नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण की रफ्तार तेज कर दी है और पहली तिमाही में ही समूचे वित्त वर्ष के बजट लक्ष्य का करीब 31 प्रतिशत जुटा लिया है। यह किसी भी वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विनिवेश प्रक्रिया की अब तक की सबसे तेज प्रगति मानी जा रही है।
सरकार मई के मध्य से जून के बीच लगभग हर सप्ताह सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी (पीएसयू) में हिस्सेदारी बेचने के लिए बिक्री पेशकश (ओएफएस) लेकर आई। इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के छह प्रतिष्ठानों में हिस्सेदारी बेचकर सरकार ने कुल 18,561 करोड़ रुपये जुटाए।
यह हिस्सेदारी बिक्री सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, जीआईसी और आईआरएफसी में की गई। इसके अलावा, अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) के जरिये परिसंपत्तियों को बाजार पर चढ़ाने से भी 6,367 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
इस तरह विनिवेश एवं मौद्रीकरण के जरिये अब तक कुल 24,928 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 80,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने आगे भी सार्वजनिक क्षेत्र की कई कंपनियों के विनिवेश की रूपरेखा तैयार कर ली है और उम्मीद है कि वह तय लक्ष्य को पार कर सकती है।
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