ट्रंप की धमकी से और गिर सकता है रुपया, निर्यात पर भी पड़ेगा असर; लेकिन भारत ने तैयार कर ली है अमेरिका की काट – Jagran

कृपया धैर्य रखें।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकी से भारतीय रुपये में और गिरावट आ सकती है और शेयर बाजार भी प्रभावित हो सकता है। पिछले साल से 50% शुल्क लग …और पढ़ें
भारतीय वस्तुओं के निर्यात पर 50 प्रतिशत का शुल्क लगा दिया गया है
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सनक और भविष्य में भारतीय वस्तुओं के निर्यात पर और टैरिफ लगाने की धमकी अगर सच साबित होती है तो शेयर बाजार, डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में और गिरावट दिखाई देगी। इतना ही नहीं रोजगारपरक सेक्टर के अमेरिका को होने वाला निर्यात भी प्रभावित हो सकता है।
पिछले साल अगस्त से अमेरिका में भारतीय वस्तुओं के निर्यात पर 50 प्रतिशत का शुल्क लगा दिया गया है और उसके बाद से अमेरिकी बाजार में गारमेंट, लेदर आइटम, जेम्स व ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स जैसे रोजगारपरक सेक्टर के निर्यात की बढ़ोतरी दर कम हो गई है। पिछले साल मई-जून की तुलना में सितंबर और अक्टूबर में अमेरिका होने वाले निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।
मोबाइल फोन, फार्मा जैसे कुछ आइटम को ट्रंप सरकार ने 50 प्रतिशत शुल्क से मुक्त रखा है, इसलिए इनके निर्यात में होने वाली बढ़ोतरी से कुल निर्यात को समर्थन मिल रहा है। यही वजह है कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात में अब भी वृद्धि दिख रही है।
व्यापार समझौते को लेकर अमेरिका के उतार-चढ़ाव वाले रुख को भारत पहले ही भांप गया था, इसलिए उसने पिछले साल से ही अमेरिका के बाजार में प्रभावित होने वाले निर्यात की भरपाई के लिए वैकल्पिक बाजार की तलाश तेज कर दी थी। इसका नतीजा भी दिखने लगा और अब भारत दुनिया के 200 बाजारों में निर्यात करने लगा है। पिछले साल ब्रिटेन, ओमान व न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौता किया और इस साल इन समझौते पर अमल शुरू हो जाएगा।
इससे इन देशों में भारतीय वस्तुओं के निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और भारत का निर्यात बढ़ेगा। अमेरिकी चुनौतियों को देखते हुए भारत निर्यात प्रोत्साहन योजना भी शुरू कर चुका है। अमेरिकी टैरिफ की काट अब तक तो सफल रही है लेकिन अगर फिर से टैरिफ बढ़ता है तो उसकी भरपाई के लिए नए रास्ते तलाशने होंगे।
गारमेंट और जेम्स व ज्वैलरी के निर्यातकों ने बताया कि टैरिफ बढ़ाने की नई धमकी के बाद अमेरिकी खरीदार उन्हें थोड़े बहुत जो भी ऑर्डर दे रहे थे, उसे भी रोक देंगे। पिछले छह महीनों से भारत व अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने की चर्चा तो चल रही है, लेकिन इस पर अंतिम फैसला नहीं होने से अमेरिकी खरीदार असमंजस की स्थिति में है। 50 प्रतिशत शुल्क के साथ वे भारतीय निर्यातकों को अधिक ऑर्डर नहीं दे रहे हैं और शुल्क बढ़ने पर इस ऑर्डर में और कमी आएगी।
अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद ही डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में ह्रास होना शुरू हुआ और एक डॉलर का मूल्य 90 रुपये के पार चला गया। सरकार के अधिकारियों से लेकर बाजार विशेषज्ञ तक कई बार यह बयान दे चुके हैं कि भारत व अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के बाद रुपये में मजबूती आएगी।
ट्रंप की नई धमकी से रुपये में और कमजोरी आ सकती है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रंप के नए बयान के बाद विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) भी भारतीय बाजार से निकलेंगे, जिससे शेयर बाजार प्रभावित हो सकता है। पिछले साल अगस्त के बाद से भारतीय बाजार से भारी मात्र में एफआईआई की निकासी हुई। वर्ष 2025 में तीन लाख करोड़ एफआईआई की बिकवाली की गई।
सूत्रों के मुताबिक भारत अमेरिका के लिए अपने कृषि और डेरी बाजार को खोलने को बिल्कुल तैयार नहीं है। इस वजह से भी अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को टाल रहा है। अमेरिका भारत में अपने जेनेटिकली मोडिफाइड सोयाबीन और मक्के को बेचना चाहता है, लेकिन भारत किसानों के हितों को देखते हुए किसी भी सूरत में इन वस्तुओं की बिक्री की इजाजत देने के पक्ष में नहीं है।

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