दिहाड़ी पर काम करने वाली महिला मज़दूर की ज़िंदगी – BBC

समाज का एक ऐसा तबका है जो अगर अर्थव्यवस्था से हट जाए तो सब कुछ थम जाएगा. हमारा-आपका जीवन ही नहीं, बल्कि देश के विकास की रफ़्तार भी रुक जाएगी. ये तबका है, मज़दूरों का.
यह कहानी एक ऐसी महिला मज़दूर की है, जिसके सपने अब सिर्फ़ अपने बच्चों तक सीमित हो गए हैं. उन्हें लगता है कि उनके सपने उसी दिन पीछे छूट गए थे, जिस दिन उन्होंने दो जून की रोटी कमाने का फ़ैसला किया.
मज़दूर दिवस के मौके पर, पेश है ऐसी ही एक महिला की कहानी- मेहनत, मजबूरी और अधूरे सपनों की दास्तान.
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