सिकंदराराऊ। जवाहर नवोदय विद्यालय अगसौली के तत्वावधान में हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत हिंदी प्रोत्साहन समिति के सहयोग से एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन संपन्न हुआ। कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व विधायक सुरेश प्रताप गांधी व विपिन वार्ष्णेय प्रबंध निदेशक आनंदी देवी महाविद्यालय, प्राचार्य डॉ भगवान सिंह कार्यालय अधीक्षिका पुष्पा सिंह , सीपीएस कॉलेज की प्रधानाचार्या शालिनी गर्ग एवं हिंदी प्रोत्साहन समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष व कवि देवेन्द्र दीक्षित शूल द्वारा मां सरस्वती के छवि चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
मथुरा की कवयित्री रैणु उपाध्याय ब्रज रेनु की सरस्वती वंदना के पश्चात कविता का क्रम प्रारंभ हुआ ।
हरिद्वार से पधारे कवि अभिनंदन गुप्ता ने पढ़ा – आंधियों के वैग को रोकने चल पड़े । रास्ते के जलजले जो मोड़ने को चल पड़े। वहीं उरई जालौन के कवि वीरेन्द्र तिवारी ने पढ़ा- आजादी की डोली को जो कंधे पर ले आए। किंतु जश्न आजादी में वो शामिल न हो पाए।
नोएडा की कवयित्री पल्लवी त्रिपाठी ने पढ़ा- अल्हड़ चंचल मन लिखते हैं। आंसू पीर सघन लिखते हैं ।
एक पंक्ति में अगर कहूं तो कविता में जीवन लिखते हैं। हापुड़ के कवि डॉ अनिल बाजपेई ने काव्य पाठ कर श्रोताओं में जोश भर दिया – जुगनू बनकर दीप जले तो रात अंधेरी हार गई। भगत सिंह की हंसती फांसी सोई कौम पुकार गई ।
नदी सुनती कथा शहादत झरने गाते गान यहां ।
भगत सिंह के साहस से है जिंदा हिंदुस्तान यहां।
पटियाली के युवा कवि अभिषेक माधव ने पढ़ा- जीवन का श्रेष्ठ सार माॅ ने हमको दिया, विपदा के समय हमको भी आंचल में ओढ़ कर ,सारे जहां का प्यार मां ने हमको दिया ।
वहीं मथुरा से पधारी कवयित्री रेणु उपाध्याय ने पढ़ा -मां मुझको बंदूक दिला दे मैं भी लड़ने जाऊंगा । देश धर्म रक्षा के हित में,मैं सैनिक बन जाऊंगा।
युवा कवयित्री शांभवी दर्पण ने पढ़ा- आधुनिकता के युग में सभी रिश्ते अस्वस्थ हैं।
बच्चे बुजुर्ग अपनी-अपनी धुन में मस्त हैं।
व्यंग्यकार देवेंद्र दीक्षित शूल ने छात्र-छात्राओं से भविष्य में कुछ बन जाने पर गलत तरीके से धन कमाने की बात यूं कही-
दाम कमा सकता बहुत, करके खोटे काम ।
पर दाम काम ना आएंगे जब आड़े होंगे राम।
इनके अलावा कवि प्रमोद विषधर एवं डॉ दत्तात्रेय द्विवेदी ने भी खूब तालियां प्राप्त कीं।
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