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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (ASRB) के डेटा डिलीट होने का मामला अब बड़ा रूप ले चुका है. दिल्ली के मुख्य सर्वर में डेटा उड़ने के कुछ ही दिनों बाद हैदराबाद के बैकअप सर्वर से भी वही डेटा गायब हो गया.
इतना बड़ा मामला होने के बावजूद न FIR हुई, न कोई साफ जवाब…और इसी वजह से इस पूरे प्रकरण को लेकर संदेह और गहराता जा रहा है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर देश की सबसे बड़ी कृषि संस्थाओं का कोर डेटा डिलीट हो जाता है तो फिर FIR क्यों नहीं कराई गई?
FIR नहीं हुई, जांच जारी है…
ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने साफ कहा कि अब तक कोई FIR दर्ज नहीं करवाई गई है. उन्होंने ये भी माना कि पहले दिल्ली सर्वर का डेटा डिलीट हुआ, फिर कुछ दिन बाद हैदराबाद में बैकअप डेटा भी उड़ गया. हालांकि उन्होंने ये कहा कि चार लोगों पर कार्रवाई की गई है और डेटा रिकवर करने की कोशिश चल रही है. लेकिन घटनाक्रम देखें तो मामला सिर्फ मेंटेनेंस की गलती जैसा नहीं लग रहा.
महीनों तक दबा रहा मामला
सवाल उठ रहा है कि मार्च में डेटा उड़ने के बाद इसे अधिकारियों ने महीनों तक क्यों दबा कर रखा? केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को जब इसकी जानकारी मिली, तब जाकर जुलाई 2025 में एक छह सदस्यीय जांच कमेटी बनी.
सबसे अजीब बात कमेटी में एक भी बाहरी आईटी या साइबर विशेषज्ञ शामिल नहीं किया गया. सारा काम ICAR के अंदर के लोगों को दे दिया गया. पहला साइबर थ्रेट 28 फरवरी को, फिर दो सर्वर खाली, बैकअप क्यों नहीं लिया गया?
जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि 28 फरवरी को सर्वर पर पहला थ्रेट दिखा. मार्च में प्राइमरी सर्वर का डेटा गया. कुछ ही दिन बाद हैदराबाद का बैकअप सर्वर भी साफ हो गया. अब बड़े सवाल यही हैं कि थ्रेट मिलते ही डेटा सुरक्षित करने की क्या तैयारी की गई? डेटा उड़ने के बाद तत्काल बैकअप क्यों नहीं निकाला गया?
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