ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ चल रही बातचीत अब तक उम्मीद के मुताबिक़ नहीं रही है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि आख़िरकार समझौता हो जाएगा.
संदीप राय, रौनक भैड़ा
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ चल रही बातचीत अब तक उम्मीद के मुताबिक़ नहीं रही है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि आख़िरकार समझौता हो जाएगा.
ट्रंप ने कहा, “ईरान के साथ बातचीत अभी तक सफल नहीं रही है. हम फ़िलहाल इससे संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन हो सकता है कि आगे हों.”
उन्होंने कहा, “या तो यह रास्ता अपनाया जाएगा, या फिर हमें जाकर काम पूरा करना पड़ेगा.”
ईरानी नेतृत्व का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि वे 'कमज़ोर स्थिति' से बातचीत कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “देखते हैं क्या होता है. हो सकता है हमें वापस जाकर कार्रवाई पूरी करनी पड़े, और यह भी हो सकता है कि इसकी ज़रूरत न पड़े.”
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के इस्लामिक गणराज्य के नेता समझौता करने के लिए 'बहुत इच्छुक' हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था 'तेज़ी से गिर रही है' और वहां महंगाई दर 250 प्रतिशत तक पहुंच गई है और ईरानी मुद्रा की क़ीमत लगभग ख़त्म हो चुकी है.
ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस समय ईरान सिर्फ़ समझौता करना चाहता है. उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है.”
उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के दौरान अमेरिका ने साफ़ कर दिया था कि दुनिया में आतंकवाद को समर्थन देने वाला सबसे बड़ा देश परमाणु हथियार नहीं रख सकता.
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दुबई स्थित कंपनी जीएमएस ने कहा है कि उसे अमेरिकी सरकार से उन चार कंटेनर जहाज़ों को तोड़ने की मंजूरी मिल गई है, जिन पर ईरान से संबंध होने के कारण प्रतिबंध लगाए गए थे.
बीबीसी पर्शियन के मुताबिक़, कंपनी के सीईओ ने कहा कि यह कदम कथित “शैडो फ़्लीट” को कम करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है.
शैडो फ़्लीट उन जहाज़ो को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बिना उचित बीमा, पर्यावरण और सुरक्षा मानकों वाले सैकड़ों जहाज़ों ने ईरान और रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद की है.
साथ ही, व्यस्त समुद्री मार्गों में तेल और ईंधन रिसाव का ख़तरा भी बढ़ाया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे जहाज़ों को तोड़ने के लिए औपचारिक व्यवस्था बनने से उन्हें सेवा से हटाने को बढ़ावा मिलेगा. इससे पर्यावरणीय जोखिम कम करने और प्रतिबंधित तेल व सामान के व्यापार पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है.
जीएमएस के संस्थापक और सीईओ अनिल शर्मा ने रॉयटर्स से कहा कि कंपनी कई महीनों से अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रतिबंधित जहाज़ों को अपने नियंत्रण में लेकर उन्हें डिसमेंटल करने को लेकर बातचीत कर रही थी.
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बाढ़ के पानी से भरी गुफ़ा में पांच ग्रामीण एक हफ़्ते तक फंसे रहे, आख़िरकार बचाव टीम ने उन्हें सुरक्षित निकाल लिया.
भारी बारिश और भूस्खलन के बाद ये लोग लाओस की एक गुफ़ा के अंदर फंस गए थे.
रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल लाओस और थाईलैंड की टीमों ने बताया कि उनके साथ गए दो अन्य ग्रामीण अब भी लापता हैं.
ये सातों लोग मध्य लाओस के ज़ायसोम्बौन प्रांत के रहने वाले थे. वे पिछले बुधवार को सोना और जंगली जीवों की तलाश में गुफ़ा के अंदर गए थे.
इसी दौरान भारी बारिश और भूस्खलन के कारण गुफ़ा का प्रवेश मार्ग बंद हो गया और वे बाहर नहीं निकल सके.
रेस्क्यू टीमों की ओर से जारी वीडियो में गोताखोरों को बेहद संकरे और कीचड़ से भरे रास्तों से गुजरते देखा गया. गुफ़ा के कई हिस्से लगभग पूरी तरह पानी में डूबे हुए थे.
लाओस संगठन ‘रेस्क्यू वॉलंटियर फॉर पीपल’ के बूनखाम लुआंगलाथ ने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि लापता लोगों की तलाश जारी रहेगी.
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ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान को 'अमेरिका के साथ समझौते के बारे में शुरुआती और अनौपचारिक मसौदा' मिला है.
बीबीसी पर्शियन ने रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा, " प्रस्ताव के मुताबिक़ ईरान एक महीने के भीतर होर्मुज़ स्ट्रेट में कमर्शियल जहाज़ों की आवाजाही को जंग से पहले वाली स्थिति में बहाल करेगा. इसके बदले में अमेरिका ईरान के आसपास तैनात अपने सैन्य बलों को हटाएगा और नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करेगा."
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जहाज़ों के मार्ग प्रबंधन को लेकर ईरान और ओमान के बीच तालमेल स्थापित किया जाएगा.
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिवालय में विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के उपनिदेशक अली बग़ेरी कानी ने भी पुष्टि की है कि ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों के गुजरने की नई प्रक्रिया पर बातचीत कर रहे हैं.
उनके मुताबिक, “जंग शुरू होने से पहले की तुलना में होर्मुज़ से गुजरने की शर्तें और प्रक्रियाएं पूरी तरह अलग होंगी.”
कानी ने यह भी कहा, “जब तक सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बन जाती, तब तक हम मानते हैं कि किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बनी है.”
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बुधवार को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को वैध ठहराने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कुछ सवाल उठाए हैं.
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "नागरिकता पर चुनाव आयोग अंतिम अथॉरिटी नहीं है."
उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैरा 97 से 101 तक पढ़ने पर साफ़ होता है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं, जिनमें बाद में सुधार किया गया."
सिंघवी ने कहा, "बिहार में 65 लाख डिलीशन हुए थे, उनके नाम दोबारा प्रकाशित करना और उसका कारण देना भी इसलिए संभव हो पाया क्योंकि कई राजनीतिक दल, एनजीओ ने इस मामले में याचिका दी थी."
"अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक पार्टियों को हाईकोर्ट द्वारा पार्टी बनाया गया, फिर बीएलए और पैरालीगल को शामिल किया गया, ये सिखाने और बताने के लिए कि फ़ॉर्म कैसे भरा जाता है, इसका मतलब ये है कि चुनाव आयोग ने जल्दबाज़ी में खामियों के साथ एक प्रोग्राम लॉन्च किया."
उन्होंने आगे कहा, "अगर ये प्रोग्राम बिना सिविल सोसायटी के हस्तक्षेप और बिना याचिकाओं के चलने दिया जाता तो खामियां रहतीं. इसमें सुधार सिर्फ इसलिए हो पाया, क्योंकि इन संस्थाओं ने इसकी मांग की थी. मगर दुखद है कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की खामियों पर कोई टिप्पणी नहीं की."
एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, बीजेपी ने किया स्वागत, विपक्ष क्या बोला
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असम विधानसभा में बुधवार को यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड बिल 2026 पास हो गया. इसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है.
नए क़ानून में बहुविवाह पर रोक लगाने के साथ विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है.
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बिल पास होने पर कहा, "यूसीसी लागू करना बीजेपी के चुनावी वादों में शामिल था और नई विधानसभा के पहले ही सत्र में इस ऐतिहासिक बिल को पारित करना सरकार के लिए गर्व की बात है."
उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम यूनिफॉर्म सिविल कोड अपनाने वाला तीसरा राज्य बनेगा. यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना हमारे चुनावी घोषणापत्र के प्रमुख वादों में शामिल था. हमें बेहद खुशी है कि विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद असम विधानसभा के पहले ही सत्र में हम इस ऐतिहासिक बिल को पास कराने में सफल रहे."
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी असम के लोगों को बधाई दी.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड बीजेपी की स्थापना के समय से ही पार्टी का संकल्प रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी शासित राज्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं."
वहीं, कांग्रेस विधायक जुबैर अनम मजूमदार ने कहा कि विपक्ष के पास बिल को रोकने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी.
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए उन मुद्दों को उठाया, जिन पर उसे आपत्ति थी.
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ़ विजय ने बुधवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की.
इस महीने राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद यह उनकी पीएम मोदी से पहली मुलाक़ात है.
प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाक़ात की तस्वीरें साझा की हैं.
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य की ज़रूरतों से जुड़ा ज्ञापन भी सौंपा. इसके अलावा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाक़ात का उनका कार्यक्रम है.
उधर, दिल्ली में 10 जनपथ के बाहर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मुख्यमंत्री विजय की तस्वीर वाला पोस्टर लगाया गया.
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भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए 1 जून से 4 जून 2026 तक नई दिल्ली में अहम बैठकें होंगी.
प्रेस इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीफ़ नेगोशिएटर करेंगे. इस दौरान अंतरिम व्यापार समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने और व्यापक व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी.
सात फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी कर पारस्परिक और दोनों देशों के हित में होने वाले अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर सहमति जताई थी.
इसी के तहत भारत की टीम 20 से 23 अप्रैल 2026 के बीच वॉशिंगटन डीसी गई थी, जहां अमेरिकी अधिकारियों के साथ आमने-सामने बैठकें हुई थीं.
अब बातचीत अगला दौर दिल्ली में होगा. बातचीत में मार्केट एक्सेस, गैर-टैरिफ़ बाधाओं, कस्टम और ट्रेड फ़ैसिलिटेशन, निवेश को बढ़ावा देने और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
ग़ौरतलब है कि हाल ही में भारत दौरे पर आए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर वार्ता के जल्द पूरा होने के संकेत दिए थे.
उन्होंने कहा कहा था, "हमारे व्यापार प्रतिनिधि बहुत जल्द यहां आ सकते हैं. पिछले हफ्ते या उससे पहले भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका आया था. हमने काफी प्रगति की है और मुझे लगता है कि अमेरिका और भारत के बीच ऐसा व्यापार समझौता होगा जो लंबे समय तक टिकाऊ रहेगा, दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगा और हमारे राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखेगा."
उधर, कांग्रेस ने मोदी सरकार से से इस ट्रेड डील को रद्द करने की मांग की है.
रुबियो के सामने जयशंकर बोले- हमारे लिए 'इंडिया फ़र्स्ट', कई स्रोतों से सस्ती ऊर्जा आपूर्ति करेंगे सुनिश्चित
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सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की नई भाषा नीति पर रोक को लेकर कोई भी दिशा निर्देश देने से इनकार कर दिया है.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, भारत के चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत ने इस मामले में सीबीएसई को जवाब देने के लिए नोटिस दिया है.
सीबीएसई की नई नीति के मुताबिक़ कक्षा 9-10 के लिए स्टूडेंट्स को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी जिनमें दो भाषाओं का 'नेटिव इंडियन लैंग्वेज' होना ज़रूरी है.
इसी नीति के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं.
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15-16 जुलाई की तारीख़ दी है.
नीट यूजी 2026 की नई तारीख़ घोषित, परीक्षा के बारे में और क्या-क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान
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तृणमूल कांग्रेस सांसद और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी समझी जाने वाली सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है.
उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजे पत्र में इस्तीफे की जानकारी दी है. हालांकि उन्होंने पार्टी में बने रहने की बात कही है. तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने इसकी पुष्टि की है.
काकोली अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस और बारासात ज़िला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष रही हैं. वो साल 2009 से लगातार चुनाव जीतती रही हैं.
विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ममता बनर्जी ने उनको हटा कर सांसद कल्याण बनर्जी को मुख्य सचेतक नियुक्त किया था. उसके बाद से ही वो नाराज चल रही थीं.
तब सोशल मीडिया पर अपनी एक पोस्ट में काकोली ने लिखा था कि 'उनको चार दशकों की निष्ठा का पुरस्कार मिला है.'
उन्होंने सुब्रत बख्शी को भेजे अपने पत्र में किसी का नाम लिए बिना एक पुरुष सांसद के कथित अभद्र व्यवहार और पूर्व सरकार के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं.
उन्होंने कहा है कि वो पार्टी के आम सदस्य की तरह लोगों के हित में काम करती रहेंगी.
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पत्र में उठाए सवाल
काकोली के एक करीबी नेता ने बताया, "सांसद ने अपने पत्र में आरजी कर की घटना से लेकर राशन और शिक्षा घोटाले तक का जिक्र करते हुए इनसे निपटने के सरकार के तौर-तरीकों पर सवाल उठाया है. उन्होंने पार्टी के एक सांसद और कुछ नेताओं के आचरण के साथ ही आई-पैक की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं."
उस नेता के मुताबिक, सांसद ने पत्र में लिखा है कि शीर्ष नेताओं की ओर से सहयोग नहीं मिलने के कारण उनके किसी पद पर रहने का कोई मतलब नहीं है.
उत्तर 24-परगना जिले की बारासात सीट से सांसद रही काकोली ने इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से बुलाई गई एक प्रशासनिक बैठक में भी हिस्सा लिया था.
उसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य पर अटकलें तेज हो गई थी.
हालांकि काकोली ने पत्रकारों से कहा, "यह किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं बल्कि ज़िले के विकास से संबंधित बैठक थी. इलाके की सांसद होने के नाते मैंने इसमें हिस्सा लिया है."
राजनीतिक हलकों में काकोली के इस फैसले को विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में पहली बड़ी बग़ावत माना जा रहा है.
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केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के घर पर छापा मारने का विरोध कर रहे सीपीएम कार्यकर्ताओं ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गाड़ियों पर हमला किया है.
समाचार एजेंसियों, पीटीआई और एएनआई के अनुसार, ईडी अधिकारी तिरुवनंतपुरम के थंपानूर पुलिस स्टेशन पहुंचे. इस दौरान पिनाराई विजयन के घर पर केंद्रीय एजेंसी की तलाशी के विरोध में सीपीएम कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे.
कार्यकर्ताओं ने ईडी अधिकारियों की गाड़ी पर हमला किया. एएनआई ने कार पर हमले की कई तस्वीरें जारी की हैं.
द हिंदू की एक ख़बर में भी हमले की पुष्टि की गई है और एक तस्वीर भी है जिसमें दिख रहा है कि एक सफेद कार को भीड़ धक्का देकर गिराने की कोशिश कर रही है. कार का विंड स्क्रीन टूटा हुआ है.
बुधवार की सुबह पिनाराई विजयन के तिरुवनंतपुरम स्थित घर पर ईडी छापेमारी के लिए पहुंची थी. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि राज्य में कुल 10 जगहों पर छापेमारी की जा रही है.
उधर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ईडी की कार्रवाई को लेकर बयान में कहा, "यह क्षेत्रीय विपक्षी दलों को निशाना बनाने और लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का एक और उदाहरण है."
केजरीवाल ने यह भी कहा कि 'कांग्रेस की ओर से ‘कार्रवाई नहीं होने’ की शिकायत के तुरंत बाद ईडी की रेड होना बीजेपी और कांग्रेस के रिश्तों पर सवाल खड़े करता है.'
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ग़ज़ा पट्टी में इसराइल के ताज़ा हमले में हमास के सैन्य विंग के नए कमांडर मोहम्मद ओदेह की मौत हो गई.
इससे पहले भी हमास के सैन्य विंग के जो कमांडर थे, उनकी मौत भी इसी तरह के इसराइली हमले में हुई थी.
स्थानीय मेडिकल टीम और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़, ग़ज़ा सिटी के सबसे व्यस्त इलाक़ों में से एक में स्थित एक रिहायशी इमारत पर मंगलवार को हमला हुआ जिसमें कम से कम तीन फ़लस्तीनी मारे गए और कई लोग घायल हुए.
इसराइल की सेना और उसकी सुरक्षा एजेंसी ने कहा कि ओदेह के छिपने के ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल हो रही इमारतों को निशाना बनाया गया.
एजेंसियों के मुताबिक, कई महीनों तक उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने के बाद यह कार्रवाई की गई.
हमास ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. हालांकि, हमास के एक स्थानीय सूत्र और परिजनों ने बताया कि ओदेह, उनकी पत्नी और उनका वयस्क बेटा हमले में मारे गए.
हमले के समय ईद-उल-अजहा से पहले बाज़ार में ख़रीदारी के कारण काफ़ी भीड़ थी.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़, इमारत पर अलग-अलग दिशाओं से लगभग एक साथ कम से कम पांच मिसाइलों से हमला हुआ था.
ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, सात अक्तूबर के हमास हमले के बाद जवाबी कार्रवाई में इसराइली बलों की कार्रवाई में अब तक 72,800 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने मंत्रालय के आंकड़ों को भरोसेमंद माना है.
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दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे आसाराम को बुधवार को राजस्थान हाई कोर्ट से आंशिक राहत मिली है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, कोर्ट ने आईपीसी और पॉस्को क़ानून के तहत गैंगरेप और बच्चे के साथ सामूहिक यौन उत्पीड़न के आरोपों से उन्हें बरी कर दिया.
हालांकि, नाबालिग से रेप के मामले में उनकी सज़ा बरकरार रखी गई, जिसमें उम्रकैद की सज़ा जारी रहेगी.
पीटीआई के मुताबिक़, जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीज़न बेंच ने आसाराम को आईपीसी की धारा 376(डी) और पास्को एक्ट की धारा 5(जी)/6 के आरोपों से बरी किया.
कोर्ट ने आपराधिक साज़िश से जुड़ी आईपीसी की धारा 120(बी) के तहत भी उन्हें दोषमुक्त कर दिया.
फिलहाल वह अस्थायी जमानत पर बाहर हैं. सोमवार को उनकी अंतरिम जमानत सात दिन के लिए बढ़ाई गई थी.
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कौन हैं आसाराम?
अप्रैल 1941 में मौजूदा पाकिस्तान के सिंध इलाके के बेरानी गांव में पैदा हुए आसाराम का असली नाम असुमल हरपलानी है.
सिंधी व्यापारी समुदाय से संबंध रखने वाले आसाराम का परिवार 1947 में विभाजन के बाद भारत के अहमदाबाद शहर में आ बसा.
साठ के दशक में उन्होंने लीलाशाह को अपना आध्यात्मिक गुरु बनाया. बाद में लीलाशाह ने ही असुमल का नाम आसाराम रखा.
1972 में आसाराम ने अहमदाबाद से लगभग 10 किलोमीटर दूर मुटेरा कस्बे में साबरमती नदी के किनारे अपनी पहली कुटिया बनाई.
यहाँ से शुरू हुआ आसाराम का आध्यात्मिक प्रोजेक्ट धीरे-धीरे गुजरात के अन्य शहरों से होता हुआ देश के अलग-अलग राज्यों में फैल गया.
आसाराम: बलात्कार के मामले में उम्रकैद की सज़ा
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युगांडा से बेंगलुरु आई एक महिला में इबोला जैसे लक्षण देखे गए थे, लेकिन बुधवार को महिला की सभी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई हैं.
कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की निदेशक डॉ रजनी एम ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "हमने सभी चार सीरोटाइप की जांच की. हमें पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी से रिपोर्ट मिल गई है. ये रिपोर्ट निगेटिव आई हैं.''
दरअसल, बेंगलुरु एयरपोर्ट पर युगांडा, कांगो और सूडान से आने वाले यात्रियों की नियमित जांच की जा रही है.
23 मई को एक 28 वर्षीय महिला की जांच हुई, महिला ने 'मांसपेशियों में दर्द' की शिकायत की थी. इसके बाद उन्होंने होटल में ख़ुद को क्वारंटीन कर लिया था.
नियमों के तहत महिला को होटल से एपिडेमिक डिज़ीज़ अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया. महिला के ब्लड सैंपल लेकर पुणे की लैब भेजे गए थे.
डॉ रजनी ने बताया, "रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद महिला को होटल में रहने की अनुमति दे दी गई है और कहा गया है कि वह अपने स्वास्थ्य में होने वाले किसी भी बदलाव पर नज़र रखे."
उन्होंने कहा, "हमारे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उनके संपर्क में रहेंगे. अगर उनमें कोई लक्षण दिखते हैं तो हम जांच करेंगे.''
गौरतलब है कि इबोला के ख़तरे को देखते हुए आने वाले यात्रियों पर 21 दिनों तक नज़र रखी जाती है.
नमस्कार!
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– मोदी के प्रशंसक और सलाहकार रहे अर्थशास्त्री अब आलोचना करते हुए दे रहे ये तर्क
– ताइवान ने भारत को छोड़ा पीछे, आगे की राह भी दिख रही मुश्किल
– 'बेख़ौफ़' पाटीदार के पास था गुजरात के ख़िलाफ़ ये प्लान, आरसीबी लगातार दूसरी बार फ़ाइनल में
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
उन्होंने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान सीमा पार 'आतंकवाद' को लगातार बढ़ावा देता रहा है.
राजदूत पर्वतनेनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा, "आज़ाद भारत की शुरुआत ही पाकिस्तान के सीमा पार हमलों से हुई थी, जिनका उद्देश्य भारतीय इलाकों पर कब्ज़ा करना था."
उन्होंने आरोप लगाया, "पाकिस्तान ने कई युद्ध छेड़े और लगातार सीमा पार 'आतंकवाद' को बढ़ावा दिया, जिससे संप्रभुता और शांति सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ."
पर्वतनेनी हरीश ने कहा, "पाकिस्तान का सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल और हज़ारों चोटों से भारत को कमजोर करने की नीति उसके उन झूठे दावों को उजागर करती है कि वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करता है. भारत को पूरा अधिकार है कि वह ऐसे आतंकवाद से अपनी रक्षा करे. पाकिस्तान को यह मानना होगा कि सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के गंभीर नतीजे होते हैं."
गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को ही चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के ज़िक्र को 'अनुचित' बताते हुए 'स्पष्ट रूप से ख़ारिज' कर दिया था.
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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ भड़काऊ और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली कथित टिप्पणियों के लिए एफ़आईआर दर्ज की गई है.
भाजपा नेता और एडवोकेट रिंकी चटर्जी सिंह ने सिलीगुड़ी साइबर क्राइम थाने में यह शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है.
शिकायतकर्ता ने सिलीगुड़ी में पत्रकारों से कहा, "पुलिस ने पहले शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया था. लेकिन बार-बार कोशिश करने के बाद इसे दर्ज किया."
पुलिस के मुताबिक़, शिकायतकर्ता ने कहा है कि ममता ने साल 2025 में एक धार्मिक आयोजन और विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता के धर्मतल्ला इलाक़े में आयोजित रैली में दो ऐसी टिप्पणियां की थीं, जिनसे हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं.
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता ने कहा है कि ममता ने एक कार्यक्रम में कहा था कि एक ख़ास समुदाय चाहे तो पाँच मिनट में दूसरे समुदाय को ख़त्म कर सकता है.
पुलिस के मुताबिक़, ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351 (1), 352 और 353 (2) के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई है.
धारा 351 (1) आपराधिक धमकी के अपराध और धारा 352 शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने के अपराध से जुड़ी है.
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