दक्षिण में कांग्रेस का 'सुपर शो'! एक और राज्य में सत्ता मिलने का अनुमान; BJP का बुरा हाल – Hindustan Hindi News

Kerala Exit Poll 2026: केरल विधानसभा चुनाव 2026 के ताजा एग्जिट पोल्स स्पष्ट रूप से राज्य में सत्ता परिवर्तन का संकेत दे रहे हैं। 140 सीटों वाली केरल विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 71 है और लगभग सभी प्रमुख सर्वे एजेंसियों ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान जताया है। अगर 4 मई को ये आंकड़े नतीजों में बदलते हैं, तो यह कांग्रेस पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक संजीवनी साबित होगी।
एग्जिट पोल्स में UDF आसानी से जादुई आंकड़ा पार करती दिख रही है।
Axis My India: UDF को सबसे ज्यादा 78-90 सीटें दे रहा है, जो एक बड़ी जीत का संकेत है।
CNN-News18, Times of India, People’s Pulse और P-MARQ: सभी सर्वे UDF को 70 से 85 सीटों के बीच रख रहे हैं।
LDF की स्थिति: पिछले 10 सालों से सत्ता में काबिज वामपंथी गठबंधन (LDF) 49 से 69 सीटों के बीच सिमटता दिख रहा है।
NDA का प्रदर्शन: BJP के नेतृत्व वाले NDA को केरल में अभी भी अपनी पैठ बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, उन्हें 0 से 4 सीटें मिलने का ही अनुमान है।
सत्ता विरोधी लहर: केरल में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली LDF सरकार लगातार दो बार (2016 और 2021) सत्ता में रही है। 10 साल के शासन के बाद, सत्ता विरोधी लहर का पनपना स्वाभाविक है, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस और UDF को मिलता दिख रहा है।
ऐतिहासिक ट्रेंड की वापसी: 2021 के चुनावों को छोड़ दें जब LDF ने सत्ता बरकरार रखकर इतिहास रचा था, तो केरल का यह पारंपरिक ट्रेंड रहा है कि वहां की जनता हर पांच साल में UDF और LDF के बीच सत्ता बदलती है। एग्जिट पोल्स उसी पुराने ट्रेंड की वापसी का इशारा कर रहे हैं।
केरल में कांग्रेस की इस संभावित वापसी के पीछे सत्ता विरोधी लहर के साथ-साथ सबसे बड़ा फैक्टर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की जोड़ी को माना जा रहा है।
वायनाड का मजबूत भावनात्मक रिश्ता: 2019 के लोकसभा चुनाव से ही राहुल गांधी ने केरल (वायनाड) को अपना दूसरा राजनीतिक घर बना लिया था। उत्तर भारत में कांग्रेस के कमजोर दौर में भी केरल ने गांधी परिवार का साथ दिया। राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का केरल में भारी असर रहा, जिसने जमीन पर पार्टी कैडर को फिर से जिंदा किया।
प्रियंका गांधी की धमाकेदार एंट्री: 2024 के आम चुनावों के बाद जब प्रियंका गांधी ने वायनाड उपचुनाव के जरिए चुनावी राजनीति में कदम रखा, तो केरल की जनता के साथ गांधी परिवार का रिश्ता और गहरा हो गया। इस विधानसभा चुनाव में प्रियंका और राहुल की संयुक्त रैलियों ने UDF के पक्ष में एक जबरदस्त माहौल बनाया। प्रियंका गांधी का महिलाओं और युवाओं से सीधा संवाद LDF के ‘प्रो-पुअर’ नैरेटिव को काटने में सफल रहा।
हालांकि कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है, लेकिन केरल में पार्टी की मजबूती के पीछे कुछ प्रमुख स्थानीय चेहरों का बड़ा हाथ है:
वी.डी. सतीशन: विपक्ष के नेता के तौर पर वी.डी. सतीशन इस वक्त कांग्रेस का सबसे आक्रामक और प्रभावशाली चेहरा हैं। उन्होंने पिछले पांच सालों में पिनाराई विजयन सरकार को भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के मुद्दों पर विधानसभा से लेकर सड़क तक लगातार घेरा है।
शशि थरूर: अगर ‘पैन-केरल’ लोकप्रियता की बात करें, तो शशि थरूर का नाम सबसे ऊपर आता है। खासकर युवाओं, मध्यम वर्ग और बुद्धिजीवी वर्ग में उनकी अपील कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक से कहीं आगे तक जाती है।
के. सुधाकरन: प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष के रूप में उनकी सांगठनिक क्षमता ने जमीनी स्तर पर पार्टी को एकजुट रखने में बड़ी भूमिका निभाई है।
केरल में संभावित जीत दक्षिण भारत में कांग्रेस की पकड़ को और मजबूत करेगी। वर्तमान परिदृश्य के अनुसार, कांग्रेस की स्थिति देश के राज्यों में इस प्रकार है।
कर्नाटक: दक्षिण भारत का एक प्रमुख राज्य, जहां कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई और सिद्धारमैया मुख्यमंत्री हैं।
तेलंगाना: पिछले चुनावों में बीआरएस (BRS) को हराकर कांग्रेस ने रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में सरकार बनाई।
हिमाचल प्रदेश: उत्तर भारत में सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है।
इसके अलावा, कांग्रेस ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के तहत कई राज्यों में सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है:
झारखंड: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ गठबंधन में।
तमिलनाडु: डीएमके (DMK) के नेतृत्व वाले गठबंधन सरकार में कांग्रेस एक महत्वपूर्ण सहयोगी है।
केरल के एग्जिट पोल्स अगर असल नतीजों में तब्दील होते हैं, तो कर्नाटक और तेलंगाना के बाद केरल दक्षिण भारत का तीसरा बड़ा राज्य होगा जहां कांग्रेस (UDF के रूप में) सत्ता में होगी। यह न केवल राज्य स्तर पर LDF के एकछत्र राज को तोड़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस के मनोबल को एक बड़ी ऊंचाई प्रदान करेगा। हालांकि, यह याद रखना आवश्यक है कि ये केवल एग्जिट पोल्स के अनुमान हैं, वास्तविक तस्वीर चुनाव आयोग के आधिकारिक नतीजों के बाद ही साफ होगी।
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