नई दिल्ली. भारत और इज़राइल के बीच व्यापारिक संबंधों में बीते दशक में भारी बदलाव देखने को मिला है. जहां पहले रत्न-आभूषण और इलेक्ट्रिकल मशीनरी जैसे पारंपरिक उत्पादों का आयात-निर्यात ज्यादा होता था, वहीं अब दोनों देश एक-दूसरे से हथियार ज्यादा खरीद रहे हैं. भारत जहां पाकिस्तान और चीन जैसे दुश्मन देशों से घिरा हुआ है, वहीं ईरान सहित इजरायल के सभी पड़ोसी मुस्लिम देश उसके खून के प्यासे हैं. 2015 से 2024 के बीच भारत-इज़राइल के बीच हथियारों का व्यापार 33 गुना बढ़ा है. 2015 में यह व्यापार केवल 5.6 मिलियन डॉलर था, वहीं 2024 में यह बढ़कर 185 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया. 2023 में तो यह आंकड़ा 265 मिलियन डॉलर को भी पार कर गया था.
आज 13 जून को इज़राइल ने ईरान के कई परमाणु संयंत्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इस हमले में ईरान के कई प्रमुख रक्षा प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा है और उसके कई टॉप सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं. इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया. जवाब में ईरान ने भी 100 से अधिक ड्रोन इज़राइल की ओर दागे, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं.
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मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस व्यापार का बड़ा हिस्सा भारत द्वारा किए गए आयात का है, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में से एक है. 2015 में इज़राइल ने भारत को केवल 1.68 लाख डॉलर के हथियार बेचे थे, जबकि 2023 में यह बढ़कर 135 मिलियन डॉलर हो गया. हालांकि 2024 में यह आंकड़ा थोड़ी गिरावट के साथ 128 मिलियन डॉलर रहा. 2024 में हथियार और गोला-बारूद भारत की इज़राइल से दूसरी सबसे बड़ी आयात श्रेणी बन गई है, जो पहले कभी शीर्ष 10 में भी नहीं थी.
इज़राइल का भारत के कुल व्यापार में हिस्सा मात्र 3 अरब डॉलर है, जो भारत के कुल 1,160 अरब डॉलर के व्यापार का बहुत छोटा भाग है. इसलिए सीधे तौर पर भारत के निर्यात पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान-इज़राइल के युद्ध लंबा खिंचता है तो इससे हॉर्मुज़ की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण नौवहन मार्ग प्रभावित होंगे और इससे वैश्विक आपूर्ति और भारत के व्यापारिक हितों को भी झटका लग सकता है.
भारत और इज़राइल के बीच कुल व्यापार में बीते वर्षों में गिरावट देखी गई है. भारत का इज़राइल को निर्यात 2022 में 7.6 मिलियन डॉलर था, जो 2023 में घटकर 6.1 मिलियन डॉलर और 2024 में मात्र 2.1 मिलियन डॉलर रह गया. वहीं, इज़राइल से भारत का आयात भी 2022 के 2.8 अरब डॉलर से घटकर 2024 में 1.3 अरब डॉलर पर आ गया.
हालांकि, व्यापारिक रचना में बदलाव देखा गया है. उपभोक्ता वस्तुओं का हिस्सा 2015 में 4.7% था, जो 2024 में 17.8% हो गया है. वहीं, पूंजीगत वस्तुओं की हिस्सेदारी भी 27.1% से बढ़कर 45.7% तक पहुँच गई है. कुल मिलाकर, भले ही व्यापार का कुल आंकड़ा घटा हो, लेकिन भारत-इज़राइल के रणनीतिक रिश्ते और रक्षा सहयोग तेजी से गहरे होते जा रहे हैं.