गोरखपुर में मंगलवार को नार्मल में आयोजित एक कार्यक्रम में अपना दल (राष्ट्रीयवादी/जनता) के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा सरकार और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा।
इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की वकालत करते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया है।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा है और इसी नाते INDIA गठबंधन के साथ खड़ी है। रामलीला मैदान की रैली में भी पार्टी ने बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ अपनी ताकत दिखाई थी।
उनका कहना है कि देश में बदलाव का समय आ गया है और सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर आकर भाजपा सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़नी चाहिए।
80 करोड़ लोग 5 किलो राशन पर निर्भर
स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा सरकार पर युवाओं, किसानों, गरीबों और पिछड़ों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने करोड़ों नौजवानों से रोजगार का वादा किया, लेकिन उन्हें बेरोजगारी की तरफ धकेल दिया।
देश के 80 करोड़ लोगों को पांच से दस किलो अनाज पर निर्भर बना दिया गया है। किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है। वहीं, सरकारी नौकरियों और देश की राष्ट्रीय संपत्तियों को चहेते उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है।
मौर्य बोले- 1.14 लाख सरकारी स्कूल बंद कर गरीबों से छीनी शिक्षा
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश में 1.14 लाख सरकारी प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल बंद कर दिए गए। इससे गांवों के गरीब बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है।
उच्च शिक्षा को महंगा कर आम लोगों की पहुंच से दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी। पार्टी का चुनावी नारा ‘भाजपा हटाओ, लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ और उत्तर प्रदेश बचाओ’ होगा। इसी संकल्प के साथ उनकी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में उतरेगी।
अखिलेश यादव के PDA पर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव को आज तक PDA की परिभाषा समझ नहीं आई है। वह समय-समय पर इसकी अलग-अलग व्याख्या करते रहते हैं।
बातें दलितों और पिछड़ों के हक की होती हैं, लेकिन जब राज्यसभा भेजने की बारी आती है तो उद्योगपति नथवानी को भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि नथवानी के पिता भाजपा के सांसद हैं और ऐसे लोगों को राज्यसभा भेजा जा रहा है, जबकि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के लोगों को उनका हक मिलना चाहिए।
बोले- पद नहीं, विचारों के लिए छोड़ी राजनीति में कुर्सी
अपने ऊपर अवसरवादी होने के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अवसरवादी वह होता है जो पद और फायदे के लिए राजनीति करता है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष, कैबिनेट मंत्री का दर्जा और बसपा में राष्ट्रीय महासचिव जैसे पद विचारों के लिए छोड़े।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहते हुए जब एससी, एसटी और ओबीसी के आरक्षण को खत्म करने की बात सामने आई तो उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
उन्होंने बताया कि भाजपा छोड़ने के बाद वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। वहां भी जब उन्होंने मनुवादी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई तो उनके बयानों को निजी विचार बताकर किनारे कर दिया गया।
उनका आरोप है कि भाजपा छोड़कर उनके साथ आए मतदाताओं को सपा ने अपना समर्थक तो माना, लेकिन उनके विचारों के साथ पार्टी मजबूती से खड़ी नहीं हुई।
इसी वजह से उन्होंने सपा के राष्ट्रीय महासचिव और एमएलसी पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा पद और फायदा छोड़ा है, न कि विचारधारा।
बोले- मैं ईश्वर का नहीं, ढोंग और आडंबर का विरोधी हूं
धार्मिक बयानों को लेकर लगातार विवादों में रहने के सवाल पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि उन्होंने कभी ईश्वर को नकारा नहीं है। वह ढोंग, ढकोसले और आडंबर के विरोधी हैं और आगे भी इसका विरोध करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि धर्म का मतलब किसी को नीच बताना नहीं है। राम मंदिर के चढ़ावे और धन के इस्तेमाल को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। कहा कि मंदिर के नाम पर मिलने वाले करोड़ों-अरबों रुपये के हीरे, मोती, जवाहरात और सोने-चांदी के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाना गलत नहीं है।
बागेश्वर बाबा के बयान पर बोले- यही बात मैं कहता तो बवाल मच जाता
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान श्रीराम के पांच पिता होने से जुड़े वायरल बयान पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि अगर यही बात उन्होंने कही होती तो अब तक देश में बवाल मच गया होता।
उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया और कुछ संगठनों का रवैया दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के मामलों में अलग होता है। उनके मुताबिक, एक ही तरह के बयानों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देना दोहरे रवैये को दिखाता है।
रामलीला मैदान की भीड़ को बताया बदलाव का संकेत
रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली में जुटी भीड़ को उन्होंने देश में राजनीतिक बदलाव का संकेत बताया। कहा कि रैली में ऐतिहासिक संख्या में लोग पहुंचे थे और अपना दल (राष्ट्रीयवादी/जनता) ने भी बड़ी भागीदारी के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों का एकजुट होना जरूरी है।
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