रुपया आज 13 मई को डॉलर के मुकाबले 25 पैसे गिरकर 95.75 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इससे पहले मंगलवार को भी रुपया 95.50 के ऑल टाइम लो पर पहुंचा था। पिछले कुछ दिनों से रुपए में लगातार गिरावट जारी है।
साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।
रुपए में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चा तेल महंगा होना है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 50% तक बढ़ चुकी हैं, जिससे रुपए की वैल्यू में 5% से ज्यादा की कमी आई है।
आम आदमी पर क्या होगा असर? रुपये के कमजोर होने का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ता है।
विदेश यात्रा और पढ़ाई: अगर आप विदेश घूमने जा रहे हैं या आपका बच्चा बाहर पढ़ रहा है, तो अब आपको डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये देने होंगे।
महंगाई का खतरा: कच्चा तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ती है, जिससे फल, सब्जी और जरूरी सामान महंगे हो जाते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक सामान: मोबाइल, लैपटॉप और अन्य विदेशी इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं क्योंकि उनका आयात डॉलर में होता है।
प्रधानमंत्री की अपील और सरकार के कड़े कदम रुपए में लगातार आ रही गिरावट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वीकेंड देशवासियों से विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) बचाने के लिए विशेष अपील की थी। उन्होंने लोगों से फिजूलखर्ची कम करने और देशहित में आर्थिक अनुशासन बनाए रखने को कहा था। इसी कड़ी में सरकार ने मंगलवार रात कीमती धातुओं के आयात पर टैरिफ बढ़ा दिए थे ताकि डॉलर के बाहर जाने की रफ्तार को कम किया जा सके।
आरबीआई गवर्नर बोले- महंगाई बढ़ी तो करेंगे दखल स्विट्जरलैंड में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान आरबीआई (RBI) गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक मौजूदा स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि फिलहाल हम आपूर्ति के झटकों को देख रहे हैं, लेकिन अगर महंगाई दर (Inflation) बहुत ज्यादा बढ़ती है, तो आरबीआई हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर खाड़ी देशों में संघर्ष लंबा खिंचता है, तो सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है, जो फिलहाल स्थिर रखी गई हैं।
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