मेरठ ब्यूरो । वैसे तो यूरोपियन कल्चर में टैरो कार्ड रीडिंग का महत्व है। वहां भविष्य को जानने के लोग टैरो कार्ड रीडिंग करते हैं। अब मेरठ में भी युवाओं में टैरो कार्ड रीडिंग सीखने का चलन बढ़ गया है। कुछ युवा तो दूसरों का भविष्य बताने के लिए टैरो कार्ड रीडिंग को करियर बना रहे हैं। वैसे तो देश में ज्योतिष या एस्ट्रोलॉजी का भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है। हालांकि, अब टैरो कार्ड रीडिंग की ओर युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। एक्सपर्ट की मानें तो बीते पांच साल में युवाओं में टैरो कार्ड रीडिंग को सीखने का क्रेज बढ़ा है। यही नहीं, 10 से 20 प्रतिशत युवा अब टैरो कार्ड रीडिंग को ही करियर बना रहे हैं।
भविष्य जानने की उत्सुकता
वैसे तो हर दौर में लोगों को भविष्य जानने की उत्सकुता रहती है। वहीं, आजकल तो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म में न्यूमोरोलॉजी, टैरोकार्ड, जन्मकुंडली, वास्तु आदि के वीडियो सबसे ज्यादा वायरल होते हैं। यहां दंपती अपनी पारिवारिक समस्याओं, युवा अपने कॅरियर बनाने को लेकर और अधिकांश लोग स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के बारे में भी पूछते हैं। यही नहीं, अब टैरो कार्ड रीडिंग के जरिए भी लोग समस्याओं का जवाब खोजते हैं। युवा हो या बुजुर्ग हर किसी को टैरो कार्ड रीडिंग लुभा रही हैं।
78 कार्ड में है जवाब
मेरठ शास्त्रीनगर निवासी अनुप्रिया टैरो कार्ड रीडर हैं। उन्होंने बताया कि टैरो कार्ड में कुल 78 कार्ड होते हैं। इनके जरिए ही सारी समस्याएं और उनके हल खोजे जाते हैं। इसमें 22 मेजर कार्ड होते हैं।जो सबसे पहले बनाए गए थे। जबकि 56 माइनर कार्ड होते हैं। हर कार्ड की अपनी अलग पहचान होती है। इन कार्डों में राशियां, नंबर और ग्रह शामिल होते हैं। जो पूछने वाले व्यक्ति का जवाब उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने बताया कि टैरो कार्ड के लिए जन्मतिथि बताने की जरूरत नहीं होती है। व्यक्ति के नाम के आधार पर ही उसके व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में जानकारी दी जाती है।
यूरोपियन सभ्यता से शुरुआत
टैरो कार्ड रीडर प्रभा आनंद ने बताया कि टैरो कार्ड रीडिंग की शुरुआत यूरोपियन सभ्यता से हुई। पहले लोग इसे एक खेल के तौर पर इस्तेमाल करते थे, लेकिन जैसे-जैसे खेल में पूछे जाने वाले सवालों का लोगों को सही जवाब मिलना शुरू हुआ वैसे-वैसे लोगों की इसमें और रूचि बढऩे लगी। इसके पश्चात लोगों ने इसे व्यवसाय के रूप में सीखना शुरू कर दिया।
यूथ में सीखने की सबसे ज्यादा रुचि
ओम आनंदमय इंस्टीट्यूट ऑफ हीलिंग, मेडीटेशन और इंटीग्रेटेज थेरेपिज संस्थान की संचालक सुनैना शर्मा बीते 17 सालों से टैरोकार्ड रीडिंग कर रही हंै। पिछले 10 साल से कार्ड रीडिंग का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच साल में युवाओं में क्रेज अधिक बढऩे लगा है। पांच साल पहले उनके पास हर तीन माह में दो स्टूडेंट आते थे, लेकिन आज यह हाल है कि हर माह में चार से पांच नए स्टूडेंट आते हैं। जो टैरोकार्ड रीडिंग सीखना चाहते हैं। वहीं श्री श्याम सुंदर इंस्टीटयूट ऑफ हीलिंग, मेडीटेशन के संचालक श्यामप्रसाद के अनुसार बीते दस साल से टैरो कार्ड रीडिंग कर रहे हैं। पिछले पांच साल से कार्ड रीडिंग का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन साल में युवाओं का क्रेज टैरो कार्ड रीडिंग के लिए बढ़ा है।
रिलेशनशिप से जुड़े ज्यादा सवाल
टैरोकार्ड रीडर शिवांगी ने बताया कि उनके पास आने वाले लोगों में सबसे अधिक लोग रिलेशनशिप संबंधी प्रश्न पूछते हैं। जिसके बाद कॅरियर और स्वास्थ्य संबंधी होते हैं। वह प्रति सवाल के हिसाब से पैसा लेते हैं, इसके अलावा अगर ज्यादा डीपली देखना होता है तो उसकी फीस अलग होती है। वहीं टैरोकार्ड रीडर आकांंक्षा शर्मा ने बताया कि उनके पास रिलेशनशिप के अधिक सवाल आते हैं। इसके अलावा करियर व शादी को लेकर भी लोग सवाल पूछते हैं। लाइव सेशन में फ्री में एक दो सवाल बता देते हैं, लेकिन डीपली उस सवाल का आंसर देना हो या डीपली जानकारी हो तो प्रति मिनट के हिसाब से पैसा लिया जाता है।
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मैं पांच साल से टैरो कार्ड के जरिए लोगों की समस्याओं को जवाब दे रही हूं। सोशल मीडिया पर लाइव सेशन भी लेती हूं। आज युवा भी इसे सीखने में इंट्रेस्ट दिखा रहे हैं।
शिवांगी
इन दिनों टैरो कार्ड रीडिंग एक अच्छे करियर के रूप में सामने आया है। यह घर बैठकर भी आराम से कहीं से भी किया जा सकता है। बस नॉलेज होनी चाहिए।
तमन्ना शर्मा
अगर अच्छी जानकारी है तो टैरो कार्ड रीडिंग अच्छा प्रोफेशन है। आजकल यूथ इसमें अपना करियर बनाने की सोच रहे हैं। बीते पांच साल में टैरो कार्ड रीडिंग में करियर बनाने का खासा क्रेज बढ़ा है।
आकांक्षा मेहरा
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