बांसवाड़ा| जीजीटीयू के हिंदी विभाग में हिंदी साहित्य में शोध के महत्त्व, चुनौतियों और संभावनाओं पर संगोष्ठी हुई। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को शोध के प्रति जागरूक करना और उपयोगी अनुसंधान के लिए प्रेरित करना रहा। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता उप कुलसचिव
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय हिंदी में निरंतर शोध को प्रोत्साहित कर रहा है ताकि नई पीढ़ी में आलोचनात्मक चिंतन और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित हो और भाषा कौशल और नेतृत्व क्षमता मजबूत बने। अकादमी प्रभारी शफकत राना ने कहा कि ज्ञान, विज्ञान और तकनीक सहित हर क्षेत्र में उपयोगिता सिद्ध करने के लिए शोध की गुणवत्ता बढ़ाना जरूरी है और इसमें हिंदी की भूमिका अहम है। मुख्य वक्ता लोकेंद्र कलाल ने पाठ्यक्रम आधारित सेमिनार, अच्छे शोध पत्र निर्माण और गुणवत्ता पर मार्गदर्शन दिया। समापन सत्र में परीक्षा नियंत्रक प्रमोद वैष्णव ने नई शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में शोध, प्रकाशन और उच्च शिक्षा के अवसरों पर बात रखी। कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने में शोध निदेशक प्रो. नरेंद्र पानेरी, संबद्धता प्रभारी डॉ. राकेश डामोर ने सहयोग किया।
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