Written By Mikita Acharya
इस दिवाली कार खरीद रहे हैं तो इस बात का ध्यान जरूरी रखें. (Image Credit-AI)
धनतेरस और दिवाली के मौके पर अगर आप नई कार खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए एक काम की बात है. 10 लाख रुपये से ज्यादा कीमत वाली कार खरीदने पर आपको 1% TCS (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) देना पड़ता है. हालांकि, यह कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं है, बल्कि आपकी तरफ से पहले जमा किया गया टैक्स है. अच्छी बात यह है कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय आप इस रकम को क्लेम कर सकते हैं. ऐसे में अगर आप इस साल महंगी कार खरीदते हैं, तो अगले साल ITR फाइल करते समय 10,000 रुपये या उससे ज्यादा का टैक्स क्रेडिट मिल सकता है. आइए समझते हैं कि यह नियम कैसे काम करता है और आप अपना पैसा वापस कैसे पा सकते हैं.
इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक, अगर किसी मोटर गाड़ी की बिक्री कीमत 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तो उस पर 1% TCS लगाया जाता है. इसका मतलब है कि कार खरीदते समय डीलर ग्राहक से गाड़ी की कीमत का 1% टैक्स के रूप में वसूलता है.
यह रकम डीलर खरीदार के PAN यानी परमानेंट अकाउंट नंबर के आधार पर सरकार के पास जमा करता है. इस नियम का मकसद ज्यादा कीमत वाली गाड़ियों की खरीदारी पर नजर रखना है. हालांकि, ग्राहकों को यह समझना जरूरी है कि TCS कोई अलग से लगने वाला अतिरिक्त टैक्स नहीं है. इसे आप अपने इनकम टैक्स रिटर्न में टैक्स क्रेडिट के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं.
इसे एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए आपने 20 लाख रुपये की कार खरीदी है. इस पर 1% TCS के हिसाब से डीलर आपसे 20,000 रुपये वसूलेगा. यह रकम आपके PAN के आधार पर सरकार के पास जमा होगी.
जब आप संबंधित वित्त वर्ष का ITR फाइल करेंगे, तो इस 20,000 रुपये को अपने टैक्स क्रेडिट के तौर पर क्लेम कर सकते हैं. अगर आपकी कुल टैक्स देनदारी इस रकम से कम है या कोई टैक्स बकाया नहीं है, तो नियमों के मुताबिक बची हुई रकम रिफंड के तौर पर मिल सकती है. वहीं, अगर टैक्स देनदारी ज्यादा है, तो यह रकम आपके टैक्स में एडजस्ट हो जाएगी.
सबसे पहले अपने कार डीलर या सेलर से Form 27D यानी TCS सर्टिफिकेट लें. इसमें आपका PAN, जमा किए गए TCS की रकम और टैक्स कलेक्शन की तारीख जैसी जानकारियां होती हैं. इन सभी जानकारियों को अच्छी तरह चेक कर लें. अगर डीलर ने आपको यह सर्टिफिकेट नहीं दिया है, तो इसे TRACES पोर्टल से भी डाउनलोड किया जा सकता है.
इसके बाद इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने अकाउंट में लॉग इन करें. यहां Form 26AS या AIS में जाकर चेक करें कि कार खरीदने पर जमा किया गया TCS दिखाई दे रहा है या नहीं. अगर इसमें TCS की रकम दर्ज नहीं है, तो ITR फाइल करने से पहले अपने डीलर से संपर्क करें.
अगले स्टेप में उस वित्त वर्ष की अपनी कुल इनकम टैक्स देनदारी का हिसाब लगाएं, जिसमें आपने कार खरीदी थी. अगर आपकी टैक्स देनदारी TCS की रकम से ज्यादा है, तो जमा किया गया TCS आपके टैक्स में एडजस्ट हो जाएगा. वहीं, अगर आपकी टैक्स देनदारी TCS से कम है, तो बची हुई रकम रिफंड के तौर पर क्लेम की जा सकती है.
अब संबंधित वित्त वर्ष के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करें. रिटर्न भरते समय Form 26AS या AIS में दिखाई गई TCS की रकम सही तरीके से दर्ज करें. फॉर्म सबमिट करने के बाद ITR को ई-वेरिफाई करना भी जरूरी है. इसके बाद इनकम टैक्स विभाग आपके रिफंड क्लेम को प्रोसेस करेगा.
ITR फाइल करने के बाद आप इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करके अपने रिफंड का स्टेटस चेक कर सकते हैं. अगर आपका रिफंड क्लेम मंजूर हो जाता है, तो रकम आपके प्री-वैलिडेटेड बैंक अकाउंट में भेज दी जाएगी.
हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर ग्राहक को पूरा TCS रिफंड मिले. अगर आपकी कुल टैक्स देनदारी जमा किए गए TCS से ज्यादा है, तो यह रकम टैक्स चुकाने में इस्तेमाल होगी. वहीं, टैक्स देनदारी कम होने या शून्य होने पर अतिरिक्त रकम रिफंड के रूप में मिल सकती है. इसलिए कार खरीदते समय TCS की रसीद और उससे जुड़े दस्तावेज संभालकर रखना जरूरी है.
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