Feedback
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य का पालिघाट इलाका इस समय वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां 4 अलग-अलग घोंसलों से लगभग 100 घड़ियाल के बच्चे सुरक्षित रूप से बाहर निकल आए हैं. इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियानों के बीच इसे एक बहुत बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित इस अभयारण्य में घड़ियाल के बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी शुरू की गई है. इसके तहत टीमें नियमित गश्त कर रही हैं, संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण कर रही हैं और घोंसले वाले इलाकों में सुरक्षा उपाय कर रही हैं.
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के उप वन संरक्षक मानस सिंह ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से घड़ियाल संरक्षण में सहयोग करने और नदी के किनारों तथा घोंसले वाले स्थलों के पास गैर जरूरी आवाजाही से बचने की अपील की है.
संवेदनशील हैं शुरुआती कुछ हफ्ते
सिंह ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, “घड़ियाल एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति है और इस मौसम में पालिघाट में बड़ी संख्या में बच्चों का सुरक्षित रूप से बाहर आना एक उत्साहजनक संकेत है.”
उन्होंने कहा, “नवजात बच्चों के लिए शुरुआती कुछ सप्ताह बेहद संवेदनशील होते हैं, क्योंकि इस दौरान सुरक्षा में कोई भी चूक गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है.”
अंडों से बच्चे निकलने का गणित
वन विभाग के अनुसार, अप्रैल की शुरुआत में पालिघाट और उसके आसपास के इलाकों में रेतीले किनारों पर बने 22-25 घोंसलों में घड़ियालों ने लगभग 500 से 600 अंडे दिए थे.
विभाग ने बताया कि घड़ियाल के अंडों से बच्चे निकलने में लगभग दो महीने का समय लगता है और मई के आखिरी सप्ताह में अंडों से बच्चे निकलने शुरू हो गए थे.
सिंह ने कहा, “आने वाले दिनों में अन्य घोंसलों से भी और अधिक बच्चों के निकलने की उम्मीद है. घोंसले वाले क्षेत्रों के चारों ओर तीन तरफ से सुरक्षा बाड़ लगाई गई है, ताकि जंगली जानवरों के हमले न हो सकें. कई जगहों पर इंसानी गतिविधियों को भी बैन कर दिया गया है.”
27.25 लाख से बनेगा पालन केंद्र
अधिकारी ने बताया कि पालिघाट में 27.25 लाख रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक घड़ियाल पालन केंद्र भी विकसित किया जा रहा है, जिससे संरक्षण प्रयासों को और अधिक मजबूती मिलेगी.
तीन राज्यों का साझा गौरव
चंबल अभयारण्य में वयस्क घड़ियालों की संख्या वर्तमान में 130 से अधिक है. 5400 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य घड़ियालों, मगरमच्छों, कछुओं, गंगा डॉल्फिन और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियों के लिए एक घर है. राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश प्रशासन इसकी देखरेख करता है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू