Bulldozer Action Muslim Majority Jaitpur: दिल्ली के मुस्लिम बाहुल जैतपुर इलाके की खड्डा कॉलोनी में बुलडोजर कार्रवाई से कई परिवार प्रभावित हुए हैं. हालांकि, दिसंबर 2026 तक अनधिकृत कॉलोनियों को सीलिंग और तोड़फोड़ से संरक्षण देने वाला कानून लागू है. इसके उलट हाईकोर्ट ने भी सिर्फ खाली इमारतों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है, इसके बावजूद की गई डिमोलिशन कार्रवाई सवालों के घेरे में हैं.
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Delhi News in Hindi Today: दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली रेखा गुप्ता सरकार बनने के बाद से बुलडोजर कार्रवाई का डर लगातार लोगों के सिर पर मंडरा रहा है. विपक्षी दलों का आरोप है कि बड़े-बड़े विकास और जनता के हितों के दावे करने वाली सरकार अब गरीब परिवारों के आशियाने उजाड़ रही है.
देश की राजधानी के जैतपुर इलाके की खड्डा कॉलोनी में अचानक बुलडोजर कार्रवाई से हड़कंम मच गया. इस कार्रवाई ने सैकड़ों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है. सुबह होते ही बुलडोजरों ने कई इमारतों को मलबे में बदल दिया और लोग अपनी आंखों के सामने अपनी जिंदगी की जमा पूंजी उजड़ती देखते रह गए.
मिली जानकारी के मुताबिक, जैतपुर की खड्डा कॉलोनी में बुधवार (13 मई) को बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई. इस दौरान इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. बताया गया कि आधी रात से ही पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया था ताकि किसी भी तरह के विरोध को रोका जा सके.
सुबह होते ही आधा दर्जन बुलडोजर मौके पर पहुंचे और घरों को रौंदना शुरू कर दिया. इस कार्रवाई में कई इमारतों को गिरा दिया गया. हालांकि प्रशासन की ओर से कहा गया कि फिलहाल उन मकानों को नहीं तोड़ा गया जिनमें लोग रह रहे हैं. कार्रवाई मुख्य रूप से उन घरों या इमारतों पर की गई जो खाली पड़े थे. इसके बावजूद इलाके में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा.
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स्थानीय लोगों के मुताबिक एक हफ्ते पहले ही बड़े अधिकारियों के इलाके में आने के बाद लोगों को अंदेशा हो गया था कि जल्द कोई बड़ी कार्रवाई हो सकती है, लेकिन जब बुलडोजर चले तो कई परिवारों के सपने भी मलबे में तब्दील गए. कार्रवाई के दौरान सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की थी जो रोते हुए अपना घर टूटता देख रहे थे.
एक औरत ने रोते बताया कि उन्होंने पाई-पाई जोड़कर अपना घर बनाया था और अब समझ नहीं आ रहा कि परिवार को लेकर कहां जाएं, वह अब बेघर हो गई हैं और उनके पास रहने कोई जगह नहीं है. वहीं, एक शख्स ने दावा किया कि उनके साथ धोखा हुआ है. शख्स के मुताबिक उन्हें बाद में पता चला कि जिस जमीन को उन्होंने खरीदा था, उसकी असली मिल्कियत (मालिकाना हक) किसी और के पास थी.
बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने जमीन पर कब्जा कर उसे अलग-अलग परिवारों को बेच दिया था. जिन लोगों ने जमीन खरीदी, उन्हें यह जानकारी ही नहीं थी कि भविष्य में उनके घरों पर बुलडोजर चल सकता है. पूरा मामला तब सामने आया जब गीता नाम की औरत ने अपने परिवार के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने दावा किया कि जैतपुर की खड्डा कॉलोनी के पांच खास नंबरों वाली जमीन उनकी है और वहां बनाए गए निर्माण गैर-कानूनी हैं.
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर निर्माण को अवैध करार दिया और कार्रवाई का आदेश दिया. अदालत ने यह भी कहा था कि जिन मकानों में लोग रह रहे हैं, उन्हें फिलहाल न तोड़ा जाए, जबकि खाली इमारतों पर कार्रवाई की जा सकती है.
मुस्लिम बाहुल जैतपुर में बुलडोजर कार्रवाई सवालों के घेरे में है. इसकी वजह यह है कि साल 2023 में केंद्र सरकार ने दिल्ली की अवैध कॉलोनियों को लेकर एक विदेयक पारित किया था. इसके तहत राजधानी की अनधिकृत कॉलोनियों पर अगले तीन साल तक सीलिंग और बुलडोजर जैसी कार्रवाई नहीं की जा सकेगी.
उस समय राज्यसभा में इस विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री रहे हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार इन कॉलोनियों को नियमित करने और लोगों को संपत्ति अधिकार देने की दिशा में काम कर रही है. 2023 में “दी नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली लॉज (स्पेशल प्रोविजन्स) सेकेंड (अमेंडमेंट)” विधेयक के तहत दिल्ली अनधिकृत कॉलोनियों को दिसंबर 2026 तक सीलिंग और तोड़फोड़ जैसी दंडात्मक कार्रवाइयों से संरक्षण मिलेगा.
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रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू…और पढ़ें
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