पर्थ टेस्ट में शानदार जीत के बाद बढ़े हुए आत्मविश्वास और उत्साह के साथ एडिलेड में डे-नाइट टेस्ट खेलने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही. पहले दिन के खेल से ये साफ हो गया कि पिंक बॉल के सामने भारतीय बल्लेबाज तो फेल हुए ही लेकिन भारतीय गेंदबाज भी इसका फायदा नहीं उठा पाए. जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज समेत भारतीय पेस अटैक ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी को भेदने में सफल नहीं हुआ और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि भारतीय गेंदबाज पर्थ वाला प्लान भूल गए थे, जिसने उसे पहले टेस्ट में सफलता दिलाई थी.
शुक्रवार 6 दिसंबर से एडिलेड ओवल मैदान में शुरू हुए इस डे-नाइट टेस्ट के पहले दिन ही टीम इंडिया अपनी पहली पारी में सिर्फ 180 रन पर ढेर हो गई. ये कुछ वैसा ही था, जैसा पर्थ टेस्ट का पहला दिन था, जहां भारत ने पहले बैटिंग की थी और फिर 150 रन पर टीम ढेर हो गई थी. मगर पर्थ और एडिलेड टेस्ट के पहले दिन में बड़ा फर्क भारतीय गेंदबाजी का रहा. तब टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया के 7 विकेट गिरा दिए थे लेकिन एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया ने पहले दिन सिर्फ 1 विकेट खोकर 86 रन बना लिए थे.
तो आखिर ऐसा क्या हुआ, जो पर्थ में बेहद घातक नजर आई भारतीय गेंदबाजी एडिलेड में बेअसर हो गई? जिस पिंक बॉल को शाम के वक्त बल्लेबाजों के लिए ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा था, वो भारतीय गेंदबाजों के हाथों से वैसा कमाल नहीं कर सकी? इसका जवाब टीम इंडिया की गलती में ही छुपा है, जिसने पर्थ वाला प्लान नहीं दोहराया. असल में बुमराह, सिराज और हर्षित राणा ही पर्थ में भी भारत के प्रमुख गेंदबाज थे लेकिन वहां और एडिलेड के पहले दिन की गेंदबाजी में बड़ा फर्क था.
क्रिकबज के आंकड़ों के मुताबिक, टीम इंडिया के पेस अटैक ने एडिलेड ओवल में शुक्रवार को जो सबसे बड़ी गलती की, वो विकेट को टारगेट न करना था. इन आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि पर्थ में पहले दिन भारतीय गेंदबाजों ने 47.5 फीसदी गेंद ऑफ स्टंप और इसके बाहर की लाइन पर की थी, जो कि एडिलेड में करीब 45.3 प्रतिशत था. यानि लगभग बराबर था. फर्क आया स्टंप्स को हिट करने के मामले में. पर्थ में ये आंकड़ा 31 फीसदी गेंदों का था, जो स्टंप्स को निशाना बना रही थीं, जबकि एडिलेड में सिर्फ 20.3 पर्सेंट गेंद स्टंप्स पर जाकर लगतीं या उसकी लाइन पर थीं.
इसी तरह पर्थ में सिर्फ10.9 फीसदी गेंद ऑफ स्टंप के काफी बाहर थीं लेकिन एडिलेड में ये आंकड़ा 21.3 फीसदी था. यानि जितनी गेंद स्टंप्स को हिट कर रही थीं, उनसे ज्यादा स्टंप्स से बहुत बाहर जा रही थीं. यानि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के लिए गेंद को विकेटकीपर के लिए छोड़ते रहना आसान था, जिसने उन्हें क्रीज पर देर तक टिके रहने में मदद की. मार्नस लाबुशेन और नाथन मैकस्वीनी ने इसका जमकर फायदा उठाया. एक बल्लेबाज लंबे समय से फॉर्म के लिए जूझ रहा था, जबकि दूसरा बल्लेबाज अपने करियर का सिर्फ दूसरा ही टेस्ट खेल रहा था. जाहिर तौर पर भारतीय गेंदबाजों ने उनकी राह आसान कर अपनी और टीम की मुश्किलें बढ़ा दीं.