आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसलिए इस दिन रावण दहन किया जाता है। इस साल दशहरा 2 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। हालांकि दशमी तिथि 1 अक्टूबर को शाम 7 बजे से ही शुरू हो जाएगी और 2 अक्टूबर को शाम 7 बजे तक रहेगी। इसलिए उदया तिथि में दशहरा 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
कुछ जगह इस दिन शस्त्रों का पूजन किया जाता है। पूजन का मुहूर्त दोपहर 1:21 बजे से 3:44 बजे तक रहेगा। इस समय शस्त्रों को साफ करके इनका पूजन किया जा सकता है। आपको बता दें कि भगवान राम ने रावण का वध करने से पहले शस्त्र पूजन किया था, तभी से यह परंपरा चली आ रही है। दशहरा के दिन शस्त्र पूजन का खास महत्व है। शस्त्र पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 2:09 बजे से 2:56 बजे तक रहेगा।
दशहरे पर शमी के पौधे का पूजन किया जाता है। दरअसल इस पौधे को विजय का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान राम ने रावण से युद्ध से पहले इस पौधे के सामने झुककर विजय की कामना की थी। इसके अलावा महाभारत के युद्ध में पांडवों ने इस पेड़ के पीछे अपने खास शस्त्रछिपाए थे, तभी से इसकी पूजा करने की परंपरा है। विजयदशमी के दिन शमी के पौधों की पत्तियों पर हल्दी-कुमकुम और चावल चढ़ाकर दीपक जलाया जाता है। इसके बाद पत्तियां घर लाकर तिजोरी में रखी जाती हैं।
आपको बता दें कि इस दिन रावणदहन प्रदोष काल में शाम को किया जाएगा। रावण दहन 2 अक्टूबर को शाम के प्रदोष काल में शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक होगा। इस साल रावण दहन पर पंचक और भद्रा दोनों ही नहीं है, इसलिए बेझिझक रावण दहन किया जा सकता है।
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