Feedback
साल 2022… शहीद भगत सिंह कॉलेज (इवनिंग) की फ्रेशर्स पार्टी चल रही थी. स्टेज पर एक फ्रेशर आता है और बोलता है- आज अकेला चल रहा हूं, एक दिन पीछे काफिला होगा.
डायलॉग पर जमकर तालियां बजती हैं. रील भी वायरल हो जाती है. लेकिन तब इस लड़के की कोई खास पहचान नहीं थी. कॉलेज का बस एक फ्रेशर था. लेकिन अब चार साल बाद 2026 में उसी लड़के ने अपनी कही बात सच कर दी है.
वह स्पीच देने वाला सिंपल सा लड़का दीपांशु शौकीन अब 19 सितंबर 2026 से दिल्ली यूनिवर्सिटी का वाइस प्रेसिडेंट है. जीत भी ऐसी कि 72 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया.
दीपांशु शौकीन से पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी में कोई भी उपाध्यक्ष के पद पर निर्दलीय चुनाव नहीं जीता. हालांकि, अध्यक्ष पद पर राजीव गोस्वामी (1991), मनोज चौधरी (2009) ऐसा कर चुके हैं.
DUSU की वाइस प्रेसिडेंट (उपाध्यक्ष) सीट पर लड़े दीपांशु को 30,615 वोट मिले. वहीं दूसरे नंबर पर रहे ABVP के ईशू मौर्य को 16,910 और NSUI के वीर चतरथ को मात्र 4,313 वोट मिले.
दिल्ली यूनिवर्सिटी जहां बीजेपी के छात्र संगठन ABVP और कांग्रेस की स्टूडेंट विंग NSUI का बोलबाला है वहां दीपांशु शौकीन का एकतरफा जीतना महज तुक्का नहीं है. इसके पीछे की चार मुख्य वजह हम आपको बताते हैं–
1. चार साल की मेहनत, फिर ‘घातक’ हुआ बागी!
दीपांशु शौकीन फर्स्ट ईयर से ही कॉलेज की हर एक्टिविटी और गेम्स में आगे रहते थे. इसी दौरान NSUI से जुड़ गए. लेकिन तभी कोरोना आ गया और DUSU चुनाव पर ब्रेक लग गया. 2019 के बाद सीधे 2023 में चुनाव हुआ.
2023 में NSUI ने हितेश गुलिया को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया. दीपांशु ने उनके लिए जमकर कैंपेनिंग की. लेकिन नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए. इसके बाद 2024 में उन्होंने रौनक खत्री के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रचार किया और इस बार नतीजे उनके पक्ष में रहे.
(खत्री की जीत के वक्त सीधे हाथ पर कोने में खड़े दीपांशु शौकीन)
A post shared by Deepanshu Shokeen (@deepanshu_shokeen001)
तब तक दीपांशु छात्रों के बीच अपनी जगह बना चुके थे. साथ ही ‘बुद्धिस्ट स्टडीज’ में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) कर रहे थे. उसी साल 2025 में उन्होंने NSUI से टिकट मांगा, लेकिन टिकट नहीं मिला. उम्र और फाइनेंस फैक्टर का हवाला देकर उन्हें पीछे कर दिया गया.
2026 में दीपांशु ने एक बार फिर टिकट की दावेदारी की. लेकिन NSUI ने इस बार भी उन्हें टिकट नहीं दिया. एक पॉडकास्ट में दीपांशु ने आरोप लगाया कि टिकट कमेटी उनसे कहती थी कि तुम्हारे साथ गाड़ियां नहीं दिख रहीं, तुम पैसा खर्च करके माहौल नहीं बना रहे.
यहीं से कहानी ने करवट ली. पिता और दोस्तों ने समझाया तो दीपांशु ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. फिर उनके समर्थन में NSUI से जुड़े कई छात्र और पुराने समर्थक भी नजर आए.
साथ ही साथ यूनिवर्सिटी में अपने पुराने कामों को गिनाने का मौका दीपांशु ने भी नहीं छोड़ा. रौनक खत्री भले NSUI के लिए प्रचार कर रहे थे. लेकिन ‘बागी’ दीपांशु ने उनके साथ रहते किए कामों को सोशल मीडिया पर वक्त-वक्त पर याद दिलाया.
A post shared by Deepanshu Shokeen (@deepanshu_shokeen001)
और कहानी में एक मजेदार ट्विस्ट भी था… करोड़ीमल कॉलेज की जिस अंतिमा बहन के लिए वोट मांगने वाला वीडियो बनाकर रौनक खत्री वायरल हुए थे, वहो अंतिमा भी दीपांशु को सपोर्ट कर रही थीं.
A post shared by Deepanshu Shokeen (@deepanshu_shokeen001)
2. ‘आम आदमी’ वाली छवि
दिल्ली के पीरागढ़ी में रहने वाले दीपांशु का परिवार बिल्कुल साधारण है. पिता DTC यानी दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन में बस कंडक्टर हैं, जबकि मां आंगनवाड़ी में काम करती हैं.
A post shared by Dilli Dehat Project (@dilli_dehat)
घर की कहानी में न कोई राजनीतिक रसूख था, न पैसों का दम. यही बात दीपांशु को DUSU की उस छवि से अलग करती थी, जहां चुनावों में पैसे और पावर के इस्तेमाल की चर्चा अक्सर होती रही है.
यानी जिस चुनाव में बड़े नाम, बड़े संगठन और बड़ा खर्च चर्चा में रहता है, उसी चुनाव में एक बस कंडक्टर का बेटा बिना किसी संगठन के टिकट पर मैदान में उतर रहा था.
A post shared by Deepanshu Shokeen (@deepanshu_shokeen001)
दीपांशु ने खुद को आम छात्रों से जोड़ते हुए कहा कि डिफेंडर से आने वाले छात्र नेता मेट्रो, बस और ई-रिक्शा से आने वाले छात्रों की दिक्कतें नहीं समझ सकते. लेकिन उनके अपने प्रचार में महंगी गाड़ियां भी दिखीं. सवाल हुआ तो जवाब दिया- ‘वो गाड़ियां दोस्तों की हैं. जब जो गाड़ी आ जाती है, उसी में चले जाते हैं. कुछ देर में प्रचार के लिए निकलना होता है, लेकिन पता नहीं होता कि कौन सी गाड़ी आएगी.’’
3. चप्पल-जूते न पहनने का प्रण
DUSU चुनाव का प्रचार जोरों पर था. तभी 6 सितंबर को सत्य निकेतन में PG/हॉस्टल की एक बिल्डिंग गिर गई. हादसे में सात लोगों की जान चली गई. साउथ कैंपस के पास हुए इस हादसे के बाद कई छात्र नेता मौके पर पहुंचे. टिकट बंटवारा नहीं हुआ था, इसलिए दीपांशु और रौनक खत्री भी वहां रेस्क्यू और मलबा हटाने में एकजुट थे.
लेकिन निर्दलीय मैदान में उतरने के बाद मानों दीपांशु ने अपने दोस्त ‘मटका मैन’ रौनक की तरह ही कुछ अलग करने का फैसला किया.
वोटिंग से कुछ दिन पहले, 12 सितंबर को दीपांशु फिर सत्य निकेतन पहुंचे. इस बार हाथ में मलबा हटाने का औजार नहीं, कैमरा था. उन्होंने घटनास्थल से वीडियो बनाया और कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए वह ‘सत्याग्रह’ शुरू कर रहे हैं.
A post shared by Deepanshu Shokeen (@deepanshu_shokeen001)
दीपांशु ने ऐलान किया कि जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, वह जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे. यानी चुनावी प्रचार भी होगा, लेकिन नंगे पैर. इसके बाद चुनाव खत्म होने तक दीपांशु नंगे पैर ही प्रचार करते रहे.
A post shared by Deepanshu Shokeen (@deepanshu_shokeen001)
दिन-रात प्रचार के लिए घूमने से पैरों में छाले पड़ गए. दर्द हुआ, पैरों पर पट्टियां बंधीं, लेकिन प्रचार नहीं रुका. यानी जिस ‘सत्याग्रह’ का ऐलान उन्होंने कैमरे के सामने किया था, उसे चुनाव खत्म होने तक निभाते रहे.
चुनाव जीत लिया. अब बारी उस वादे की है, जो दीपांशु ने चुनाव जीतने से पहले किया था.
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि चुनाव जीतने के बाद DUSU ऑफिस जाने से पहले वह वाइस चांसलर ऑफिस के सामने धरने पर बैठेंगे. उनका कहना था कि बाकी लोग सत्य निकेतन हादसे को भूल गए हैं, लेकिन वह पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग से पीछे नहीं हटेंगे.
4. दिल्ली और जाट कनेक्शन
दीपांशु के साथ एक और बात उनके पक्ष में थी- उनका दिल्ली से होना. इस बार DUSU के चार प्रमुख पदों में से तीन पर दिल्ली के रहने वाले ‘मूलनिवासी’ छात्र जीते हैं.
दीपांशु के अलावा अध्यक्ष पद पर यश डबास कंझावला से और सचिव पद पर रिया चावड़ी बदरपुर से हैं. इसके अलावा दीपांशु जाट समाज से आते हैं. DU की छात्र राजनीति में जाट छात्रों की मौजूदगी और प्रभाव की चर्चा लंबे समय से होती रही है. हालांकि दीपांशु की जीत में इस फैक्टर का कितना असर रहा, इसे वोट आंकड़ों से अलग से साबित करना मुश्किल है.
इसके अलावा राजस्थान से निर्दलीय विधायक रविंद्र भाटी का सपोर्ट, हरियाणा के कुछ सिंगर्स का दीपांशु के साथ आना भी काम कर गया.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू