शहर के आराध्यदेव श्री राधा-मदनमोहन जी महाराज मंदिर में शुक्रवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर श्री राधा-मदनमोहनजी जी महाराज की महाभिषेक झांकी के रात 11.30 से 12 बजे तक दर्शन होंगे। इसमें भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में दो एलईडी लगाकर लाइव दर्शन कराए जाएंगे। यूट्यूब व फेसबुक पर मदनमोहन जी की बेवसाइट www. ShriMadanmohan ji temple. Com पर भी ऑनलाइन दर्शन होंगे।
श्री मदनमोहन जी महाराज टैम्पल ट्रस्ट प्रबंधक मलखान पाल व सहायक प्रबंधक भूपेंद्र पाल ने बताया कि पूर्व नरेश कृष्ण चंद्रपाल के निर्देश अनुसार मंदिर परिसर में व्यवस्थाएं सभी पूर्ण कर ली गई हैं। जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो। उन्होंने बताया कि आराध्यदेव श्री राधा- मदनमोहन जी महाराज यहां लोगों के मन-मन में बसे हैं। कुछ श्रद्धालु ऐसे भी हैं, जिनके दिन की शुरुआत ही ठाकुरजी के दर्शन से होती है। कई श्रद्धालु तो के दर्शन के बाद ही खाना खाने की परंपरा बरसों से निभा रहे हैं। इस दौरान शाम को नंदबाबा का दरबार मंदिर परिसर में सजेगा। नंद बाबा मंदिर में बैठेंगे।
इस दौरान चौधरी रामकिशन के परिवार की ओर से श्री मदनमोहन जी को जन्मोत्सव के बाद पहनाई जाने वाली पोशाक की परम्परा निभाई जाएगी। परिवार अपने कुटुंबियों के साथ गाजे-बाजे के साथ शहर के शोभायात्रा के साथ मंदिर पहुंचेंगे। नंदबाबा को पोशाक और मोहन भोग भेंट करेंगे। डांडी परिवार के सदस्यों की ओर से डांडा-डांडी नृत्य किया जाएगा। शाम 5 से 6 बजे तक नंदबाबा बधाइयां उत्सव होगा। इसके बाद रात 11.30 से रात 12 बजे तक वंशी वारे के जयकारों के बीच भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा। जन्म के साथ ही तोपों की सलामी दी जाएगी। पंडित मंत्रोच्चार के बीच शोडष उपचार अभिषेक करेंगे। इसमें भगवान के जन्म के साथ ही सफेद मखमल के वस्त्र के लिपटे भगवान का बालस्वरूप का दूध, दही, मधु, घी, शक्कर, सर्वासदी, सफेद तिली, जड़ी बूटियों और औषधियों आदि से शोडष उपचार अभिषेक होगा। इसके बाद भगवान की अभिषेक आरती होगी।
विशेष भोग में लड्डू, मठरी, पुआ, मक्खन, गूंजा, इमरती, जलेबी, रबड़ी, कचौड़ी, नमकीन मठरी, बालूशाही, मोहन भोग के साथ जगन्नाथपुरी में लगने वाले भोग ठोर, चन्द्रकला, खिलिबिडी, खाडा, केला, सुरमा सहित छप्पनभोग से ज्यादा व्यंजनों का भोग ठाकुर जी को लगाया जाएगा। पंजीरी और पंचामृत श्रद्धालुओं को बांटेंगे। उन्होंने बताया कि 5 सितंबर को सुबह 11 से 11.30 बजे तक मंदिर परिसर में नंद उत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान भगवान की आगोनी उतारी जाएगी। लड्डू, मठरी, पुआ, मक्का, खीरा आदि लुटाया जाएगा। भगवान के चरणों से स्पर्श कराई दही के घोल में मिली हल्दी को नंदोत्सव में श्रद्धालुओं पर पर छिड़का जाएगा।
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