चंदीपुर में रामलीला के पहले दिन राम जन्म की लीला का मंचन किया गया। कथा के अनुसार संतान न होने से चिंतित दशरथ अपनी रानियों के साथ कुलगुरु वशिष्ठ के पास पहुंचे। वशिष्ठ ने पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराने का सुझाव दिया और इसे ऋषि शृंग से कराने की बात कही।
मंचन में दशरथ के ऋषि शृंग के पास पहुंचने और यज्ञ संपन्न होने का दृश्य दिखाया गया। यज्ञ से अग्निदेव के प्रकट होने और खीर का पात्र देने के बाद रानियों द्वारा खीर सेवन का प्रसंग भी शामिल रहा। इसके बाद नवमी तिथि पर कौशल्या से राम, कैकई से भरत और सुमित्रा से लक्ष्मण व शत्रुघ्न के जन्म का मंचन हुआ। अयोध्या में उत्सव और सजावट के दृश्य भी दिखाए गए। कार्यकर्ता अजय और विजय के अनुसार रामलीला की जानकारी फैलने से दर्शकों की संख्या बढ़ रही है। शुरुआती दिनों में भीड़ कम रहती है, बाद में चौक भर जाता है।
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