटना के बाद जगदीश की पत्नी संतरा ने 3 जून 2021 को सिटी थाना सोनीपत में शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज कराई. शिकायत में कुल 16 लोगों को नामजद किया गया था.
रास्ते में घेरकर किया था जानलेवा हमला
पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई और सुरेश, उसकी पत्नी सतरो, बेटे अमित और सुमित, बड़े भाई रमेश तथा रमेश के बेटे सिकंदर को गिरफ्तार किया. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पेश किए गए साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर इन छह आरोपियों को दोषी करार दिया गया. अदालत ने सभी छह दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 148, 302 और 323 के साथ धारा 149 के तहत दोषी माना. सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने दोषियों की पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अदालत से नरमी बरतने की अपील की.
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि सुरेश, रमेश और सिकंदर के परिवार की जिम्मेदारियां हैं. वहीं, सतरो के बीमार पति और अमित तथा सुमित की पत्नी और बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी का भी हवाला दिया गया. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि दोषियों का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है. दूसरी ओर, राज्य की ओर से लोक अभियोजक ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार किया.
अदालत ने कहा कि मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें मृत्युदंड दिया जाए. इसके बाद अदालत ने छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. अदालत ने षड्यंत्र की धारा में उम्रकैद के साथ 50 हजार रुपये जुर्माना और हत्या की धारा में भी उम्रकैद के साथ 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया. धारा 148 के तहत प्रत्येक दोषी को एक साल के कठोर कारावास और 2,500 रुपये जुर्माने की सजा दी गई. वहीं धारा 323 के तहत छह महीने के कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने का आदेश दिया गया.
कोर्ट ने हर दोषी पर लगाया 1.03 लाख से ज्यादा जुर्माना
अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी. प्रत्येक दोषी पर कुल 1,03,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है. अदालत ने यह भी आदेश दिया कि दोषियों से वसूल होने वाले जुर्माने में से 1.50 लाख रुपये मृतक जगदीश के परिवार को मुआवजे के रूप में दिए जाएं. इस मामले में एक तरफ विवाद की शुरुआत आंधी में उड़कर घर में आए उपलों को वापस लेने की बात से हुई थी, वहीं अगले ही दिन रास्ते में हमला करने का आरोप लगा. अब अदालत के फैसले के बाद छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. मृतक के परिवार को जुर्माने की राशि में से मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है.
 
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