ड्रग्स की तस्करी से जेलों में डिलीवरी तक…. दक्षिण-पूर्व एशिया में माफिया और आतंकियों का नया हथियार बना ड्रोन – southeast asia drone army criminals terrorists new weapon news in hindi – Jagran

दक्षिण-पूर्व एशिया में सस्ते ड्रोन अब अपराधियों, ड्रग तस्करों और आतंकवादी संगठनों के लिए खतरनाक हथियार बन गए हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।
दक्षिण-पूर्व एशिया में ड्रोन बने अपराधियों का खतरनाक हथियार।
ड्रग्स तस्करी, जेल डिलीवरी में ड्रोन का व्यापक उपयोग।
आतंकी साजिशों और युद्ध रणनीति में ड्रोन का इस्तेमाल।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्व एशिया में सस्ते और आसानी से मिलने वाले ड्रोन अब अपराधियों, ड्रग्स तस्करों और आतंकवादी संगठनों के सबसे खतरनाक हथियार बन चुके हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि तकनीक के इस गलत इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।
चाहे ड्रग्स की तस्करी हो या फिर जेलों तक डिलीवरी… इन ड्रोन की मदद से माफिया अपना काला बाजार चमकाने में लगे हुए हैं। 
अब इस पूरे मामले में सामने आए रिपोर्ट की माने तो इस क्षेत्र के सात देशों में ड्रोन के जरिए हो रही अवैध गतिविधियों के 86% मामले अकेले ड्रग्स तस्करी से जुड़े हैं। वहीं बात जेलों में सप्लाई की करें तो अपराधी अब जेल की ऊंची दीवारों के अंदर बंद कैदियों तक ड्रग्स, तंबाकू और मोबाइल जैसी प्रतिबंधित चीजें ड्रोन के जरिए पहुंचा रहे हैं।
मलेशिया की तापाह जेल और सुंगाई उदांग जेल के अलावा इंडोनेशिया और फिलीपींस की कई जेलों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कैदी सोशल मीडिया से ऑर्डर देकर ड्रोन से डिलीवरी मंगवा रहे थे। अकेले थाईलैंड में अब तक 4583 अवैध ड्रोन जब्त किए जा चुके हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ड्रोन अब सिर्फ तस्करी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनसे बड़े आतंकी हमलों की साजिशें भी रची जा रही हैं। बता दें कि इंडोनेशिया में सितंबर 2024 में पोप फ्रांसिस की यात्रा के दौरान उन पर हमले की साजिश रचने वाले सात लोग गिरफ्तार किए गए थे, जिनके पास एक मिनी ड्रोन बरामद हुआ था।
इंडोनेशिया से सीरिया में सक्रिय आतंकवादी संगठन ‘हयात तहरीर अल-शाम’ के लड़ाकों तक ड्रोन और उनके पार्ट्स भेजने का एक बड़ा नेटवर्क पकड़ा गया है। ये उपकरण ऑनलाइन खरीदकर खाने के सामान के डिब्बों में छिपाकर तुर्किये के रास्ते सीरिया भेजे जाते थे, जिनका भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किया गया था।
इतना ही नहीं म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध में ड्रोन ने जंग का तरीका ही बदल दिया है। यहां सशस्त्र उग्रवादी संगठनों ने 600 से ज्यादा अलग-अलग जगहों पर 2100 से अधिक ड्रोन हमले किए हैं। इन ड्रोन्स को सेना के जैमर से बचाने के लिए अब यूरोपीय सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ये आसानी से निशाना बना सकें। इसके जवाब में म्यांमार की सैन्य सरकार ने भी हवाई हमलों को बढ़ा दिया है। 
जांच में यह भी सामने आया है कि चीन में बने सस्ते ड्रोन और उनके जरूरी पुर्जों की तस्करी सामान्य कारोबारी नेटवर्क, यात्री विमानों और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों तक पहुंचाई जा रही है।

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