भारत अपनी जीडीपी विकास दर को 7% से ऊपर बनाए रखने के लिए चीन के बाजार में फार्मा और आईटी जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाना चाहता है
जीडीपी विकास दर को सात प्रतिशत से ऊपर बनाए रखने के लिए चीन का बाजार भारत के लिए महत्वपूर्ण (फोटो: रॉयटर्स)
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राजीव कुमार, नई दिल्ली। वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में जीडीपी विकास दर को सात प्रतिशत से ऊपर बनाए रखने के लिए चीन का बाजार भारत के लिए महत्वपूर्ण दिख रहा है। तभी ब्रिक्स सम्मेलन में वार्ता के दौरान भारत चीन से अपने व्यापार नियमों को लचीला बनाने के लिए कह रहा है।
खासकर फार्मा व कई कृषि पदार्थों के निर्यात नियम को आसान बनाने के साथ आईटी सेक्टर में चीन के बाजार में भारत के प्रवेश की मांग की जा रही है। व्यापार नियमों की बाधाओं की वजह से चीन के बाजार में कई भारतीय वस्तुओं का निर्यात बिल्कुल नहीं हो पाता है जबकि दुनिया के विकसित देश उन आइटम की खरीदारी भारत से करते हैं।
चीन सालाना 2.58 लाख करोड़ डॉलर का वस्तु आयात करता है और भारत की हिस्सेदारी इस आयात में मात्र 19.5 अरब डॉलर की है। जबकि अमेरिका के बाजार में भारत करीब 88 अरब डॉलर का निर्यात करता है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के बाजार में भारत को अपने निर्यात बढ़ाने की बड़ी गुंजाइश है।
चीन के रुख में भारत के प्रति लचीलापन आने के बाद चालू वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-जुलाई में चीन होने वाले निर्यात में पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 36 प्रतिशत का इजाफा है। जानकार कहते हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे नंबर है जहां भारत अपने निर्यात को सालना 50 अरब डॉलर तक ले जा सकता है।
इससे चीन के साथ 100 अरब डॉलर के व्यापार घाटा को कम करने के साथ भारत को अमेरिका का एक बड़ा वैकल्पिक बाजार मिल सकता है। इसलिए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग से चीन के साथ व्यापार को लेकर अहम बातचीत की जा रही है। भारत तमाम विकसित देशों को सालाना 250 अरब डॉलर से अधिक की आईटी सेवा देता है, लेकिन चीन भारत को इसकी इजाजत नहीं देता है।
विकासशील देश की श्रेणी में आने के बावजूद चीन की प्रति व्यक्ति आय 14,000 डॉलर से अधिक है जो लगातार बढ़ रही है। धीरे-धीरे चीन गारमेंट व लेदर आइटम के निर्माण से खुद को पीछे खिंच रहा है, इसलिए इन सेक्टर में भी निर्यात बढ़ाने का भारत के लिए मौका है। दूसरी तरफ, भारत में होने वाले मैन्यूफैक्चरिंग का 70 प्रतिशत इंटरमीडिएट गुड्स का आयात चीन से किया जाता है।
चाहे वह दवा का कच्चा माल हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक्स का। अधिकतर मशीनरी का आयात चीन से होता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव मानते हैं कि चीन हमारी औद्योगिक अर्थव्यवस्था को फीड करता है और इस निर्भरता को कम करने के लिए भारत को टेक्सटाइल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े कच्चे माल का शुद्ध रूप से भारत में उत्पादन शुरू करना होगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स व सोलर से जुड़े आइटम को चीन से मंगाकर उसमें 10-15 प्रतिशत वैल्यू एडिशन करने से काम नहीं चलेगा। जानकारों का कहना है कि चीन की मशीनरी के रखरखाव के नाम पर भारतीय युवाओं को चीन में प्रशिक्षण दिलाया जाना चाहिए ताकि भविष्य में वे युवा भारत में इन मशीनरी को बनाने में मदद कर सके।
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