Shreeom Singh
Date: 01-11-26 12:09
रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग पांचवें साल में पहुंच चुकी है. इस दौरान रूस के लगातार ड्रोन हमलों ने यूक्रेनी सैनिकों के लिए खुले मैदान में आवाजाही करना बेहद मुश्किल बना दिया है. ऐसे में सैनिक पुरानी गैस पाइपलाइनों को अपना ठिकाना बना रहे हैं. करीब 4 फीट चौड़ी इन भूमिगत सुरंगों में उन्हें कई हफ्तों से लेकर दो महीने तक रहना पड़ता है.
ये वही पाइपलाइन हैं, जिनके जरिए कभी रूस से यूरोप तक गैस पहुंचाई जाती थी. अब इनका इस्तेमाल यूक्रेनी सैनिकों तक खाना, हथियार और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने के लिए किया जा रहा है.
रूस ने भी किया था इन पाइपलाइनों का इस्तेमाल
यूक्रेन के कुपियांस्क इलाके में पुरानी गैस पाइपलाइनों का करीब 129 किलोमीटर लंबा नेटवर्क है. पिछले साल के आखिर में रूसी सैनिक इन्हीं रास्तों से कुपियांस्क में दाखिल होने में कामयाब हुए थे. इसके बाद यूक्रेनी सेना ने भी इन भूमिगत रास्तों का इस्तेमाल कर जवाबी कार्रवाई की योजना बनाई.
यूक्रेन की नेशनल गार्ड की खुफिया इकाई ने इन पाइपलाइनों के नक्शे जुटाए. साथ ही, इनके निर्माण से जुड़े पुराने गैस विशेषज्ञों की मदद ली गई. सैनिकों के सुरक्षित रहने के लिए पाइपलाइनों में हवा पहुंचाने का सिस्टम भी लगाया गया. यह पूरी योजना का सबसे मुश्किल काम था.
दिन में पहुंचता है खाना और गोला-बारूद
इन संकरी पाइपलाइनों के जरिए सैनिकों तक खाना, हथियार और गोला-बारूद पहुंचाया जाता है. इसके लिए छोटी इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. दिन में इन गाड़ियों से जरूरी सामान अंदर भेजा जाता है, जबकि रात के समय खुदाई से निकली मिट्टी की बोरियां बाहर लाई जाती हैं.
सुरक्षा के कारण सैनिकों को बाहर निकलने का मौका भी सिर्फ रात में मिलता है. इस तरह वे रूसी ड्रोन की नजर से बचने की कोशिश करते हैं.
घुटनों के बल रेंगकर आगे बढ़ते हैं सैनिक
पाइपलाइनों के अंदर रहना सैनिकों के लिए आसान नहीं है. रास्ते इतने संकरे हैं कि उन्हें झुककर या घुटनों के बल रेंगते हुए आगे बढ़ना पड़ता है. यहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती और ताजी हवा की भी कमी रहती है.
शौचालय के लिए सैनिक प्लास्टिक बैग और बोतलों का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा पाइपलाइनों में गैस के बचे हुए अंश, धूल और हवा की कमी भी उनकी सेहत के लिए खतरा बन सकती है. घायल सैनिकों को भी इन्हीं रास्तों से बाहर निकाला जाता है. वहीं, मोर्चे पर मारे गए सैनिकों के शव भी पाइपलाइनों के जरिए बाहर लाए जाते हैं.
थर्मल इमेजिंग से बचना हुआ मुश्किल
रूस के ड्रोन और थर्मल इमेजिंग तकनीक ने यूक्रेनी सैनिकों के लिए खुले मैदान में चलना खतरनाक बना दिया है. इस तकनीक की मदद से ड्रोन जमीन पर मौजूद लोगों के शरीर की गर्मी पहचान सकते हैं. ऐसे में सैनिकों के लिए छिपकर आगे बढ़ना भी मुश्किल हो गया है.
इसी खतरे को देखते हुए यूक्रेन अपनी सेना के ठिकानों, निगरानी चौकियों और सामान रखने वाले केंद्रों को जोड़ने के लिए भूमिगत सुरंगों का नेटवर्क तैयार करने की संभावनाएं तलाश रहा है.
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